‘रोशोमोन’ फ़िल्म का एक डायलॉग है – मुझे झूठ से कोई दिक्कत नहीं यदि वो रोचक है.यीशु ने पानी को ‘वाइन’ कर दिया, फ़िदेल के ऊपर बैठा कबूतर शांति का पर्याय था,ब्रूस ली ने अपने हाथ के वार से बीस मंज़िला इमारत गिरा दी थी, अत्ताउल्ला खां नेअपनी प्रेमिका को गोली मारकर खुद आत्महत्या कर ली, लियोनार्डो एलियन था, आइंस्टिनने अपने दिमाग का 100% यूज़ किया था... ...इन बातों को बचपन में सुनकर आंखें फटी रहजाती थीं, कोई बड़ा बताता भी अगर कि ये सब झूठ है तो मानने का मन नहीं करता. मन यूंकहता – प्लीज़ मुझसे ये रोचक किस्से मत छीनो. और इन सब किस्सों में जो किस्सा, या जोनाम सबसे ज़्यादा रोमांचकारी था वो था - नास्त्रेदमस. उसके नाम का रोमांच बचपन मेंशुरू हुआ था और काफी बड़े होने तक भी उस पर और उसकी भविष्यवाणियों पर विश्वास बनाहुआ था. दरअसल ‘नास्त्रेदमस’ को लेकर हमारा रोमांच इसलिए ही है क्योंकि यह नामहमारी मनोवैज्ञानिक रूप से कुछ सबसे बड़ी इच्छाओं में से एक को पोक करता है – भविष्यजानने की इच्छा को. लेकिन ‘नास्त्रेदमस’ की हर भविष्यवाणी क्यों सत्य हो जाया करतीहै आइये इसकी पड़ताल करते हैं. और हां, सबसे महत्वपूर्ण बात – ये पड़ताल करने केदौरान यदि आपने निम्न सारी बातें नोट कर लीं और अमल में लाना शुरू कर दिया तो आप भीएक दिन एक अच्छे भविष्यवक्ता हो जाएंगे: #एक स्पष्ट और एक व्यंजनात्मक चीज़ के बीचसमानता ढूंढना बहुत, बहुत आसान है. यदि मैं आपसे कहूं कि अमुक की मृत्यु करंट लगनेसे होगी तो मैं ग़लत भी हो सकता हूं सही भी. लेकिन यदि मैं ये कहूं कि अमुक कीमृत्यु किसी ‘अप्राकृतिक’ कारण से होगी तो मैं सही ही होऊंगा. क्यूंकि कोई भीमृत्यु प्राकृतिक नहीं होती. # जब किसी मरीज़ का कोई साइकैट्रिस्ट इलाज करता है तोउसे अजीब-अजीब सी आकृतियां दिखाता है और पूछता है कि उसे (मरीज़ को) क्या दिख रहाहै? एक ही आकृति में हर मरीज़ को अलग-अलग कुछ दिखता है जिससे उसके मन के भीतर क्याचल रहा है इसका अनुमान लगाया जाता है. तो यही बात नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों मेंभी है. सही मायनों में तो उसने कोई भविष्यवाणी की ही नहीं है. उसने तो कविताएं लिखीहैं. अब यदि आप उसकी कविताओं में ‘राक्षस’ को ‘पाकिस्तान’ और ‘आग के गोलों’ को‘हवाई जहाज़’ और 'धरती हिलने' को 'तृतीय विश्व युद्ध' कहें तो भविष्यवक्ता तो आप हुएऔर ‘भाषाविद’ भी.गौर करने वाली बात तो ये है कि आज तक कभी ये नहीं हुआ कि हमें पहले ही पता चल गयाहो क्या होने वाला है. बल्कि, घटना के हो चुकने के बाद, उस घटना की नास्त्रेदमस कीकही बात के साथ समानता निकाली जाती है और कहा जाता है – ये नास्त्रेदमस ने पहले हीकह दिया था. और ये उतना ही आसान है जितना बादलों में 'डायनासोर' की आकृति दिखना.# हर किसी को अपनी तारीफ़ सुनना पसंद है.अब यदि नास्त्रेदमस ये कहे कि इक्कीसवीं सदीमें भारत का राज होगा तो यहां पर इस बात का महत्व कम हो जाता है कि क्या होने वालाहै, महत्वपूर्ण बात ये हो जाती है कि आप क्या चाहते हैं.एक वेब-सीरिज़ आई थी हाल में - ‘पिचर्स’. उसका नायक टॉस करके सारे फैसले करता है, औरसभी फैसले सही होते हैं उसके. क्यों? क्योंकि टॉस कर चुकने के बाद हेड आए या टेलइसके बजाय वो ये देखता था कि टॉस करते वक्त उसने हेड की इच्छा की थी कि टेल्स की?ठीक इसी तरह जब नास्त्रेदमस की एबस्ट्रेक्ट भविष्यवाणियों का अनुवाद किसी देश याक्षेत्र की भाषा में होता था/है तो उसमें उस जगह/देश/क्षेत्र का विशेष ध्यान रखाजाता था. जैसे हिंदुओं के व्हाट्सएप ग्रुप में यदि नास्त्रेदमस ये कहते हुए पाएजाते हैं कि – मंदिर ‘वहीं’ बनेगा, तो नॉर्थ कोरिया के व्हाट्सएप ग्रुप में (यदिवहां व्हाट्सएप यूज़ करने की अनुमति है तो) नास्त्रेदमस यह कहते हुए पाए जाएंगे कि –तृतीय विश्व युद्ध में नॉर्थ कोरिया अमेरिका को बुरी तरह हरा देगा. भा.ज.पा. केएग्ज़िट पोल में भा.ज.पा. जीतेगी और कांग्रेस के एग्ज़िट पोल में कांग्रेस. और येसब बातें सही ग़लत तो बाद में होंगी मगर अच्छी बड़ी लगती हैं संबंधित लोगों को.अस्तु... #झूठ के पंख नहीं होते. वो बिना पंखों के वायरल हो जाता है. मतलब ये कि कईभविष्यवाणियां तो नास्त्रेदमस ने की भी नहीं हैं और उसके नाम से जोड़ दी गईं हैं.जैसे कि सबसे प्रसिद्ध वाली: एक नए शहर में 9वें महीनों के 11वें दिन, दो धातु केपक्षी दो ऊंची मूर्तियों से टकराएंगे और दुनिया जल्द ही खत्म हो जाएगी. इन सब बातोंको जानकर यदि आप ये कहेंगे कि - ‘नास्त्रेदमस’ की कोई भी भविष्यवाणी कभी सत्य नहींहुई, तो ये अधूरी बात होगी. बेशक आप ये कहकर उनसे ज़्यादा बुद्धिजीवी गिने जाएंगे जोनास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों को सही ठहराते हैं लेकिन फिर भी एक प्रश्न अनुत्तरितरह जाएगा कि – यदि उसकी भविष्यवाणियां कभी सही नहीं हुईं तो वो इतना बड़ा ‘कल्टफिगर’ कैसे बन गया? कैसे फ़्रांस के छोटे से गांव में जन्मे इस बंदे को उत्तराखंड केछोटे से गांव में जन्मा पांच-छः वर्ष का बच्चा तक जानता है? उसका कारण है किनास्त्रेदमस अपने समय में भविष्यवक्ता न भी रहा हो तो भी एक प्रसिद्ध व्यक्ति तो थाही. प्लेग का इलाज करता था. फिर पंचांग वगैरह बनाने लगा. प्रबुद्ध वर्ग मेंसम्मानित, कुछ लोग कहते थे कि इस पर भूतों का साया है. और ऐसी किंवदंतियां तोगुणोत्तर रूप से बढ़ती हैं. और यूं, सैकड़ों साल में कोई ऐसा नाम कल्ट हो जाता है. तोमित्रो अब तो हम जान ही गए हैं कि 2019 के इलेक्शन में कौन जीतेगा. या फिर यूं कहेंकि हम जान ही गए हैं कि नास्त्रेदमस ने किसको जिताया है. उसको जिताया है जोजीतेगा. वैसे अब भी अगर कन्फ्यूज़न है तो पेश ए नज़र है ये एक और बड़ा खुलासा-नरेंद्रस मोदुस को पीएम बनाने वाला नास्त्रेदमस सबसे बड़ा फ्रॉड था--------------------------------------------------------------------------------Video देखें: राजकोट के गौंडल को आज़ादी के पहले के दिन क्यों याद आ रहे हैं