बेंगलुरु में जो हुआ, उसे हम मास मोलेस्टेशन कह रहे हैं. वजह, हजारों की भीड़ मेंसैकड़ों लड़कियों को हैरेस किया गया. किसी की कमर, किसी के ब्रेस्ट, किसी का मुंहपकड़ा गया. कपड़ों में हाथ डाला गया. जबरन उन्हें बांहों में जकड़ा गया. देखने वालोंने बताया, लड़कियां चीखीं, चिल्लाईं, रोयीं. जिन्होंने जवाबी वार किए, उन्हें दबादिया गया.https://www.youtube.com/watch?v=vTrYYnxzM-Qघटना के बाद जब लड़कियों ने फेसबुक पर इस तरह के मोलेस्टेशन के बारे में लिखा, जवाबमें एक ट्रेंड चल पड़ा. #NotAllMen.मर्दों ने इन हैशटैग के साथ लिखा कि किस तरह जब भी कोई रेप या मोलेस्टेशन का केससामने आता है, मर्दों की पूरी कौम को गरियाया जाता है. सारे मर्द तो मोलेस्टर नहींहोते. सारे मर्द तो रेपिस्ट नहीं होते. जितने मर्द हमारे आस-पास हैं वो तो औरतों कीबहुत इज्जत करते हैं. मांओं पर शायरी शेयर करते हैं. बहनों की रक्षा करते हैं.उन्हें नियमित रूप से छोड़ने-लेने जाते हैं, चाहे कॉलेज हो या दफ्तर. मर्द तो बाहरका भी काम करते हैं, कमा कर भी लाते हैं. और अपने आस-पास की औरतों का इतना ख़यालरखने के बाद भी कोई मर्दों को गरियाए, ये बिलकुल ठीक नहीं है.है न?सारे मर्द रेपिस्ट नहीं होते. रेप तो सारी औरतों का भी नहीं होता. लेकिन एक रेप कीखबर से सारी औरतें हिल जाती हैं. डर जाती हैं. सारे मर्द रेपिस्ट नहीं होते लेकिनएक मर्द का रेपिस्ट होना औरतों को सारे मर्दों से डरा देता है.#NotAllMen कोई गलत सोच नहीं है. बिलकुल नहीं. लेकिन इस हैशटैग को शुरू करने केपहले क्या आपने सोचा कि इस हैशटैग की टाइमिंग कितनी सही है?चलिए शुरू से शुरू करते हैं. हम साल 2017 में जी रहे हैं. हम 2000 सालों से एक ऐसीव्यवस्था में रह रहे हैं, जहां औरतों को पुरुषों के भोग की वस्तु समझा जा रहा है.दुनिया भर के सारे फैसले मर्दों के पॉइंट ऑफ़ व्यू से हो रहे हैं. फिर यूं हुआ किपिछले कुछ 100 सालों में औरतें इस बनी-बनाई व्यवस्था पर सवाल उठाने लगीं. लोगों कोखूब अखरा. पर औरतें चुप नहीं हुईं. रेप तब भी होते थे, रेप अब भी होते हैं. लेकिनतब औरतों को समझ नहीं थी. न ही संचार के साधन थे. औरतों के पास आज समझ भी है, संचारके साधन भी हैं. इसलिए उन्होंने बोलना शुरू किया है. अगर 2 हजार सालों के बाद औरतोंने अंततः बोलना शुरू किया है, तो क्या ये सही समय है उनको पीछे खींचने का?बात करते हैं हैरेसमेंट की. जब हम कहते हैं कि सारे मर्द बुरे नहीं होते, हम येनहीं कह रहे होते कि औरतों का बोलना, बात करना गलत है. या हैरेसमेंट कोई सही कामहै. ये दो अलग-अलग विचार हैं और दो अलग-अलग समय, या एक साथ ही, स्वच्छन्द तरीके सेरह सकते हैं. लेकिन जब हम एक विशेष घटना की बात कर रहे हैं, जिसमें सैकड़ों औरतों कोएक साथ मोलेस्ट किया जा रहा, कम से कम आप उसी घटना के सन्दर्भ में #NotAllMen नकहें. क्योंकि अगर आप सचमुच उन मर्दों में से नहीं हैं जो औरतों को मोलेस्ट करतेहैं, तो इस समय मोलेस्ट की हुई औरतों को एक इंसान और एक विचार के तौर पर आपकेसपोर्ट की जरूरत है. न ही प्रगतिशील मर्दों के बीच के एक अलग कुनबा बनाकर मर्दों कीआवाज बुलंद करने की.मुझे ही नहीं, यहां सबको मालूम है कि हर मर्द रेपिस्ट नहीं होता. उसी तरह हर मर्दइंजीनियर भी नहीं बनना चाहता. उसी तरह हर मर्द नौकरी भी नहीं करना चाहता. उसी तरहहर मर्द इतना 'मर्दाना' भी नहीं होता कि कभी न रोए. तो नॉट ऑल मेन कहने वाले मर्दोंसे मेरा सवाल है: 1. जब लोग कहते हैं कि मर्द हो इसलिए नौकरी करनी ही पड़ेगी, तबक्यों नहीं कहते #NotAllMen?2. जब लोग कहते हैं, लड़का होकर लाल और गुलाबी रंग पहनते हो, तब क्यों नहीं कहते#NotAllMen?3. जब घर वाले कहते हैं, लड़की से शादी में इतना दहेज़ लो, तब क्यों नहीं कहते#NotAllMen?4. जब लोग पूछते हैं, पत्नी को नौकरी क्यों करने देते हो, तब क्यों नहीं कहते#NotAllMen?5. जब लोग कहते हैं, फैशन डिजाइनिंग, डांस और म्यूजिक लड़कों का काम नहीं है, तबक्यों नहीं कहते #NotAllMen?6. जब दोस्त कहते हैं, गर्लफ्रेंड को कंट्रोल में रखो, तब क्यों नहीं कहते#NotAllMen?7. जब आपके पुरुष दोस्त किसी गे लड़के को देखकर हंसते हैं, मजाक उड़ाते हैं, तब क्योंनहीं कहते #NotAllMen?8. जब दोस्त समझाता है कि पहली डेट में या सुहागरात के दिन लड़की को दबोच कर जबरनसेक्स कर लेना, तब क्यों नहीं कहते #NotAllMen?9. जब कहा जाता है कि कॉन्डम इस्तेमाल करने में मजा नहीं आता, तब क्यों नहीं कहते#NotAllMen?10. जब रिश्तेदार कहते हैं, बेटी को बाहर पढ़ने मत भेजो, 25 के पहले उसको ब्याह दो,तब क्यों नहीं कहते #NotAllMen? #NotAllMen कहना आसान है. #NotAllMen की सोच रखनाआसान है. और सही भी. लेकिन मोलेस्टेशन के खिलाफ उठ रही आवाजों के विरोध में नहीं.क्योंकि ये आपकी प्रगतिशीलता नहीं, आपके बचकानेपन को दिखाता है. ये दिखता है कि आपजिम्मेदारियों से भाग रहे हैं. ये दिखाता है कि आप उन मर्दों को कुछ नहीं कहेंगे,जो प्रो-मोलेस्टेशन या प्रो-रेप सोच रखते हैं. ये दिखाता है कि जब भी औरतें किसीतरह के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाएंगी, आप कहेंगे, 'वो मैं नहीं, कोई और मर्द था'और पतली गली से निकल लेंगे.आप एक मर्द हैं. आप उस कौम का हिस्सा हैं जिसके लिए जीवन जीना एक औरत के जीवन जीनेसे आसान है. इसका अच्छा या बुरा मर्द होने से कोई संबंध नहीं है. औरतों से ज्यादाछूट आपको विरासत में मिली है. ये आपकी गलती नहीं. ये भी सच है कि आपको पुरुष होनेकी वजह से कई तरह के प्रेशर झेलने पड़ते हैं. फिर भी आपको रात को घर से निकलते वक़्तरेप होने का डर नहीं लगता. विरासत में मिली इस लग्ज़री को समझिए. और अगर आप सचमुचप्रगतिशील हैं तो सही जगह, सही मुद्दों पर, सही हैशटैग इस्तेमाल करिए. सोशल मीडियापर ही नहीं, असल जीवन में भी.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िए:शर्मनाक: बेंगलुरु में CCTV में कैद सेक्शुअल असॉल्ट की घटना‘शायद तुम्हें याद न हो, मैं वो काली ड्रेस वाली लड़की हूं, जिसे तुमने छेड़ा था’नये साल की पार्टी में डेढ़ हजार पुलिसवालों के सामने खुले में मॉलेस्टेशन