वन रैंक वन पेंशन पर एक पूर्व सैनिक ने आत्महत्या कर ली. सरकार कह रही है कि देखरहे हैं क्या हुआ. राजनेता भिड़ गए हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री को दिल्ली में हीगिरफ्तार कर लिया गया. फिर छोड़ दिया गया. राहुल गांधी को दो बार गिरफ्तार कियागया. क्योंकि ये लोग सैनिक के परिवार से मिलने हॉस्पिटल जा रहे थे. तो गिरफ्तारक्यों किया जा रहा है? फिर 40 साल से इंतजार कर रहे सैनिकों को मोदी सरकार ने 6सितंबर 2015 को वन रैंक वन पेंशन दे भी दिया था. प्रधानमंत्री ने सियाचीन में जाकरकहा था कि ये देना मेरे नसीब में लिखा था. फिर उड़ी हमले और सर्जिकल स्ट्राइक केबाद सैनिकों को लेकर देश में नया उबाल आया है. तो फिर सैनिक अब क्यों नाराज हैं?आखिर 83 दिन की भूख हड़ताल के बाद सरकार ने कहा तो कि वादा पूरा किया है. वन रैंकवन पेंशन का मतलब है कि एक रैंक पर रिटायर होनेवाले लोगों को एक बराबर पेंशनमिलेगी. होता क्या है कि पेंशन आखिरी तनख्वाह के आधार पर तय होती है. तो जो मेजर1980 में रिटायर हुआ होगा, उसकी तनख्वाह मान लेते हैं कि 200 रुपये थी. उसकी पेंशनहुई 100 रुपये. 2000 में रिटायर होने वाले मेजर की तनख्वाह मान लेते हैं कि 500रुपये थी. क्योंकि बीच में पे कमीशन भी आया था. तो उसकी पेंशन हुई 250 रुपये. अबपेंशन हर साल बढ़ती नहीं तो 2010 में पहले वाला मेजर बाद वाले से कम पेंशन पाएगा.अब सीन ऐसा है कि वाकई में 2000 में रिटायर हुआ सैनिक 2010 में रिटायर हुए सैनिक काआधा पेंशन पाता है. फिर सेना का स्ट्रक्चर ही ऐसा है कि सैनिक पूरी सर्विस नहीं करसकते. सेना में हमेशा जवान लोग चाहिए. तो 85 प्रतिशत सैनिक 35-40 में ही रिटायर होजाते हैं. फिर इनको बाहर नौकरी नहीं मिलती. क्योंकि उस तरह की कोई स्किल नहीं होती.और नौकरिय़ां हैं भी नहीं. तो सैनिकों की पेंशन और कम हो जाती है.तो सरकार ने क्या किया था और वन रैंक वन पेंशन पर क्या दिक्कतें हैं?1. मोदी सरकार ने इस स्कीम के तहत 5.5 हजार करोड़ रुपये निकाले थे. पर सैनिकों काकहना है कि ये पैसे वन रैंक वन पेंशन के लिये नहीं हैं. ये बस पेंशन को एक बारबढ़ाने के लिए है. क्योंकि अभी भी पेंशन और रैंक का रिश्ता वही है. जो कांग्रेस केसमय था. 2. सरकार और सेना की डेफिनेशन में अंतर है. सरकार इसे पेंशन में हर सालहोने वाला इंक्रीमेंट समझ रही है. जबकि ये मुद्दा अलग ही है. 3. सरकार ने ये भी कहाहै कि सर्विस पूरी ना करने वाले सैनिक इसके हकदार नहीं होंगे. 4. सरकार के मुताबिकये स्कीम लागू होगी 1 जुलाई 2014 से और पेंशन की दर तय होगी 2013 के आंकड़ों केआधार पर. सैनिक ये चाहते हैं कि लागू हो 1 अप्रैल 2014 से और 2015 के आंकड़ों केआधार पर. 5. सरकार ने कहा है कि पेंशन का रिव्यू हर 5 साल में किया जाएगा. परसैनिकों का कहना है कि ये रिव्यू हर साल होना चाहिए. क्योंकि इतने दिन में कई बारऐसा हो जाएगा कि सीनियर अपने जूनियर से कम पेंशन पाएगा. ये नियम के हिसाब से गलतहोगा.सरकार की दिक्कतें क्या हैं?40 लाख रिटायर्ड सैनिक हैं. 6 लाख शहीदों की विधवाएं हैं. फिर सैनिक अमूमन ज्यादादिन तक जीते हैं. तो पेंशन से सरकार पर बोझ भी बढ़ जाता है. हर साल पेंशन बढ़े तोखजाने पर जोर पड़ेगा. फिर सिविल के लोग भी मांग करने लगेंगे कि हमें भी यही सिस्टमचाहिए. अभी तक तो नहीं बोलते हैं, क्योंकि उनकी सर्विस 60 साल तक होती है. पेंशनउसके बाद मिलती है. फिर ये भी है कि इनकी पेंशन हर साल बढ़ जाती है. पर रैंक वालीमांग कर सकते हैं. इसके अलावा सरकार ने 2004 से पेंशन स्कीम बदल दी. अब NPS है.इसमें लोग खुद ही पेंशन में कंट्रीब्यूट करते हैं. पर वन रैंक वन पेंशन के चलतेसरकार को अपनी जेब से ही सारा पैसा देना पड़ेगा. जिसका रिटर्न कुछ आएगा नहींक्योंकि रिटायर्ड सैनिक कोई काम तो नहीं कर रहे.दुनिया में क्या सीन है?अमेरिका में सैनिक इंफ्लेशन के मुताबिक अपनी आखिरी तनख्वाह का 50 से 100 प्रतिशतपेंशन पाते हैं. चीन में 85, ऑस्ट्रेलिया में 76.5, फ्रांस में 75, जापान में 70,मलेशिया में 60 और पाकिस्तान में 70 तक है.--------------------------------------------------------------------------------राहुल गांधी, फौज के साथ सबसे बड़ा धोखा आपके मम्मी, पापा और दादी ने किया हैपूर्व सैनिक की खुदकुशी का एजेंडा पूछने वाले कॉपी-पेस्ट के चक्कर में बन गएरिश्तेदारOROP के लिए सुसाइड करने वाले फ़ौजी ने जहर खाने के पांच मिनट बाद किया था आखिरी कॉलज़िंदगी भर की कमाई, पुणे के इस बुजुर्ग ने सेना के नाम कर दी