कौन हैं तमिलनाडु के वित्त मंत्री, जो रेवड़ी कल्चर डिबेट पर बोले- 'PM ने कुछ किया हो, तो हम सुनें'
'आपने अर्थशास्त्र में डबल पीएचडी की हो, नोबेल मिला हो.' पी थ्याग राजन का बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल है.

“आप जो कह रहे हैं, उसके लिए आपके पास संवैधानिक साक्ष्य होने चाहिए ताकि हम आपकी सुनें. या फिर आप उस विषय के एक्सपर्ट हों, आपके पास अर्थशास्त्र में दो Ph.D हों. या फिर आपको नोबेल प्राइज़ मिला हो, जिससे हमें ये लगे कि आप हमसे बेहतर हैं. यार फिर आपका ट्र्रैक रिकॉर्ड ऐसा हो, जिससे पता लगे कि आपने देश की अर्थव्यवस्था को सुधार दिया है, महंगाई कम हो गई हो, बेरोजगारी कम हो गई हो. लेकिन अगर इनमें से ऐसा कुछ नहीं है, तो हम आपकी बात क्यों सुनें? तमिलनाडु केंद्र को ₹1 देता है, वापस 35 पैसे मिलते हैं. हम जो चाहेंगे वो करेंगे.”
सोशल मीडिया में ये बयान खूब छाया हुआ है. ये बयान है तमिलनाडु के वित्त मंत्री पी थ्याग राजन का. इंडिया टुडे की एक टीवी डिबेट में राजन ने ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तब कहीं, जब उनसे पीएम के रेवड़ी कल्चर वाले बयान के बारे में सवाल पूछा गया.
P Thiaga Rajanबात अगर शिक्षा की करें, तो तमिलनाडु के वित्त मंत्री थ्याग राजन देश के सबसे पढ़े लिखे नेताओं में शामिल हैं. राजनीति विरासत में मिली थी, लेकिन पढ़ाई के बाद राजन ने बैंकर बनना चुना. राजन के दादा पीटी राजन अंग्रेजों के समय सन 1936 में कुछ महीनों के लिए मद्रास के मुख्यमंत्री रहे. उनके पिता पीटीआर पलानिवेल राजन ने भी सियासत की. तमिलनाडु में करुणानिधि की पार्टी के सीनियर नेता थे. साल 1996 से 2001 तक तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर भी रहे.
थ्याग राजन ने स्कूली पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग में दाखिला लिया. कहा जाता है कि ऐसा उनके पिता चाहते थे. उन्होंने NIT, तिरुचिलापल्ली, जिसे पहले रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज के तौर पर जाना जाता था, में दाखिला लिया. वहां उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद राजन आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए. अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क में उन्होंने ऑपरेशन्स रिसर्च में पहले मास्टर्स किया. उसके बाद पीएचडी की.
हालांकि राजन ने इंजीनियरिंग को अपना पेशा नहीं बनाया. इसके बाद उन्होंने विश्व प्रसिद्ध MIT के सोलन स्कूल से MBA किया और बैंकर बन गए. 1990 में उन्होंने काम करना शुरू किया. 2001 में वो अमेरिका के लेहमैन ब्रदर्स बैंक के साथ जुड़ गए. वहां उन्होंने को-पोर्टफोलियो मैनेजर के तौर पर काम किया. 2008 में जब इस बैंक ने लगभग पूरे विश्व को मंदी की चपेट में आने के लिए मजबूर कर दिया, तो राजन ने भी लेहमैन इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्होंने सिंगापुर के स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक में काम किया. 2014 में जब उन्होंने इस बैंक को छोड़ा, तब वो इस बैंक में फाइनेंशियल मार्केट्स सेल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर थे.
राजनीति में एंट्री2014 में बैंकर का करियर खत्म कर राजन ने अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया. वो अपने पिता की ही पार्टी DMK में शामिल हो गए. 2016 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव हुए. राजन को उनके पिता की पुरानी सीट मदुरै सेंट्रल से टिकट मिला. चुनाव में पार्टी की सरकार नहीं बनी, लेकिन जीत के साथ राजन पहली बार विधानसभा पहुंचे. 2021 में फिर चुनाव हुए और उन्होंने दोबारा इसी सीट से अच्छे मार्जिन से जीत हासिल की.
राजनीति में आए अभी सिर्फ कुछ साल ही बीते थे, लेकिन सरकार बनी तो DMK प्रमुख और मौजूदा मुख्यमंत्री स्टालिन ने राजन पर भरोसा जताया. स्टालिन ने अपनी सरकार में राजन को वित्त मंत्रालय और मानव संसाधन मंत्रालय दिया.
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