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गांधी के हत्यारों की पूजा देश में कौन लोग कर रहे हैं?

आज़ादी के अमृत महोत्सव में ऐसा क्यों हुआ?

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30 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 1 जनवरी 2022, 08:12 AM IST)
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आज़ादी के अमृत महोत्सव में ऐसा क्यों हुआ?
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आज 2021 का आखिरी दिन है. उस साल का आखिरी दिन, जिसका इंतज़ार हमने इसलिए भी खूब किया था, क्योंकि हम 2020 से आजिज़ आ गए थे. वो साल, जब हमने दंगा भी देखा और एक सदी में आई सबसे भयानक महामारी को भी. हम चाहते थे कि अब 2020 बस किसी तरह बीत जाए. तब के वो मीम आपको याद होंगे, जिनमें आगाह किया जाता था कि 2021, 2020 का नाना भी साबित हो सकता है. जितने लोगों ने इन मीम्स को मज़ाक में लिया, वो गलत साबित हुए. भारत ने 2021 में जो भोगा, वैसा अनुभव शायद ही हमें पहले कभी हुआ था. जिस महामारी ने लाखों लोगों को पैदल घर जाने पर मजबूर किया था, उसने इस साल लाखों को लील लिया. कोई, कहीं सुरक्षित नहीं था. लोग अस्पताल में मरे, घर पर मरे, ऑक्सीजन के बाज़ार में मरे. लेकिन ये बुरा दौर भी आखिरकार बीत ही गया. इस एक साल को एक बुलेटिन में समेटना हमारे बस की बात नहीं है. सारे खट्टे-मीठे अनुभवों को जोड़ने बैठेंगे तो 2022 आ जाएगा, लेकिन बुलेटिन पूरा नहीं होगा. इसीलिए हमने सोचा कि आपको यही बता दें कि 2021 का आखिरी दिन बीता कैसे. 31 दिसंबर की तारीख को जो तस्वीरें हमारे सामने आईं, वो हमें ये बताने के लिए पर्याप्त हैं कि बीती एक सदी में सबसे मुश्किल साल के आखिरी दिन हम कहां खड़े हैं. और ये समझने के लिए भी कि 2021 से हम कुछ सीखे, या नहीं. सबसे पहले बात भगवान राम के शहर आयोध्या की. वही राम, जो अब राजनीति के केंद्र में ऐसे स्थापित हुए हैं उनसे जुड़ी हर चीज़, हर खबर हाई प्रोफाइल होती है. आज राम लला के शहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हनुमान पहुंचे. माने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह. शाह 8 साल बाद आयोध्या आए हैं. उन्होंने इससे पहले आखिरी बार अयोध्या का दौरा 2013 में किया था जब वो लोकसभा चुनाव 2014 के लिए यूपी प्रभारी थे. वैसे तो अमित शाह को सुबह 10 बजे तक अयोध्या पहुंचना था लेकिन खराब मौसम के चलते वो करीब साढ़े 11 बजे के आसपास अयोध्या पहुंचे. अयोध्या पहुंचकर शाह ने सबसे पहले हनुमानगढ़ी के दर्शन करने के बाद राजजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र मंदिर के दर्शन किए. इसके बाद राम मंदिर निर्माण कार्य के बारे में जानकारी लेते हुए अमित शाह ने राम मंदिर निर्माण समिति के पदाधिकारियों संग बैठक भी की. अगर आपको लग रहा था कि गृहमंत्री सिर्फ राम लला के दर्शन के लिए आए थे, तो आप गलत हैं. चुनावी मौसम के बीच अमित शाह ने अयोध्या के जीआईसी मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राम मंदिर, अनुच्छेद 370, कारसेवा जैसे मुद्दों पर विपक्ष को घेरा. साथ ही बीजेपी के ट्रिपल V मॉडल की तारीफ की तो वहीं सपा-बसपा के ट्रिपल P पर जमकर हमला बोला.
आज मैं ये कह कर जा रहा हूँ की इसी भूमि पर जहाँ भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था वहाँ आने वाले कुछ ही महीनों में आकाश को छूने वाला राम मंदिर बनेगा. कारसेवकों पर जिसने गोलियाँ चलाईं. राम नवमी के उत्सव को किसने बंद कर दिया था? पहले के शासन में तीन P हुआ करते थे. परिवारवाद पक्षपात और पलायन. अब तीन V हैं. विकास, व्यापार और सांस्कृतिक विकास.
अयोध्या के बाद अमित शाह ने संत कबीर नगर में जनसभा को संबोधित किया और साल के आखिरी दिन का अंत बरेली में रोड शो के साथ किया. अमित शाह के इस दौरे से साल 2021 के भारत के बारे में बहुत कुछ समझा जा सकता है. ये, कि राम मंदिर आंदोलन का मकसद लगभग पूरा होने के बाद भी उसकी राजनैतिक प्रासंगिकता कितनी है. प्रासंगिकता कितनी है के साथ साथ ये भी सोचने वाली बात है कि ये प्रासंगिकता बनी क्यों और कैसे है? मंदिर तो बन रहा है और बनकर रहेगा. फिर भी हमारी राजनीति को बार बार राम की शरण में जाना पड़ता है. क्यों? सोचने वाली बात है. अयोध्या, संत कबीर नगर और बरेली से आईं तस्वीरें हमें हमारी चुनावी राजनीति के बदल चुके चहरे के बारे में भी बताती हैं. शाह भारत में दूसरे सबसे ताकतवर दफ्तर में बैठते हैं. और उसके साथ अपनी पार्टी के लिए एक दिन में तीन प्रचार कार्यक्रमों में हिस्सा भी लेते हैं. पिछले 6 दिनों में गृहमंत्री अमित शाह यूपी के 11 जिलों का दौरा कर चुके हैं. अमित शाह ने अपने दौरे की शुरुआत 26 दिसंबर को की थी. 31 दिसंबर तक अमित शाह कासगंज, जालौन, हरदोई, सुल्तानपुर, भदोही, मुरादाबाद, उन्नाव, लखनऊ, अयोध्या, संतकबीर नगर और बरेली में बीजेपी के लिए प्रचार कर चुके हैं. ये करते हुए शाह, भारत की मौजूदा राजनीति में सफलता के लिए एफर्ट का एक बेंचमार्क भी सेट करते चलते हैं. खालिस राजनीति की नज़र से देखें तो शाह का काम वाकई तारीफ के काबिल है. उन्हें ऐसे ही नहीं भारतीय जनता पार्टी का डीफैक्टो अध्यक्ष कहा जाता. लेकिन शाह के आज के दौरे में कुछ चीजें नदारद भी थीं. जैसे सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड प्रोटोकॉल का पालन. मुश्किल से दो-चार कार्यकर्ताओं के ही चेहरे पर मास्क दिखे. कोरोनावायरस के एक नए वेरिएंट और महामारी की तीसरी लहर की दस्तक के बीच ये सब हो रहा है. चुनाव आयोग कह ही चुका है कि सभी पार्टियां चुनाव चाहती हैं. चुनाव होगा या नहीं, ये पक्के से तभी मालूम चलेगा, जब अधिसूचना वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. लेकिन चीज़ें जा किस दिशा में रही हैं, ये नज़र आ रहा है. यहां हम उस सवाल को दोहरा देना चाहते हैं? हमने 2021 से आखिर क्या सीखा? 2021 के आखिरी दिन की दूसरी तस्वीर इत्र के शहर कन्नौज से. आखिरकार दूसरे पी जैन के यहां छापा पड़ ही गया. आज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कन्नौज दौरा था लेकिन अखिलेश के कन्नौज के पहुंचने से पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम कन्नौज पहुंच गई. कल अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि वे शुक्रवार को कन्नौज पहुंचकर समाजवादी पार्टी के एमएलसी पुष्पराज जैन उर्फ पंपी जैन के साथ प्रेस कॉफ्रेंस करेंगे लेकिन प्रेस कॉफ्रेंस से पहले ही इनकम टैक्स की टीम ने पंपी जैन के घर पर छापेमारी कर दी. अखिलेश यादव ने पंपी जैन के ठिकानों पर छापेमारी को बीजेपी का कन्नौज को बदनाम करने का प्रोपेगैंडा बताया.
नफ़रत की दुर्गंध फैलाने वाले भारतीय जनता पार्टी के लोग सौहार्द्र की सुगंध कैसे पसंद कर सकते हैं. उन्होंने समाजवादी पार्टी को बदनाम करना चाहा.
जवाब में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कन्नौज में हुई छापेमारी को समाजवादी इत्र की दुर्गंध से जोड़ दिया अमित शाह के अलावा केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी छापेमारी के खिलाफ बयानबाजी को अखिलेश यादव की बौखलाहट बताई. कन्नौज के साथ-साथ पंपी जैन के मुंबई वाले ठिकाने पर भी छापेमारी हुई. पुष्पराज जैन की कम्पनी प्रगति एरोमा का रीजनल ऑफिस मुंबई में है. बताया जा रहा है कि मुम्बई दफ्तर से दुबई, अबू धाबी समेत कई देशों में इत्र का इंपोर्ट किया जाता है. इसके अलावा मुंबई के मलाड में भी इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा था. ये जगह भी पुष्पराज जैन से जुड़ी है. पंपी जैन के अलावा कन्नौज के ही बड़े इत्र कारोबारी मोहम्मद याकूब के घर भी इनकम टैक्स की छापेमारी हुई. याकूब के भाई मोहसीन के यहां लखनऊ में भी इनकम टैक्स के 4-5 अधिकारियों की एक टीम पहुंची थी. कन्नौज में इत्र के सबसे बड़े और पुराने कारोबारियों में गिने जाने वाले मलिक मियां के यहां भी छापेमारी हुई. छापेमारी का सिलसिला यहीं नहीं रुका. कानपुर के आनंदपुरी में इत्र कारोबारी अनूप जैन के यहां भी इनकम टैक्स का छापा पड़ा. अनूप जैन उसी आनंदपुरी में रहते हैं जहां पीयूष जैन रहते है. अनूप जैन को अभी तक पीयूष जैन का करीबी बताया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अकेले यूपी में ही इत्र कारोबारियों के लगभग 50 ठिकानों पर इनटैक्स डिपार्टमेंट की छापेमारी हुई है. छापे की महिमा के बारे में हम 30 दिसंबर के बुलेटिन में ही आपको काफी कुछ बता चुके हैं. इसीलिए इस बात को आज नहीं खीचेंगे. क्योंकि छापे का क्या है, कहीं भी, कभी भी पड़ सकता है. और एजेंसियों को तो अपना काम करना ही चाहिए. 2021 में हमें सिर्फ कोरोना ने ही नहीं मारा. एक और चीज़ थी, जिसने हमें मुर्दा बना दिया. बात मध्य प्रदेश के ग्वालियर की है हमें यह बात एक नागरिक के तौर पर आत्म अवलोकन करने के लिए मजबूर करती है. यहां हिन्दू महासभा ने आज महात्मा गांधी के हत्यारे दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे की जयंती मनाई. सबसे पहले हिन्दू महासभा के कार्यालय में सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट हुए. इसके बाद यहां विधिवत तरीके से महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे और दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे की तस्वीर लगाकर आरती उतारी गई. अंबाला की जेल से लाई गई मिट्टी से बापू के तीनों हत्यारों की तस्वीर का अभिषेक किया गया. इतना ही नहीं इस दौरान गोडसे, आप्टे और परचुरे के अमर होने जैसे शर्मनाक नारे भी लगाए गए. 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. गोली मारने के लिए जिस बंदूक का इस्तेमाल हुआ था उसे दत्तात्रेय परचुरे ने उपलब्ध कराया था. घटना के बाद स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठने चाहिए क्योंकि एक दिन पहले ही संगठन के लोगों ने प्रशासन को चुनौती दी थी कि वे बापू के हत्यारे की पुण्यतिथि मनाएंगे. बावजूद इसके प्रशासन ने इस तरह के कार्यक्रम को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. और ये सब हुआ है तब, जब आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. गांधी के विचारों से सहमत होना, भारत का नागरिक होने की शर्त न है, न हो सकती है. एक शख्स थे. एक राजनेता थे. कुछ अच्छा किया. कहीं चूके भी. लेकिन जब उनकी हत्या में शामिल लोगों के लिए ज़िंदाबाद का नारा लगता है, तो बात असहमति की रह नहीं जाती. जिस तरह गोडसे ने साज़िशन गांधी को मारा, उसी तरह ये साज़िश है गांधी के विचारों की भी हत्या कर देने की. समस्या सिर्फ ये नहीं है कि चार लोग कहीं किसी की आरती उतारकर वीडियो वायरल कर देते हैं या फिर कोई कथित संत गांधी को गालियां दे देता है. शर्मनाक वो प्रतिक्रिया होती है, जो हमारा समाज और राजनीति इन घटनाओं पर देते हैं. 2021 का साल आज़ादी के अमृत महोत्सव को मनाने का भी साल था और उस आज़ादी को दिलाने वालों में से एक को गाली देने का भी. उसकी हत्या के उत्सव का भी. है न मुबारक आज़ादी का अमृत महोत्सव? अब बात अरुणाचल प्रदेश की. भारत में नये साल का सूरज सबसे पहले यहीं दस्तक देगा. और यही वो सूबा है, जिसपर चीन नज़र गड़ाकर बैठा हुआ है. अक्साई चिन पर पहले से कब्ज़ा जमाकर बैठा चीन लंबे वक्त से अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत बताता आया है. कहता है अरुणाचल का बड़ा इलाका उसका है, नाम है ज़ंगनन. अब चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों के लिए नए चीनी नाम देना शुरू कर दिया है. इसमें तवांग से लेकर सियांग तक जगहें हैं. भारत के विदेश मंत्रालय ने कह दिया है कि चीन के नाम बदलने से ये तथ्य नहीं बदल सकता कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग था और रहेगा. लेकिन ये खबर कम से कम आपको ये तो याद दिला ही देती है 2020 में चीन के साथ जो खींचतान लद्दाख से शुरू होकर पूर्वोत्तर तक पूरी सीमा पर पसर गई थी, वो बनी हुई है. एक बाहरी ताकत है, जो हमें दबाने, डराने का मंसूबा रखती है. वो बड़ा और ताकतवर मुल्क है. उससे हम तभी जीतेंगे, जब हमारी पांचों उंगलियां इकट्ठा होंगी. छोटी भी, बड़ी भी. सोचिएगा कि ऐसा हो रहा है कि नहीं. आखिर में बात देश में फिर से बढ़ते कोविड की. दो दिन की छुट्टी क्या मिलती है, पूरा दिल्ली एनसीआर पहाड़ पर जाकर बस जाना चाहता है. लेकिन मसूरी में पुलिस ने पक्का कर दिया है कि अगर आपका होटल बुक नहीं है, और टीके नहीं लगे हैं तो एंट्री नहीं. लगातार दूसरे साल हम नए साल की आगवानी महामारी की छांव में कर रहे हैं. सतर्क रहें. अपना ध्यान रखें. टीके लगवाएं. चोरी से बूस्टर न लगवाएं. और खुश रहें. एक खुशी की बात हम आपको सुना देते हैं. रेज़िडेंट डॉक्टर्स ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है.

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