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साउथ कोरिया ने एक सिंगर के लिए क्यों बदला मिलिट्री कानून?

जिसके लिए साउथ कोरिया ने मिलिट्री सर्विस ऐक्ट में बदलाव किए हैं, उसकी कहानी क्या है?

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किम सिओक-जिन (एएफपी)
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स्वाति
2 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 2 दिसंबर 2020, 06:27 PM IST)
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आज आपको बताएंगे एक अद्भुत कहानी. एक देश है. उसने बीते रोज़ अपना एक क़ानून बदल दिया. अपने मिलिट्री सर्विस ऐक्ट में कुछ बदलाव कर दिए. पता है, ये क्यों किया गया? ताकि वहां के एक लड़के का संगीत न छूटे उससे. वो कुछ और बरस गाने गा सके. म्यूज़िक बना सके.
ये पूरा मामला क्या है?
शेक्सपियर का एक नाटक है- द विंटर्स टेल. इसमें लेयॉन्टिज़ को अपनी पत्नी हरमाओनी पर बेवफ़ाई का शक़ है. ये शक़ उनकी गृहस्थी तोड़ देता है. हरमाओनी पत्थर बन जाती है. इसी तरह 16 साल बीत जाते हैं. और फिर एक रोज़ चमत्कार होता है. एक संगीत बजता है. आवाज़ आती है- म्यूज़िक, अवेक हर. और फिर उसी संगीत का स्वर पत्थर हो चुकी हरमाओनी को फिर से ज़िंदा कर देता है. हैपी ऐंडिंग.
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द विंटर्स टेल शेक्सपियर द्वारा लिखित नाटक है.

सोचिए. एक ट्रैज़िक कहानी को हैपी ऐंडिंग देने के लिए इतना महान नाटककार क्या साधन चुनता है? वो चुनता है, म्यूज़िक. वही म्यूज़िक, जिसके जादुई असर से जुड़ी एक कहानी तानसेन और बैजू बावरा की भी है. जब राग से चिराग जल उठे. बारिश हो गई. पत्थर मोम की तरह पिघल गया.
मगर ये सब तो कहानियां हैं. आज सुनाते हैं एक सचमुच का क़िस्सा. ये मामला है साउथ कोरिया का. उसका पड़ोसी है, नॉर्थ कोरिया. दोनों के बीच लंबा युद्ध चला. जुलाई 1953 में ये जंग ख़त्म हुई, मगर ये युद्ध का आधिकारिक अंत नहीं था. इसकी वजह थी, कोरियन प्रायद्वीप का बंटवारा. साउथ कोरिया को ये बंटवारा मंज़ूर नहीं था. इसीलिए उसने युद्धविराम समझौते पर दस्तख़त नहीं किया. ऐसे में लड़ाई ज़मीन पर भले रुक गई हो, मगर तकनीकी तौर पर कभी ख़त्म नहीं हुई.
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उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया. (गूगल मैप्स)

बाद के सालों में भी साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया के बीच टेंशन बनी रही. नॉर्थ कभी मिसाइल परीक्षण करता, कभी युद्ध की धमकी देता. ऐसे में दक्षिण कोरिया की सैन्य असुरक्षा बनी रही. अब दिक्कत ये है कि साउथ कोरिया छोटा सा देश है. करीब पांच करोड़ की आबादी है उसकी. ऐसे में ये तय किया गया कि देश के लोगों को युद्ध की बुनियादी ट्रेनिंग मिलनी चाहिए. ताकि ज़रूरत के समय उनकी सेवा ली जा सके. यही सोचकर 1957 में साउथ कोरिया ने शुरू किया- कन्स्क्रिप्शन. इसका मतलब होता है, अपनी आबादी को अनिवार्य सैन्य सेवा के लिए बाध्य करना. उन्हें देश की आर्मी या आर्म्ड फोर्सेज़ में सर्विस देने के लिए क़ानूनी तौर पर विवश करना. साउथ कोरिया का ये क़ानून कहलाता है- मिलिट्री सर्विस ऐक्ट.
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उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण करता रहता है. (एपी)

क्या है ये लॉ?
इसके तहत, शारीरिक तौर पर स्वस्थ पुरुषों को कुछ वक़्त के लिए सेना जॉइन करनी पड़ती है. ये सर्विस कितने दिन की होगी, ये तय होता है आपकी चॉइस से.
अगर आप आर्मी जॉइन करते हैं, तो 21 महीने की सर्विस होगी. वहीं नेवी में ये अवधि है 23 महीने और वायुसेना में 24 महीने. महिलाएं चाहें, तो वो भी ये मिलिट्री सर्विस जॉइन कर सकती हैं. हालांकि उनके लिए ये मेनडेट्री नहीं है. इस अनिवार्य मिलिट्री सर्विस को जॉइन करने की उम्र है 18 से 28 साल. इन 10 सालों में आप कभी भी अपनी सर्विस पूरी कर सकते हैं.
ऐसा नहीं कि सारे साउथ कोरियन्स इस लॉ से संतुष्ट हों. कई लोग इसका विरोध भी करते थे. कई तो ये सर्विस देने से भी इनकार कर देते थे. ऐसे लोगों को पकड़कर जेल भेज दिया जाता था. कई लोग इस मेनेड्ररी सर्विस के बचने के और तरीके खोजते. मसलन, ख़ूब सारा वजन बढ़ा लेना. बॉडी पर टैटू गुदवा लेना. कई बार लोग जानबूझकर ख़ुद को नुकसान भी पहुंचाते. ताकि किसी तरह इस सर्विस से बच सकें. ऐसे लोगों पर भी क़ानूनी कार्रवाई का ख़तरा होता था.
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साउथ कोरिया में स्वस्थ पुरुषों को 21-24 महीनों के लिए सेना जॉइन करनी पड़ती है. (एएफपी)

फिर आया जुलाई 2018
वहां की कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया. कहा कि अगर कोई नागरिक धार्मिक या राजनैतिक कारणों से हथियार नहीं उठाना चाहता, तो सरकार उसे फोर्स नहीं कर सकती. सरकार उसके लिए कोई नॉन-मिलिट्री विकल्प खोजेगी. मसलन, सोशल सर्विस. या किसी सरकारी एजेंसी के साथ काम करने की चॉइस. इसे अनिवार्य मिलिट्री सर्विस के आलोचकों की बड़ी जीत माना गया.
आप पूछेंगे कि हम आज ये सब क्यों बता रहे हैं आपको?
इसलिए कि 1 दिसंबर को साउथ कोरियन संसद ने अपने मिलिट्री सर्विस ऐक्ट में एक संशोधन किया है. इसकी वजह से सर्विस जॉइन करने की अधिकतम उम्र सीमा 28 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है. आपको पता है, ये संशोधन असल में एक अडवांस बर्थडे गिफ़्ट था. ये दिया गया 'किम सिओक-जिन' नाम के एक शख्स को. 4 दिसंबर को किम का जन्मदिन है. इस रोज़ वो 28 साल के हो जाएंगे. किम ने अब तक मिलिट्री सर्विस पूरी नहीं की है. यानी अब अपने 28वें जन्मदिन के बाद उन्हें ये सर्विस पूरी करनी होती. ऐसा होता, तो किम फिलहाल जो काम कर रहे हैं, उसपर कम-से-कम 21 महीनों के लिए ब्रेक लग जाता. और बस यही वजह है कि साउथ कोरियन संसद ने ये ताज़ा संशोधन किया है.
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साउथ कोरियन संसद ने अपने मिलिट्री सर्विस ऐक्ट में संशोधन करते हुए सर्विस जॉइन करने की अधिकतम उम्र सीमा 28 से बढ़ाकर 30 कर दी है.

ऐसा क्या ख़ास काम करते हैं किम कि उनके लिए संसद बैठ गई?
इसका जवाब है, संगीत. वो साउथ कोरिया के एक पॉप सिंगर हैं. उनके बैंड का नाम है- BTS.पूरा नाम- बैंगटन सोनयेओनदन. कोरियन भाषा में इसका मतलब होता है, बुलेटप्रूफ़ बॉय स्काउट्स. ग्रुप का कहना है कि उनका ये नाम स्टीरियोटाइप्स से, आलोचनाओं से, गोलियों की तरह दनादन चुभने वाली उम्मीदों से परे जाकर जीने की ख़्वाहिश से जुड़ा है. मतलब, बियॉन्ड द सीन. नज़र की सीमा से परे.
सात साल पुराने इस बैंड में सात मेंबर्स हैं- RM, जिन, सुगा, जे-होप, जिमिन, वी और जॉन्गकुक. इस ग्रुप में जो जिन हैं, वो किम का ही स्टेज वाला नाम है. इस बैंड ने अपने गानों से दुनियाभर में हंगामा मचाया हुआ है. अमेरिका में गानों की एक रैंकिंग लिस्ट है- बिलबोर्ड हॉट 100. इसमें सबसे हिट गाने शामिल किए जाते हैं. BTS के तीन गाने इस बिलबोर्ड पर नंबर वन रहे इस साल. ऐसा करके इन्होंने बीटल्स का रेकॉर्ड तोड़ दिया है.
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किम सिओक-जिन (एएफपी)

साउथ कोरियन पॉप बैन्ड BTS के फैन्स भाषा और भूगोल की सरहदों से परे हैं
इनका एक सॉन्ग है- डायनाइट. ये अगस्त 2020 में रिलीज़ हुआ. 24 घंटे के भीतर 10 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने इसे यूट्यूब पर देखा. ये आज तक के किसी भी म्यूज़िक विडियो प्रीमियर का रेकॉर्ड है. ग्लोबल म्यूज़िक चार्ट में भी इस साल का सबसे टॉप सॉन्ग था ये. 2020 का सबसे ज़्यादा डाउनलोड किया गया गाना था ये. अभी नवंबर 2020 में इसी डायनामाइट सॉन्ग के लिए BTS को पहली बार ग्रैमी नॉमिनेशन भी मिला. ये नॉमिनेशन पाने वाला पहला साउथ कोरियन पॉप बैन्ड है BTS.
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डायनामाइट सॉन्ग के लिए BTS को पहली बार ग्रैमी नॉमिनेशन भी मिला. (स्क्रीनशॉट: यूट्यूब)

साउथ कोरिया, जापान, अमेरिका इन जगहों पर जनता पागल है BTS के लिए. 100 से भी ज़्यादा देशों में इनके प्रशंसक हैं, जो ख़ुद को कहते हैं BTS आर्मी. अनुमान के मुताबिक, इस फैन आर्मी में 5 करोड़ से ज़्यादा लोग हैं. सबसे दिलचस्प बात पता है क्या है? इनके गाने ज़्यादातर कोरियन भाषा में होते हैं. अब तक मात्र एक समूचा अंग्रेज़ी गाना आया है इनका. इसके बावजूद दुनियाभर में इनके इतने फैन बन गए हैं. मतलब, भाषा और भूगोल की सरहदों से परे है इनका फैनडम.
BTS अपने देश के सबसे कामयाब एक्सपोर्ट्स में से है. साउथ कोरिया वैसे तो काफी उन्नत इकॉनमीज़ में से है. मगर फिर भी वहां के लोगों की कल्चरल आइडेंटिटी हमेशा चीन के साये में रही. ज़्यादातर विदेशी उनको चाइनीज़ समझ लेते हैं. ऐसे में BTS के संगीत ने साउथ कोरिया की सेपरेट सांस्कृतिक पहचान के प्रति लोगों को जागरूक किया है. और वो भी काफी प्रगतिशील तरीके से.
BTS के सातों मेंबर्स को देखिए. वो लड़के और लड़कियों के बीच जो अलग-अलग दिखने वाला कॉन्सेप्ट है न, उस इमेज को तोड़ते हैं. कोई ड्रगबाज़ी नहीं, कोई नेगेटिव हरकत नहीं. प्रग्रेसिव मुद्दों पर बोलते हैं. वर्ल्ड इवेंट्स पर अपनी राय रखते हैं. इन्होंने अमेरिका के 'ब्लैक लाइव्स मैटर' वाले मूवमेंट को भी ख़ूब सपोर्ट किया. इस आंदोलन को एक मिलियन डॉलर का डोनेशन भी दिया.
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BTS बैंड सात लोगों की एक टीम है जिसके फॉलोअर्स दुनियाभर में हैं. (एपी)

BTS फैन्स की कहानियां
BTS के फैन्स और भी निराले हैं. उन्होंने भी आपस में मिलकर इतनी ही रकम जमा की और मूवमेंट को डोनेट किया. ये फैन्स ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर और भी कई कमाल कारनामे करते हैं. सोशल मीडिया पर अपनी तगड़ी मौजूदगी के दम पर ये सोशल जस्टिस से जुड़े मुद्दे ट्रेंड कराते हैं. कभी ब्लड डोनर्स को ज़रूरतमंदों से कनेक्ट करते हैं. कभी युद्ध प्रभावित इलाकों में हेल्प भेजते हैं. कभी किसी गरीब देश में लोगों के लिए पीने के साफ पानी का इंतज़ाम करते हैं.
पता है, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के समय ख़बर आई थी न. कि ट्रंप की एक चुनावी रैली में टिकट तो पूरे बिक गए, मगर पब्लिक नहीं आई. उसके पीछे भी BTS के ही फैन्स का हाथ था. तब ब्लैक लाइव्ज़ मूवमेंट चल ही रहा था, मगर ट्रंप इसको लेकर सीरियस नहीं थे.
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ट्रंप की एक चुनावी रैली के सभी टिकट बिक गए थे और लोग नहीं पहुंचे थे. इस मामले में पीछे BTS से जुड़े लोग थे.

ऐसे में BTS के फैन्स ने टिक-टॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विडियो बनाकर आपस में शेयर किया. लोगों से कहा कि चलो, ट्रंप की रैली को फेल करें. टिकट खरीदें, मगर रैली में न जाएं. सोचिए, कितनी समर्पित फैनडम है. इतनी समर्पित कि जो अमीर फैन हैं, वो पैसा जमा करते हैं. ताकि जो गरीब फैन हैं, वो BTS की म्यूज़िक सीडीज़ वगैरह खरीद सकें. पैसों की कमी के चलते इधर-उधर से गाने न सुनें, वरना क्या पता कि BTS की म्यूज़िक रैंकिंग और रेकॉर्ड थोड़ा नीचे आ जाए.
यही फैन फॉलोइंग, यही लोकप्रियता वो वजह है जिसके कारण साउथ कोरियन संसद ने अपने मिलिट्री सर्विस ऐक्ट में संशोधन किया. वहां पिछले कई महीनों से इसकी मांग चल रही थी. सरकार पर प्रेशर था कि किम उर्फ़ जिन के 28 साल के होने से पहले कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे. लोग कह रहे थे, ये किम का प्राइम है. अभी अगर वो मिलिट्री सर्विस में गए, तो पूरे कोरियन म्यूज़िक को नुकसान होगा. सरकार को ये मांगें माननी पड़ीं.
सर्विस ऐक्ट में हुआ संशोधन क्या कहता है?
ये अप्लाई होता है कुछ चुनिंदा संगीतकारों पर. जिन्हें साउथ कोरिया का सांस्कृतिक प्रभाव दुनिया में फैलाने के लिए सरकार की तरफ से मैडल मिला हुआ है. ऐसे लोग सर्विस जॉइन करने के लिए थोड़ी और मोहलत ले सकते हैं. BTS के सभी सात मेंबर्स को 2018 में ये मैडल मिला था. इन सबों को इस संशोधन से फ़ायदा होगा. इसीलिए लोग इस संधोशन को कह रहे हैं- BTS लॉ.
मगर इस लॉ के पास हो जाने के बाद भी ये बहस अभी ख़त्म नहीं हुई है. इसकी वजह हैं, अपवाद. साउथ कोरिया में कुछ चुनिंदा लोगों को मिलिट्री सर्विस से छूट दी जाती है. मसलन, देश के टॉप ऐथलीट्स. जिन्होंने ओलिंपिक या फिर एशियन गेम्स में मेडल जीता हो. इसके अलावा बड़े अवॉर्ड्स जीतने वाले क्लासिकल और फोक संगीतकार भी छूट पा जाते हैं. मगर ये छूट पॉप सिंगर्स पर लागू नहीं है. जबकि साउथ कोरिया की पॉप इंडस्ट्री काफी बड़ी है.
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साउथ कोरियन पॉप सिंगर यू सियुंग-जिन (एएफपी)

इसके प्रशंसक कहते हैं कि अगर देश के लिए नाम कमाना छूट देने का आधार है, तो पॉप इंडस्ट्री को क्यों अलग रखा जाए. जब BTS जैसे पॉप गायक दुनिया में प्रसिद्धि कमा रहे हैं, तो उनको भी छूट क्यों नहीं मिलती. पहले भी कई बड़े पॉप गायकों को अपना करियर पीक पर छोड़कर सर्विस के लिए जाना पड़ा है. कई लोग इससे बचने के लिए देश ही छोड़ देते हैं. जैसे, यू सियुंग-जिन. ये एक साउथ कोरियन पॉप सिंगर थे. 90 के दशक में काफी पॉपुलर थे. सर्विस से बचने के लिए उन्होंने अमेरिकी नागरिकता ले ली थी. साउथ कोरिया ने आज तक उन्हें बैन किया हुआ है. हालांकि BTS के मेंबर्स कहते हैं कि समय आने पर वो अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंगे. सर्विस कंप्लीट करेंगे. मगर क्या पता जब वो घड़ी आए, तो पब्लिक प्रेशर में गर्वनमेंट को उन्हें भी छूट देनी पड़े.

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