कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) का बीते हफ्ते बीजिंग में छठा पूर्ण अधिवेशन हुआ.इसमें राष्ट्रपति शी जिंनपिंग को अगले वर्ष तीसरा कार्यकाल देने की मंजूरी मिली. इसदौरान चीन की सत्तारूढ़ CPC ने एक दुर्लभ स्वीकारोक्ति की. उसने कहा कि पीपुल्सलिबरेशन आर्मी (PLA) पर उसका नियंत्रण कुछ समय के लिए कमजोर पड़ा गया था और अगरहालात नहीं बदलते, तो न केवल सेना की युद्ध क्षमता कम होती, बल्कि सेना पर पार्टीके नियंत्रण का जो राजनीतिक सिद्धांत है, वह भी कमजोर पड़ जाता. PLA में आखिर हुआक्या था? साल 2013 की बात है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने PLA में भ्रष्टाचार केखिलाफ बड़ा अभियान छेड़ने का ऐलान किया. जांच में सेना के कई बड़े अधिकारियों के नामसामने आए. इनमें एक नाम ऐसा भी था, जिससे चीन की सियासत में खलबली मच गई. यह नाम थाझोउ योंगकांग का. चीनी सेना के पूर्व जनरल झोउ योंगकांग 2007-12 के दौरानराष्ट्रपति के बाद देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति थे. वह न केवल कम्युनिस्ट पार्टीऑफ चाइना (CPC) के पोलित ब्यूरो के नौ सदस्यों में शामिल थे, बल्कि देश के आंतरिकसुरक्षा मंत्री भी थे. चीन की अदालतें, अभियोजन एजेंसियां, पुलिस-अर्धसैनिक बल औरखुफिया एजेंसियां सभी उनकी देखरेख में काम करती थीं.शी जिनपिंग के जो जांच करवाई थी उसमें पता चला कि झोउ योंगकांग ने PLA और अर्धसैनिकबलों में भ्रष्ट अधिकारियों का नेटवर्क बना रखा था, जो किसी भी व्यक्ति का प्रमोशनबिना रिश्वत लिए नहीं होने देते थे. झोउ के पकडे जाने के बाद हजारों सैन्यअधिकारियों पर कार्रवाई की गई.Didn't have complete control over army: China's ruling party The high-profilePlenum of the Communist Party of China (CPC) held last week adopted the"landmark resolution" which also hailed the country's military #Today's Paper by #BusinessStandardhttps://t.co/CjDTyVT4FO— Market’s Cafe (@MarketsCafe) November 18, 2021PLA में बड़ा भ्रष्टाचार पकडे जाने के बाद साल 2015 में राष्ट्रपति जिनपिंग ने सेनामें बड़े बदलावों का ऐलान किया. उन्होंने जिनपिंग ने सेना से साफ शब्दों में कहा किPLA के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ही सर्वोच्च है और उसे पार्टी के नेतृत्व में ही कामकरना है. जिनपिंग ने सैन्य रिजर्व बलों को कम्युनिस्ट पार्टी और सेंट्रल मिलिट्रीकमीशन (CMC) के नियंत्रण में रखने का भी फैसला किया. समाचार एजेंसी शिन्हुआ कीरिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले चीनी रिजर्व बल सैन्य अंगों और कम्युनिस्ट पार्टी कीस्थानीय समितियों के अधीन काम करते थे.साल 2015 में शी जिनपिंग ने सेना में ये बदलाव इसलिए किए थे, जिससे PLA में दोबाराभ्रष्टाचार ना पनपे. इस दौरान कई बार चीनी राष्ट्रपति ने सेना के कार्यक्रमों मेंयह बात मानी कि अगर सेना में भ्रष्टाचार चलता रहता, तो PLA का कमजोर होना तय था.जानकारों की मानें तो अब यही स्वीकारोक्ति सीपीसी के पूर्ण अधिवेशन में कम्युनिस्टपार्टी ने की है. चीनी सेना का नाम PLA क्यों है? साल 1927 में चीन में राष्ट्रवादीपार्टी कुमिनतांग का शासन था. इसी साल 1 अगस्त को कुमिनतांग की सेना के नौ विद्रोहीकमांडरों ने अपनी-अपनी टुकड़ी के साथ कियेंग्सी प्रांत की राजधानी नानचांग पर हमलाकर दिया. और इसे अपने कब्जे में ले लिया. कुछ दिनों बाद उनके हाथ से ये जीत तो निकलगई, लेकिन इससे कम्युनिस्ट विद्रोहियों को झंडा उठाने की ताकत मिली. उस समयकम्युनिस्ट विद्रोहियों की सेना का नाम - चाइनीज वर्कर्स ऐंड पीजेन्ट्स रेड आर्मी -रखा गया था. यानी, चीन के कामगारों और किसानों की लाल सेना. लोग शॉर्ट में इसे रेडआर्मी भी बुलाते थे.चयांग काई शेक और माओ त्से-तुंग (फोटो: एएफपी)चीन में 1927 को शुरू हुआ गृहयुद्ध 22 साल तक चला और 1949 में तब खत्म हुआ, जबकम्युनिस्टों ने राष्ट्रवादी कुमिनतांग पार्टी के मुखिया चियांग काई शेक को चीन सेभागने पर मजबूर कर दिया. इस जीत के बाद 1 अक्टूबर, 1949 को माओ त्से-तुंग (माओ) नेकम्युनिस्ट चीन की नींव रखी. इसी समय चीन को नया नाम मिला- 'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़चाइना'. देश का नाम बदलने के साथ ही माओ ने रेड आर्मी को भी नया नाम दे दिया.उन्होंने रेड आर्मी का नाम- पीपल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA रखा. PLA पर किसका हुक्मचलता है? दुनिया के लगभग सभी देशों में सेनाओं के साथ उनके देश का नाम जुड़ा होता हैजैसे- इंडियन आर्मी, ब्रिटिश आर्मी, यूएस आर्मी. लेकिन, PLA यानी पीपुल्स लिबरेशनआर्मी के साथ ऐसा नहीं है. इसी तरह बाकी देशों की सेनाएं जहां राष्ट्र की होती हैं,वहीं PLA गृह युद्ध के दौर से ही कम्युनिस्ट पार्टी का सशस्त्र विंग बना हुआ है.उसकी निष्ठा, उसकी जवाबदेही चीन के प्रति नहीं, चीन की जनता के प्रति नहीं, बल्किकम्युनिस्ट पार्टी के प्रति है. इसका मुख्य कर्तव्य है कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ताको बनाए रखना. ये बात माओ के समय से आज तक नहीं बदली. माओ ने ही सेना पर पार्टी केकंट्रोल का राजनीतिक सिद्धांत दिया था. उनका कहना था 'पार्टी कमांड द गन' मतलब'पार्टी ही बंदूक यानी सेना को संभालेगी'.राष्ट्रपति शी जिनपिंग PLA की तैयारियों का जायजा लेते हुए (फ़ाइल फोटो : आजतक)PLA का असली मुखिया कौन है? PLA पांच शाखाओं में बंटी है. थल सेना, नौसेना औरवायुसेना के साथ-साथ रॉकेट फोर्स और स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स भी इसका हिस्सा हैं.इन सभी की अल्टीमेट कमान सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के पास होती है. कम्युनिस्टपार्टी के इतिहास में ज्यादातर मौकों पर कम्युनिस्ट पार्टी का मुखिया और देश काराष्ट्रपति ही इस कमीशन का भी सर्वेसर्वा रहा है. इन दिनों ये ताकत शी जिनपिंग केपास है. 2013 में राष्ट्रपति बनने के एक साल बाद ही वे CMC और कम्युनिस्ट पार्टी केप्रमुख बन गए थे. यानी भले ही कम्युनिस्ट पार्टी को PLA के अंडर में काम करने वालीसंस्था बताया जाता हो, लेकिन उसका असली कर्ता-धर्ता तो चीनी राष्ट्रपति ही है.