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आंध्र के सीएम जगन मोहन रेड्डी की बहन शर्मिला रेड्डी अलग पार्टी क्यों बनाने वाली हैं?

सत्ता की लड़ाई, भाई बहन को आमने सामने लाई?

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10 फ़रवरी 2021 (अपडेटेड: 10 फ़रवरी 2021, 12:09 PM IST)
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शर्मिला रेड्डी की पार्टी का नाम अभी तक सामने नहीं आया है. फोटो- Indiatoday
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महाभारत में धृतराष्ट्र और पांडु दोनों भाई थे. धृतराष्ट्र बड़े थे यानी सिंहासन के असली हकदार. लेकिन सिंहासन मिला पांडु को, क्योंकि धृतराष्ट्र नेत्रहीन थे. धृतराष्ट्र के बड़े बेटे दुर्योधन को हमेशा लगता था कि वो इस लिहाज से सिंहासन के असली उत्तराधिकारी है, लेकिन सिंहासन छोटे भाई के बेटे धर्मराज युधिष्ठिर को मिलना था. फिर ऐसा युद्ध हुआ कि जैसा इतिहास में कभी नहीं हुआ. आप सोच रहे होंगे ये कहानी क्यों? ये कहानी सिर्फ इस बात को बताने के लिए है कि सत्ता और सिंहासन की लड़ाई भाई को भाई से भिड़ा देती है. जहां मामला सत्ता का हो वहां रिश्तों में कड़वाहट अपने आप आने लगती हैं. चलिए अब एक खबर बताते हैं. आंध्र प्रदेश के सीएम हैं जगन मोहन रेड्डी. कह सकते हैं कि उन्हें आंध्र की गद्दी विरासत में मिली है. उनकी बहन हैं वाईएस शर्मिला रेड्डी, वो भी नेता हैं. उनकी सभाओं में भी भारी भीड़ उमड़ती है. आय से अधिक संपत्ति के मामले में जब जगन जेल में थे, तब शर्मिला ने पार्टी की कमान संभाली थी. उन्होंने 2019 के चुनावों में जमकर प्रचार किया था और पार्टी को जीत दिलाई थी. आंध्र प्रदेश में शर्मिला रेड्डी जाना पहचाना नाम हैं, लेकिन वो सरकार में शामिल नहीं हैं. अब ऐसी खबरें हैं कि वो अपनी अलग पार्टी बनाने वाली हैं. तेलांगाना में आएगा राजन्ना राज्यम? थोड़ा और विस्तार में बताते हैं. शर्मिला रेड्डी चाहती थीं कि जगन मोहन रेड्डी अपनी पार्टी YSR कांग्रेस का विस्तार तेलंगाना में भी करें, लेकिन जगन को ये आइडिया पसंद नहीं आया. अब शर्मिला ने अकेले ही तेलंगाना के रण में उतरने का मन बना लिया है. शर्मिला का कहना है कि वो तेलंगाना में 'राजन्ना राज्यम' यानी वाईएस राजशेखर रेड्डी का शासन लाना चाहती हैं. वाईएस राजशेखर रेड्डी, जगन और शर्मिला के पिता थे. दो सितंबर 2009 को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी. पिता की मौत के बाद जगन मोहन रेड्डी ने एक यात्रा शुरू की. कांग्रेस का साथ छोड़ दिया और 2011 में बनाई YSR कांग्रेस. जगन की मां विजयम्मा भी विधायक थीं, जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जगन मोहन रेड्डी और विजयम्मा ने आंध्र प्रदेश के विभाजन के खिलाफ भूख हड़ताल की थी. 2014 के विधानसभा चुनावों में YSR कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जगन विपक्ष का सबसे प्रमुख चेहरा बन गए थे. 2017 में उन्होंने 'प्रजा संकल्प यात्रा' शुरू की. 2019 में ये यात्रा खत्म हुई. 2019 के चुनावों में जगन मोहन रेड्डी जीते और सीएम बने. भाई-बहन के बीच सब कुछ ठीक नहीं? जगन का पूरा संघर्ष, उनकी यात्राएं, मैनेजमेंट, बड़े फैसले, इन सब में उनकी मदद की उनकी मां विजयम्मा और बहन शर्मिला ने. शर्मिला जनता के बीच गईं, यात्राएं कीं, रैलियां कीं और घर-घर, गली-गली में वोट भी मांगे. यानी कहा जा सकता है कि उन्होंने YSR कांग्रेस को बनाने, खड़ा करने और सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने के लिए जान लगा दी. लेकिन अब अगर वो नई पार्टी बनाने के लिए सोच रही हैं तो सवाल जरूर होगा कि, क्या भाई-बहन के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? क्या सीएम बनने के बाद जगन मोहन रेड्डी ने अपनी बहन की सलाह लेनी छोड़ दिया हैं? शर्मिला ने अपने बयान में 'राजन्ना राज्यम' की बात कही है, 2023 के चुनावों में उतरने की मंशा जताई है. उन्होंने अपने पिता के पुराने सहयोगियों के साथ बैठक की और फिर तेलंगाना के चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया. इसी दौरान आंध्र में YSR कांग्रेस के एक नेता सज्जल रामकृष्ण ने कहा कि जगन और शर्मिला के बीच विचारों का अंतर है, लेकिन दोनों में कोई मतभेद नहीं हैं. सज्जल ने कहा कि शर्मिला को लगता है कि तेलंगाना में YSR के बहुत समर्थक हैं और वहां विस्तार करना चाहिए, लेकिन जगन का मानना है कि ऐसा करने से पार्टी को नुकसान होगा. सज्जल रामकृष्ण ने कहा कि शर्मिला ने अपना रास्ता चुन लिया है. वहीं शर्मिला ने कहा कि,
"आंध्र में जगन मोहन रेड्डी ने अच्छा काम किया है. मैं अपना काम अब तेलंगाना में करना चाहती हूं. इस मामले में मैंने जगन से बात नहीं की है. पार्टी बनाना एक साहसिक फैसला है. जगन और मेरे बीच रिश्ते जारी हैं, लेकिन मेरा अपना अलग राजनीतिक रास्ता है. मैं लोगों के बीच जाऊंगी और तेलंगाना में नई पार्टी खड़ी करूंगी."
17 दिसंबर 1973 को शर्मिला का जन्म हुआ था. वे फिलहाल 47 साल की हैं. दो बच्चे हैं. एक बेटा और एक बेटी. शर्मिला ने राजनीति के दांवपेंच बचपन से देखे हैं. मां और पिता की राजनीति को करीब से देखा है. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बड़ा नेटवर्क है. उनके पास एक पार्टी को सफलतापूर्वक खड़ा करने का अनुभव भी है. अब देखना होगा कि तेलंगाना की राजनीति में शर्मिला क्या उलटफेर कर पाएंगी. और एक सवाल भी है, वो ये कि बहन और भाई के बीच सत्ता और सिंहासन ने दूरियां पैदा कर दी हैं?

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