जब बात प्रेगनेंसी रोकने की दवाइयों की होती है, हम औरतों की बात करते हैं.माला-डी, अनवॉन्टेड-21 जैसी तमाम दवाइयां मार्केट में हाथोहाथ बिकती हैं. औरतें रोजएक गोली लें और अनचाही प्रेगनेंसी से बची रहें.गोलियां मार्केट में पॉपुलर हैं. जिसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि मर्दों को कॉन्डमनहीं लगाना पड़ता. उनको भरपूर 'मजा' मिलता है. और वो गर्भ रोकने के लिए बिना कोई भीकदम उठाए सेक्स के पर्याप्त मजे ले लेते हैं. प्रेगनेंसी रोकना पूरी तरह औरत कीजिम्मेदारी हो जाती है.द इंडिपेंडेंट के मुताबिक़ बीते दिनों मेडिकल साइंस ने एक अच्छी खबर दी. कि एक ऐसाइंजेक्शन आया है, जो पुरुष ले सकेंगे. और औरतें गर्भ से बच सकेंगी. यानी प्रेगनेंसीरोकने की जिम्मेदारी अब पुरुष भी ले सकेंगे. लेकिन इस दवा की खोज होते ही इसे बंदकर दिया गया. वजह? 6 फीसदी पुरुषों ने दवा के साइड इफ़ेक्ट महसूस किए. जिसमेंडिप्रेशन, चिड़चिड़ापन शामिल था. और दवा के बंद होते ही गर्भ रोकने के जिम्मेदारी फिरसे औरतों पर आ गई.आइए औरतों के गर्भ निरोधक तरीकों की बात करेंबात गोली की. गोली को लगातार खाने से न सिर्फ सामने दिखाई पड़ने वाले साइड इफ़ेक्टहोते हैं: जैसे मुंहासे, पीरियड की साइकल बिगड़ जाना, बेवक्त ब्लीडिंग होना. बल्किकुछ गहरे नुकसान होते हैं जो समय लेकर आते और जाते हैं. जैसे मूड स्विंग्स,डिप्रेशन, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर.बात वेजाइनल रिंग की. एक ऐसा छल्ला जिसे औरत की वेजाइना के रास्ते ऊपर ठेल दियाजाता है. जिससे धीरे-धीरे ऐसे हॉर्मोन निकलते हैं जो प्रेगनेंसी को रोकने में मददकरते हैं. इसके साइड इफ़ेक्ट वही हैं. डिप्रेशन, मूड स्विंग.दुनिया भर में आधे से ज्यादा औरतें इस तरह के कॉन्ट्रॉसेप्शन का इस्तेमाल करती हैं.जिसका मतलब समझते हैं? दुनिया की आधे से ज्यादा औरतों को डिप्रेशन का खतरा है.सिर्फ इसलिए कि पुरुषों को कॉन्डम का इस्तेमाल करने में 'मजा' नहीं आता. पुरुषों केजिस इंजेक्शन की हम बात कर रहे हैं, उसे 320 पुरुषों पर आजमाया गया. जिसमें 20,केवल 20 पुरुषों को इससे तकलीफ हुई. कहने का अर्थ ये नहीं कि उन 20 लोगों की सेहतजरूरी नहीं. लेकिन जिस तरह का भेदभाव हमारी दवाइयों और कल्चर में दिखता है, उस परध्यान देने की जरूरत है. जिन दवाइयों से 100 फीसदी औरतों को तकलीफ हुई है, उसेरोकने पर किसी ने बात नहीं की. लेकिन जिस दवा ने 6 फीसदी पुरुषों को परेशान किया,उसको मार्केट में उतरने से रोक लिया गया है. हमारे समाज में मां बनने से प्रेम,वात्सल्य और त्याग की भावना जुड़ी है. लेकिन पुरुष के बाप बनने के साथ पौरुष जुड़ाहुआ है. औरत का मां बनना उसका फ़र्ज़ होता है. पर पुरुष का बाप बनना जैसे उसके पौरुषमें चार चांद लगाता है. चूंकि औरत का मां बनना उसका फ़र्ज़ होता है, प्रेगनेंसी कोरोकना भी उसका ही फ़र्ज़ हो जाता है. जैसे पुरुष का काम 'फ़र्ज़' नहीं, 'हक़' होता है.बच्चे पैदा होते हैं तो बड़े होकर पिता का नाम अपनाते हैं. जिसके पिता का नाम न पताहो, उसको 'नाजायज़' कहते हैं. बच्चे पैदा करने के जिस पूरे कल्चर में बाप के नाम काइतना महत्व है, वही पुरुष का प्रेगनेंसी रोकने की जिम्मेदारी नहीं बांट सकता?--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:औरत दुकान जाकर कॉन्डम मांगे, तो उसे ऐसे घूरेंगे जैसे जान मांग ली होतुम लोगों के कॉन्डम न पहनने से जाने कितनी औरतें डिप्रेशन में हैं