Gen Z की भाषा बोलने को क्यों मजबूर हुए अंकल जी?
सरल या जटिल से परे, याद करिए आखिरी बार आपने किस भाषण में कोई नया शब्द सुना था. हर संपादकीय, हर संबोधन, हर भाषण की गुझिया में एक जैसा खोया है. अगर किसी में किसी दिन कोई किशमिश निकल आई तो वो आपकी किस्मत. ऐसे भाषा विपन्न समाज को 'वास्तेगुने हुईया' जैसे निर्थक शब्दों को अपनाने में कोई देर नहीं लगी.
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आजकल के अंकल GenZ की भाषा सीख रहे हैं लेकिन क्यों? (Photo: AI Generated)
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