ओमान के सुल्तान कौन थे, जिनकी मौत पर भारत में राजकीय शोक रखा गया
50 साल पहले पिता को हटाकर गद्दी हथियाई थी.
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पांच दशक तक ओमान के सुल्तान रहे काबूस बिन सईद अल सईद का 10 जनवरी को निधन हो गया. (फोटो- पीटीआई)
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काबूस बिन सईद अल सईद. पांच दशक तक ओमान के सुल्तान रहे. उनका 10 जनवरी को निधन हो गया. वह बीते कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे. उनके निधन पर भारत में एक दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया गया है. 13 जनवरी को. इस दिन देशभर में तिरंगा आधा झुका रहेगा. और मनोरंजन का कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं होगा.
काबूस के निधन पर पीएम मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया था,
काबूस को उनके पिता ने 1958 में पढ़ने के लिए ब्रिटेन भेजा. सुल्तान ने 1965 में काबूस को वापस बुलाकर उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया. वजह थी काबूस का प्रोग्रेसिव माइंडेड होना. तैमूर खुद पढ़े-लिखे थे लेकिन अपनी जनता को पढ़ाने के खिलाफ थे. जबकि, काबूस की सोच इससे अलग थी. 1970 में काबूस ने ब्रिटेन की मदद से तख्तापलट किया. पिता को पद से हटाकर खुद ओमान के सुल्तान बन गए. 29 की उम्र में. सुल्तान बनते ही उन्होंने देश का नाम बदला. देश का नाम ओमान रखा और मस्कट को उसकी राजधानी बनाई.
में उस वक्त छपी खबर के मुताबिक, तख्तापलट के तुरंत बाद काबूस ने कहा था, 'मेरे पिता देश में मिले नए खज़ाने (तेल) का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए करने के में असफल रहे हैं. ये देखकर मुझे काफी गुस्सा आता था, इसीलिये मैंने कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है.'
ओमान को दुनिया के दूसरे देशों से जोड़ने के लिए उन्होंने फॉरेन पॉलिसी शुरू की. पड़ोसी देशों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किये. उनके कार्यकाल में ओमान अरब लीग और यूनाइटेड नेशंस में शामिल हुआ.
साल 1996 में काबूस ने ओमान का पहला लिखित संविधान जारी किया. उसका नाम था, 'बेसिक स्टैट्यूट्स ऑफ द स्टेट्स' यानी 'देश की आधारभूत विधियां'. इसमें कुरान के आधार पर नागरिकों के अधिकार तय किये गए. इस संविधान में अब तक केवल एक बार संशोधन हुआ है. साल 2011 में.
रॉयटर्स के मुताबिक, काबूस ने ओमान की विदेश नीति को बिल्कुल स्वतंत्र रखा. सऊदी और ईरान के टकराव में उन्होंने ओमान को किसी पाले में नहीं जाने दिया. कतर के साथ अन्य गल्फ देशों के टकराव के दौर में भी ओमान पूरी तरह तटस्थ रहा और सभी देशों से अपने संबंध बनाए रखे. यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही.
के मुताबिक, काबूस ने पुणे में पढ़ाई की. शंकर दयाल शर्मा ने उन्हें पढ़ाया था. 1996 में जब शर्मा भारत के राष्ट्रपति के तौर पर मस्कट पहुंचे तब काबूस ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका शाही स्वागत किया था. रॉयल पैलेस में काबूस के कई सहयोगी भारतीय थे. उन्हें भारतीय क्लासिकल म्यूज़िक पसंद था. 2018 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मस्कट गए थे तब काबूस ने महल में नाश्ता बनवाकर उनके होटल में भिजवाया था. ओमान में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति काबूस का रवैया बेहद उदार था. उनके पिता ने अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई की थी. वहीं बताया जाता है कि उनके दादा ने अपने जीवन के आखिरी साल भारत में बिताए और यहीं से ओमान की सत्ता संभाली. उन्हें मुंबई में दफनाया गया है.
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि हैयथम काबूस के रास्ते पर ही चलेंगे. हैयथम ऑक्सफर्ड से ग्रैजुएट हैं. और काबूस के नेतृत्व में विरासत और संस्कृति मंत्री रह चुके हैं. वह विदेश मंत्रालय में महासचिव भी रहे हैं.
वीडियोः USA के राष्ट्रपति को कैसे हटाया जा सकता है?
काबूस के निधन पर पीएम मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया था,
वह एक दूरदर्शी राजनेता थे. उन्होंने ओमान को एक आधुनिक और समृद्ध देश बनाया. वह न सिर्फ हमारे क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति के दूत थे. वह भारत के सच्चे दोस्त थे. उन्होंने भारत और ओमान के बीच सामरिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनसे जो स्नेह और अपनापन मिला वह हमेशा मेरे दिल के करीब रहेगा.18 नवंबर, 1940 में पैदा हुए. धोफ़र में. ओमान के राजघराने में. तब ओमान को दुनिया में ओमान एंड मस्कट के नाम से जाना जाता था. उनके पिता सईद बिन तैमूर सख्त सुल्तान थे. उनके दौर में ओमान पूरी दुनिया से कटा हुआ था. बेहद गरीब था. वहां पक्की सड़कें तक नहीं थीं. जनता सुल्तान की अनुमति के बिना न चश्मा लगा सकती थी और न ही सीमेंट खरीद सकती थी.
#कौन थे काबूस?
काबूस को उनके पिता ने 1958 में पढ़ने के लिए ब्रिटेन भेजा. सुल्तान ने 1965 में काबूस को वापस बुलाकर उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया. वजह थी काबूस का प्रोग्रेसिव माइंडेड होना. तैमूर खुद पढ़े-लिखे थे लेकिन अपनी जनता को पढ़ाने के खिलाफ थे. जबकि, काबूस की सोच इससे अलग थी. 1970 में काबूस ने ब्रिटेन की मदद से तख्तापलट किया. पिता को पद से हटाकर खुद ओमान के सुल्तान बन गए. 29 की उम्र में. सुल्तान बनते ही उन्होंने देश का नाम बदला. देश का नाम ओमान रखा और मस्कट को उसकी राजधानी बनाई.
ओमान में 60 के दशक में तेल के भंडार का पता चला था. इसके बाद सुल्तान के रेवेन्यू में खासा इज़ाफ़ा हुआ था. लेकिन तैमूर रेवेन्यू का इस्तेमाल जनता के लिए नहीं करना चाहते थे. वह उसे शाही कोष में जमा कर रहे थे. काबूस को यह पसंद नहीं था. न्यू यॉर्क टाइम्सप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सुल्तान काबूस (फोटो- Twitter/Narendra Modi)
में उस वक्त छपी खबर के मुताबिक, तख्तापलट के तुरंत बाद काबूस ने कहा था, 'मेरे पिता देश में मिले नए खज़ाने (तेल) का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए करने के में असफल रहे हैं. ये देखकर मुझे काफी गुस्सा आता था, इसीलिये मैंने कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है.'
#आधुनिक ओमान का निर्माताकाबूस को आधुनिक ओमान के निर्माण का क्रेडिट दिया जाता है. उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था सुधारने की दिशा में ज़रूरी कदम उठाए ताकि ओमान को रेवेन्यू के लिए सिर्फ तेल पर निर्भर न रहना पड़े. उन्होंने देश का इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारा. स्कूल बनवाए, अस्पताल खुलवाए. पक्की सड़कें, पोर्ट्स बनवाए ताकि लोगों का जीवनस्तर बेहतर हो सके.
ओमान को दुनिया के दूसरे देशों से जोड़ने के लिए उन्होंने फॉरेन पॉलिसी शुरू की. पड़ोसी देशों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किये. उनके कार्यकाल में ओमान अरब लीग और यूनाइटेड नेशंस में शामिल हुआ.
साल 1996 में काबूस ने ओमान का पहला लिखित संविधान जारी किया. उसका नाम था, 'बेसिक स्टैट्यूट्स ऑफ द स्टेट्स' यानी 'देश की आधारभूत विधियां'. इसमें कुरान के आधार पर नागरिकों के अधिकार तय किये गए. इस संविधान में अब तक केवल एक बार संशोधन हुआ है. साल 2011 में.
#गल्फ देशों को जोड़कर रखने वाले कबूसकाबूस गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. GCC में छह देश हैं. ओमान के अलावा सउदी अरब, कुवैत, यूएई, कतर और बहरेन इसमें शामिल हैं. गल्फ देशों के बीच आपसी मतभेदों को सुलझाने में ओमान मध्यस्थता करता रहा है. हालांकि, वह GCC सदस्य देशों में सैन्य हस्तक्षेप नहीं करता.
रॉयटर्स के मुताबिक, काबूस ने ओमान की विदेश नीति को बिल्कुल स्वतंत्र रखा. सऊदी और ईरान के टकराव में उन्होंने ओमान को किसी पाले में नहीं जाने दिया. कतर के साथ अन्य गल्फ देशों के टकराव के दौर में भी ओमान पूरी तरह तटस्थ रहा और सभी देशों से अपने संबंध बनाए रखे. यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही.
#काबूस और भारतइकोनॉमिक टाइम्स
के मुताबिक, काबूस ने पुणे में पढ़ाई की. शंकर दयाल शर्मा ने उन्हें पढ़ाया था. 1996 में जब शर्मा भारत के राष्ट्रपति के तौर पर मस्कट पहुंचे तब काबूस ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका शाही स्वागत किया था. रॉयल पैलेस में काबूस के कई सहयोगी भारतीय थे. उन्हें भारतीय क्लासिकल म्यूज़िक पसंद था. 2018 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मस्कट गए थे तब काबूस ने महल में नाश्ता बनवाकर उनके होटल में भिजवाया था. ओमान में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति काबूस का रवैया बेहद उदार था. उनके पिता ने अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई की थी. वहीं बताया जाता है कि उनके दादा ने अपने जीवन के आखिरी साल भारत में बिताए और यहीं से ओमान की सत्ता संभाली. उन्हें मुंबई में दफनाया गया है.
काबूस के चचेरे भाई हैयथम बिन तारिक अल सईद ने ओमान के नए सुल्तान बने हैं. काबूस के कोई बच्चे नहीं हैं. और न ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना कोई उत्तराधिकारी नियुक्त किया था. हालांकि, वह एक बंद लिफाफे में अपने उत्तराधिकारी के तौर पर हैयथम का नाम लिखकर गए थे. शाही परिवार की मौजूदगी में 11 जनवरी को लिफाफा खोला गया. और हैयथम नए सुल्तान चुन लिये गए.ओमान के नए सुल्तान हैयथम बिन तारिक अल सईद हैं. वह काबूस के चचेरे भाई हैं. (फोटो- पीटीआई)
#काबूस की जगह कौन बने नए सुल्तान?
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि हैयथम काबूस के रास्ते पर ही चलेंगे. हैयथम ऑक्सफर्ड से ग्रैजुएट हैं. और काबूस के नेतृत्व में विरासत और संस्कृति मंत्री रह चुके हैं. वह विदेश मंत्रालय में महासचिव भी रहे हैं.
वीडियोः USA के राष्ट्रपति को कैसे हटाया जा सकता है?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सुल्तान काबूस (फोटो- Twitter/Narendra Modi)
ओमान के नए सुल्तान हैयथम बिन तारिक अल सईद हैं. वह काबूस के चचेरे भाई हैं. (फोटो- पीटीआई)