छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने 15 विधायकों को संसदीय सचिव पद की शपथ दिलवाई.इन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है. शपथ दिलाते हुए सीएम बघेल ने कहा किसंसदीय सचिव अब सरकार के सहयोगी के तौर पर काम करेंगे.आज अपने रायपुर निवास परिसर में आयोजित संसदीय सचिवों के शपथ ग्रहण समारोह में 15विधायक साथियों को संसदीय सचिव के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी।सभी साथियों को नए दायित्व के निर्वहन की शुभकामनाओं के साथ बहुत-बहुतबधाई।#गढ़बो_नवा_छत्तीसगढ़ pic.twitter.com/sMADFcw6Lv — Bhupesh Baghel(@bhupeshbaghel) July 14, 2020 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को विपक्षी पार्टीबीजेपी ने असंवैधानिक बताया है. हमारे साथी ऋषभ ने संसदीय सचिवों के बारे मेंविस्तार से बताया था. आइए एक बार फिर जानते हैं कि संसदीय सचिव क्या होते हैं, उनकाकाम क्या होता है. संसदीय सचिव/पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी है क्या? एकदम आसान भाषामें कहें, तो संसदीय सचिव का पद वित्तीय लाभ का पद है. संसदीय सचिव जिस किसी भीमंत्री के साथ जुड़ा होता है, वो उसकी मदद करता है. बदले में उसे पैसा, कार जैसीजरूरी सुविधाएं मिलती हैं. 1. ये ब्रिटिश सिस्टम की देन है. इंग्लैंड में मंत्रीसंसद के उसी सदन में जा सकता है, जिसका वो सदस्य होता है. तो दोनों सदनों में कामकरने के लिए मंत्री को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी की जरूरत पड़ती है.पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अपने मंत्री की तरफ से किसी भी सदन में जा सकता है. 2.भारत में मंत्री लोकसभा या राज्यसभा, किसी भी सदन में जा सकते हैं. मंत्रियों कीमदद के लिए केंद्र में मिनिस्ट्री ऑफ़ पार्लियामेंट्री अफेयर्स है, जो इस तरह के कामदेखती है. उसी के अंतर्गत पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी आते हैं. अब स्टेट मेंपार्लियामेंट्री सेक्रेटरी का क्या काम? पार्लियामेंट तो केंद्र में है सीधे-सीधेकहें, तो राज्यों में कई बार मंत्री पद न मिलने से नाखुश विधायकों को ये पोस्ट देदी जाती है. पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी को राज्यमंत्री या कैबिनेट मंत्री की रैंकदी जाती है. उनको सारी सुविधाएं भी मंत्री वाली ही मिलती हैं. पर क्या राज्यसरकारों का ऐसा करना ठीक है? किसी विधायक को खुश करने के लिए जनता का पैसा बर्बादकरना उचित है? संविधान क्या कहता है? 1. 2003 में संविधान में एक संशोधन किया गयाथा. इस 91वें संशोधन के मुताबिक आर्टिकल 164(1A) जोड़ा गया. इसमें कहा गया कि किसीभी राज्य में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल विधायकों का 15 फीसदी ही मंत्री रह सकतेहैं. यानी 100 विधायक हैं, तो कुल 15 मंत्री. मतलब हर किसी को मंत्री बनाकर पैसाबांटना बंद. दिल्ली के लिए आर्टिकल 239(A) है. यहां 10 फीसदी तक ही मंत्री हो सकतेहैं. यानी कुल 70 विधायकों में से 7 विधायक ही मंत्री रह सकते हैं. 2. लेकिन राज्यसरकारों में भी चतुर लोग बैठे हैं. इन्होंने तुरंत अपना एक कानून बनाया. WestBengal Parliamentary Secretaries (Appointment, Salaries, Allowances andMiscellaneous Provisions) Bill, 2012 टाइप का. कई राज्यों में. ऐसे कानून सेपार्लियामेंट्री सेक्रेटरी का पोस्ट बनाया गया. मंत्री की रैंक रहेगी. विधायक को औरक्या चाहिए. पद, सिक्योरिटी, दबदबा. मंत्रीजी वाला रुतबा. 3. पर मामला फिर फंसा.संविधान के आर्टिकल 191 के मुताबिक, कोई विधायक या सांसद सरकार के अंतर्गत किसी'लाभ के पद' पर नहीं रह सकता. ऐसा होने पर विधायकी से बर्खास्त हो जायेंगे. हालांकिकैबिनेट मिनिस्टर या मिनिस्टर ऑफ़ स्टेट को 'लाभ का पद' नहीं माना जाता, परपार्लियामेंट्री सेक्रेटरी को 'लाभ का पद' माना जाता है. इसका क्या उपाय है? 4.इसका भी तोड़ है. राज्य सरकार कानून लाकर पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी के पोस्ट को'लाभ के पद' से मुक्त कर देती है. जैसे दिल्ली सरकार के कानून Delhi Members ofLegislative Assembly (Removal of Disqualification) Act, 1997 के मुताबिक, ये लाभका ही पद है. अरविंद केजरीवाल सरकार ने कानून में बदलाव लाते हुए जून, 2015 मेंDelhi Members of Legislative Assembly (Removal of Disqualification) Bill, 2015लाया. इसमें प्रावधान था कि मंत्रियों को दिए गए पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी पोस्टको लाभ का पद न माना जाये. साथ ही इसे बैक-डेट यानी से लागू किया जाए. दिक्कत कहांहै? 1. मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के अलावा बाकी सारे विधायक, चाहे सरकार कीपार्टी के हों या किसी और पार्टी के, कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं.ये दबाव के जरिए सरकार पर लगाम भी रखते हैं. अब पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाकरकिसी विधायक को किसी मंत्री के नीचे लाना एक तरह से इस व्यवस्था को तोड़ना है. सत्ताके मन के अनुरूप ढालना है. 2. विधायकों को खुश करने के लिए मंत्री का दर्जा देनापब्लिक के पैसे की बर्बादी है.--------------------------------------------------------------------------------विडियो- अटल पेंशन योजना क्या है, नए बदलावों के बाद यह कितना लाभ दे सकती है?