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1264 असिस्टेंट लोको पायलट की डेढ़ साल बाद भी ज्वाइनिंग क्यों नहीं हो पा रही है?

रेलवे में नौकरी ज्वाइन करने का इंतजार कर रहे हैं चयनित उम्मीदवार.

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21 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 21 जनवरी 2021, 05:09 PM IST)
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1264 असिस्टेंट लोको पायलट अपनी ट्रेनिंग शुरू करने की मांग को लेकर सोशल मीडिया के साथ-साथ सड़क पर भी अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. उत्तर रेलवे के हेडक्वाटर बड़ोदा हाउस नई दिल्ली में प्रदर्शन करते चयनित उम्मीदवार.
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5 फरवरी, 2018. भारतीय रेल की तरफ से एक वैकेंसी निकाली गई. रेलवे के इस एम्पलॉयमेंट नोटिस का नंबर था CEN- 01/2018. 26,502 पदों की इस भर्ती में 17,673 असिस्टेंट लोको पायलट और 8,829 पद टेक्नीशियन के थे. सितंबर, 2018 में एक और नोटिफिकेशन निकाला गया और पदों की संख्या को बढ़ाकर 64,371 कर दिया गया. अब असिस्टेंट लोको पायलट पदों की संख्या 27,795 और टेक्नीशियन की संख्या 36,576 कर दी गई थी.
2018 में निकाली गई वैकेंसी का नोटिफिकेशन 2018 में निकाली गई वैकेंसी का नोटिफिकेशन

रेलवे में भर्ती के लिए रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड यानी RRB बनाए गए हैं. देशभर में कुल 21 RRB हैं. RRB अपने-अपने जोन में खाली पदों के हिसाब से वैकेंसी निकालते हैं, परीक्षा कराते हैं और सफल कैंडिडेट को जोनल हेडक्वॉर्टर के हवाले कर देते हैं. भारतीय रेलवे में कुल 17 जोन और 73 डिवीजन हैं. इसके बाद इन सफल कैंडिडेट को डिवीजन बांटा जाता है और फिर ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है.
लेकिन 1264 सफल कैंडिडेट अपनी ट्रेनिंग और ज्वाइनिंग की राह देख रहे हैं. वे सोशल मीडिया पर कैंपेन चला रहे हैं. रेलवे के ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि जल्द से जल्द उनकी भी ट्रेनिंग कराई जाए. क्या है पूरा मामला? CEN-01/2018 का रिजल्ट आने के बाद जुलाई-अगस्त 2019 में सभी सफल कैंडिडेट का मेडिकल परीक्षण कराया गया. 22 अगस्त 2019 को पहला पैनल आया. इसमें मुरादाबाद डिवीजन के 110 और लखनऊ के 118 छात्र शामिल किए गए. इन्हें सितंबर 2019 में परीक्षण के लिए भेज दिया गया.
20 दिसंबर 2019 को दूसरा पैनल आया. इसे 9 जनवरी 2020 को तीसरे और अंतिम पैनल में मिला दिया गया. इसमें मुरादाबाद और लखनऊ डिवीजन के कुल 900 छात्र शामिल थे.
ये काम किया RRB इलाहाबाद ने. इसके बाद 900 छात्रों का पैनल उत्तर रेलवे के हेडक्वाटर बड़ौदा हाउस नई दिल्ली के लिए भेज दिया गया. इन छात्रों को दो डिवीजन में बांट दिया गया.
Alps जल्द से जल्द ट्रेनिंग शुरू करने की मांग करते चयनित उम्मीदवार.

लेकिन इसी दौरान मार्च 2020 में कोरोना की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन लग गया. इसकी वजह से ट्रेनिंग सेंटर बंद कर दिए गए. अक्टूबर 2020 से ट्रेनिंग सेंटर फिर से खुले. लेकिन 1264 उम्मीदवार अपनी ट्रेनिंग की राह देख रहे हैं. इनका कहना है कि रेलवे के पूर्व चेयरमैन वीके यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि अगस्त 2021 तक सभी सहायक लोको पायलट की ट्रेनिंग पूरी करा ली जाएगी. लेकिन इन उम्मीदवारों का आरोप है कि उत्तर रेलवे के हेडक्वाटर बड़ौदा हाउस नई दिल्ली ने अपने ही तत्कालीन चेयरमैन की बात को नकार दिया. और कहा कि जून 2021 तक 1264 बच्चों के लिए कोई ट्रेनिंग शेड्यूल नहीं है. अपनी ट्रेनिंग का इंतजार कर रहे एक उम्मीदवार ने लल्लनटॉप को बताया,
उत्तर रेलवे के पांच मंडलों मुरादाबाद, लखनऊ, फिरोजपुर, दिल्ली और अंबाला की ज्वाइनिंग रुकी हुई है. 1264 छात्र ऐसे हैं जो इंतजार कर रहे हैं. इनमें से 900 लखनऊ और मुरादाबाद के हैं. इनकी ट्रेनिंग नहीं हो रही है. इसमें 80-85 और 90 नंबर पाने वाले छात्र भी हैं. मुरादाबाद और लखनऊ वालों के लिए मई 2020 में ही प्रक्रिया शुरू करा दी गई थी. ऑफिशियल वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए. माहौल ऐसा बना कि लग रहा था कि एक महीने में ज्वाइनिंग हो जाएगी. लेकिन साल निकल गया. ऐसा लग रहा है कि कोई एफर्ट नहीं कर रहे हैं. कभी कहते हैं जून में शेड्यूल आएगा, फिर कहते हैं कि जून में बताएंगे कि शेड्यूल कब आएगा. गोरखपुर मंडल वालों तक की ज्वाइनिंग हो गई जिनके बारे में कहा गया था कि भूल से वैकेंसी जारी हो गई है. मुंबई वालों की भी ज्वाइनिंग हो गई. लेकिन हमारी ज्वाइनिंग रुकी हुई है.
राजस्थान के सीकर के रहने वाले एक कैंडिडेट ने बताया,
हमें सलेक्ट हुए 1.5 साल हो गए हैं. उत्तर रेलवे कह रहा है कि जून में बताएंगे कि ट्रेनिंग कब से होगी. तब तक दो साल हो जाएंगे. सलेक्ट होने के बाद हमने प्राइवेट नौकरी छोड़ दी थी. इस उम्मीद में भी अब तो जल्द ही ट्रेनिंग होने वाली है, लेकिन अब हम घर बैठे हैं. कब ट्रेनिंग होगी नहीं पता. चार जनवरी 2021 को हमने उत्तर रेलवे के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन भी किया था. हम तो यही चाहते हैं कि जल्द से जल्द हमारी ट्रेनिंग स्टार्ट हो.
रेलवे का क्या कहना है? उत्तर रेलवे का कहना है कि 1264 सहायक लोको पायलट उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया जाना है. प्रशिक्षण केंद्रों की सीमित परिचालन क्षमता को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से जून 2021 से प्रशिक्षण निर्धारित किया जाएगा. सहायक लोको पायलट के पैनल की लाइफ (करंसी) को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है. पैनल में घोषित सभी उम्मीदवारों को समावेशित किया जाएगा. मंडलों द्वारा उम्मीदवारों को प्रशिक्षण शेड्यूल की सूचना दी जाएगी.
Northern Railway
वहीं रेलवे बोर्ड के नए चेयरमैन और CEO सुनीश शर्मा ने कहा है कि जिन चयनित सहायक लोको पायलट को ट्रेनिंग नहीं मिली है उन्हें जल्द ही इस बारे में बताया जाएगा. उन्होंने कहा था कि हम महामारी के कारण अपने प्रशिक्षण केंद्रों को सुचारू रूप से नहीं चला पाए. इसलिए कुछ लोगों को रोकना पड़ा. लेकिन अब सभी ट्रेनिंग सेंटर शुरू हो गए हैं.
इस बारे में जानकारी के लिए हमने उत्तर रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर नीरज शर्मा से बात की. उन्होंने कहा,
हमने ट्रेनिंग शेड्यूल कर दी है. कोविड के टाइम पर जो ट्रेनिंग सुविधा है उसे सैंग्शन किया जा रहा है. जिनका सलेक्शन हुआ है, हम फेज वाइज उनकी ट्रेनिंग करवाते जाएंगे.
यह पूछने पर कि चयनित उम्मीदवारों का आरोप है कि कुछ डिवीजन में खासकर लखनऊ और मुरादाबाद में ही ट्रेनिंग नहीं हो रही है. उत्तर रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर ने कहा,
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है. लेकिन हम फेज वाइज सबकी ट्रेनिंग करवा रहे हैं. जितने चयनित उम्मीदवार हैं सबकी ट्रेनिंग करवा रहे हैं. रेलवे की तरफ से जून 2021 की जो डेट दी गई है तब तक हम ट्रेनिंग शुरू करवा देंगे.
उम्मीद की जानी चाहिए कि रेलवे जो कह रहा है उसे जल्द से जल्द लागू करेगा. ताकि डेढ़ साल के अपनी ज्वाइनिंग की राह देख रहे लोगों का इंतजार खत्म हो.

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