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मैक्सिको में हर साल हज़ारों लोग कहां गायब हो जाते हैं?

और इन्हें खोजने के लिए सरकार का रवैया क्यों ढुलमुल है?

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मैक्सिको में आधिकारिक तौर पर 80,000 से ज्यादा लोग लापता हैं. (एएफपी)
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स्वाति
14 दिसंबर 2020 (Updated: 14 दिसंबर 2020, 02:34 PM IST)
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आज की कहानी की शुरुआत कई तरह से हो सकती है. ये कहानी 4 सितंबर 2020 से शुरू की जा सकती है. वो दिन, जब कुछ औरतों ने मिलकर अपने देश के मानवाधिकार आयोग की बिल्डिंग पर कब्ज़ा कर लिया. ताकि उनकी बहरी सरकार उनके हक़ और न्याय की मांग सुने.
इसकहानी को एक लिस्ट से भी शुरू किया जा सकता है. वो लिस्ट, जिसमें 80 हज़ार से ज़्यादा लापता लोगों के नाम हैं. ये वो लोग हैं, जो कभी अपने घर से, कभी बाज़ार से, किडनैप कर लिए गए. उन्हें छुड़वाने के लिए परिवारों ने कई-कई बार फ़िरौतियां दी, मगर वो लौटकर घर नहीं आए. इनमें से कई लापता लोग अपराधियों द्वारा रसोई में पका दिए गए. उनके शरीर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर तब तक भूना गया, जब तक कि उनकी हड्डियां चटक नहीं गईं. हड्डियों के इन ढेरों का मिलना एक देश की आम दिनचर्या का हिस्सा है. इतना आम रूटीन है कि अगर 15-20 लोगों के सामूहिक अवशेष मिलें, तो ख़बर तक नहीं बनती.
या फिर ये कहानी आर्मी की एलीट विंग से शुरू की जा सकती है. जिसके कुछ सदस्यों ने मिलकर एक गिरोह बनाया. ये गैंग दुनिया के सबसे क्रूर ड्रग्स कार्टल्स में गिना जाता है. ये न केवल ड्रग्स की स्मगलिंग करता है, बल्कि अपने गैंगवॉर की फंडिंग के लिए निर्दोषों का अपहरण करके फिरौतियां भी वसूलता है. ये किडनैपिंग्स इतनी आम हैं कि वहां बैंक फ़िरौती देने के लिए एक ख़ास तरह का लोन भी देते हैं.
कितने तरीके हैं इस कहानी की शुरुआत के. मगर इन्हें छोड़कर सुनिए एक मां की कहानी. एक मां, जिसकी जवान बेटी किडनैप कर ली गई. उसे छुड़ाने के लिए इस मां ने कई बार फ़िरौती दी, मगर तब भी उसकी बेटी को मार डाला गया. अब उस मां ने ख़ुद ही अपनी बेटी को इंसाफ़ दिलाने का फैसला किया. दिन-रात एक करके जांच की, सबूत जुटाए. जितने भी लोग उसकी बेटी के मर्डर में शामिल थे, उन सबको अरेस्ट करवाया. और फिर एक रोज़ ऐन मदर्स डे के दिन उसकी भी हत्या कर दी गई. वो मर गई, मगर उसकी मुहिम नहीं मरी. इसी मुहिम का नतीजा है कि वहां की सरकार ने पहली बार अपने देश के हज़ारों ग़ुमशुदा लोगों को खोज निकालने का वादा किया है.
Mexico
उत्तरी अमेरिकी देश मैक्सिको. (गूगल मैप्स)


क्या है ये पूरा मामला?
उत्तरी अमेरिका में एक देश है- मैक्सिको. यहां 'तमाउलीपास' नाम के एक प्रांत में शहर है- सैन फरनान्डो. यहीं की रहने वाली थीं, कैरेन. 23 जनवरी, 2014 की बात है. कैरेन अपनी पिकअप ट्रक में बैठकर मार्केट जा रही थी. एकाएक दो गाड़ियों ने उसे दोनों तरफ से घेर लिया. उनमें बैठे हथियारबंद लोग नीचे उतरे और उन्होंने कैरेन को उसकी गाड़ी समेत अगवा कर लिया.
किडनैपर्स ने कैरेन की मां मरियम रॉड्रिगेज़ से संपर्क किया और फ़िरौती मांगी. एक बार नहीं, कई बार. मरियम ने बैंक से लोन ले-लेकर फ़िरौतियां दीं, मगर कैरेन घर नहीं आई. फिर एक रोज़ मरियम को यकीन हो गया कि उनकी बेटी शायद कभी नहीं लौटेगी. शायद वो मार डाली गई है.
एक आम देश के नागरिक इस स्थिति में क्या करेंगे?
पुलिस के पास जाएंगे? मगर मरियम के पास ये ऑप्शन नहीं था. इसलिए कि मैक्सिको की पुलिस ऐसे मामलों में विक्टिम्स की कोई मदद नहीं करती. वहां आपराधिक गिरोह इतने ताकतवर हैं कि समानांतर सरकार चलाते हैं. पुलिस के पास इन गिरोहों से लड़ने की न तो कुव्वत है, न ही कोई मोटिवेशन. पीड़ितों के प्रति सिस्टम पूरी तरह उदासीन है. लोगों ने इसे अपनी नियति मान लिया है.
Miriam Rodriguez
मरियम रॉड्रिगेज़.


क्या मरियम ने भी ऐसा ही किया?
नहीं. उन्होंने ख़ुद ही अपनी बेटी को इंसाफ़ दिलाने का फ़ैसला किया. वो बन गईं वन-मैन एजेंसी. वो नकली पहचान पत्र बनाकर कभी हेल्थ मिनिस्ट्री, तो कभी चुनाव आयोग की कर्मचारी बन जातीं. हुलिया बदलकर घर-घर जातीं. पूछताछ करके ब्योरे जमा करतीं. एक अपराधी के पकड़े जाते ही और भी सुराग मिलने लगे. तीन साल के भीतर मरियम ने अपनी बेटी की किडनैपिंग और मर्डर में शामिल सभी 10 लोगों की शिनाख़्त कर ली. उनके खिलाफ़ ठोस सबूत जुटाए. फिर जान पर खेलकर एक-एक अपराधी को पकड़ा और पुलिस के सुपुर्द किया.
मरियम के इस पैशन को देखकर उनके शहर का ढर्रा बदलने लगा. पहली बार लोगों को समझ आया कि अपराध पर चुप्पी लगाना हल नहीं. बेहतरी लानी है, तो संघर्ष करना होगा. मगर ये बदलाव लाने की एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ी मरियम को. ये बात है 23 मार्च, 2017 की. इस रोज़ 'तमाउलीपास' प्रांत में एक बड़ी घटना हुई. यहां एक जेल में 29 क़ैदी सुरंग खोदकर भाग गए. इनमें वो लोग भी थे, जिन्हें मरियम ने पकड़वाया था. मरियम जानती थीं कि वो लोग बदला लेंगे. उन्होंने सरकार से सुरक्षा मांगी. मगर उनके घर के बाहर कभी-कभार गश्ती करवाने के सिवाय उन्हें कोई प्रॉटेक्शन नहीं दी गई.
Mexico Police
मैक्सिको की पुलिस, सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ और मिलिटरी सभी एजेंसियां दाग़दार हैं. (एएफपी)


और फिर आई 14 मई, 2017 की तारीख़.
रात के साढ़े 10 बजे होंगे, जब मरियम काम से लौटकर घर आ रही थीं. अचानक एक सफ़ेद रंग का ट्रक उनके पीछे आकर रुका. इसमें वही अपराधी थे, जो दो महीने पहले जेल से भागे थे. उन्होंने 13 राउंड गोलियां चलाकर मरियम की जान ले ली. ऐन मदर्स डे के दिन अपराधियों ने एक मां को मार डाला. वो भी बस इसलिए कि उसने इंसाफ़ पाने की हिम्मत दिखाई थी. न्यू यॉर्क टाइम्स ने मरियम की आपबीती पर एक डिटेल्ड रिपोर्ट छापी है. इसे पढ़कर आप उस औरत की हिम्मत, उसके ज़ज्बे के आगे सिर झुका लेंगे.
आप कहेंगे, मरियम रॉड्रिगेज़ की ये कहानी हम आपको अभी क्यों सुना रहे हैं? इसलिए कि बीते कुछ महीनों से मैक्सिको में बर्ताव में एक बदलाव दिख रहा है. वहां की सरकार पहली बार अपने लापता नागरिकों को खोजने की ईमानदार पहल कर रही है. और इस पहल के पीछे सबसे बड़ी वजह हैं, मरियम रॉड्रिगेज़ जैसी महिलाएं और उनका संघर्ष.
Karla Quintana
कार्ला क्विनटाना नैशनल सर्च कमीशन की मुखिया हैं. (गेटी इमेजेज़)


इस कड़ी में अगला नाम है, कार्ला क्विनटाना.
कौन हैं ये? मैक्सिको में एक सरकारी एजेंसी है- नैशनल सर्च कमीशन. मैक्सिकन भाषा में इस एजेंसी के नाम का शॉर्टकट है- CNB. ये लापता लोगों की तलाश के लिए बनाई गई एजेंसी है. इसका काम है, मिसिंग लोगों के केस को क्लोज़र देना. पता लगाना कि उनके साथ क्या हुआ? वो मारे गए, तो उनके अवशेष कहां हैं? कार्ला क्विनटाना इस एजेंसी की मुखिया हैं.
वो देश, जहां सिस्टम अपने लापता नागरिकों के प्रति पूरी तरह उदासीन था, उसे क्विनटाना जिम्मेदार बना रही हैं. अपनी नियुक्ति के एक बरस के भीतर उन्होंने मैक्सिको के सभी 31 स्टेट्स में लापता लोगों की तलाश के लिए कमिटीज़ बनाई हैं. उनके नेतृत्व में अब तक CNB 1,600 से ज़्यादा सीक्रेट कब्रें खोज चुका है. अक्टूबर 2020 में करीब 169 लापता लोगों की लाशें खोजी गईं. नवंबर महीने में भी 120 से ज़्यादा लाशें मिलीं. आपको शायद ये संख्याएं छोटी लगें. लेकिन अगर आप मैक्सिको की हिस्ट्री उठाकर देखें, तो पाएंगे कि वहां लापता हुए लोगों को तलाशने का काम इतने युद्धस्तर पर पहले कभी नहीं हुआ. तुलना के लिए हम आपको मैक्सिको के इस मिसिंग पर्सन्स वाले ऐंगल का ब्रीफ बैकग्राउंड बताते हैं.
Mexico Disappeared People
मैक्सिको में अक्टूबर 2020 में करीब 169 लापता लोगों की लाशें खोजी गईं हैं. (एएफपी)


मैक्सिको के इन ग़ुमशुदा लोगों की कहानी शुरू हुई 70 के दशक में
ये कोल्ड वॉर का दौर था. सोवियत और अमेरिका, दोनों ही अपनी-अपनी विचारधारा के विस्तार में लगे थे. इस शीत युद्ध का एक मंच मैक्सिको भी था. यहां सोवियत ने लेफ़्ट विंग वाले गुरिल्ला ग्रुप्स को खड़े होने में मदद दी. इनकी बगावत थी सरकार से, जिसे सपोर्ट करता था अमेरिका. गुरिल्ला ग्रुप्स और मैक्सिन सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ के बीच ख़ूब खून-खराबा होता. दोनों एक-दूसरे के लोगों की किडनैपिंग करते. इस काम में आगे थे सुरक्षाबल. इस दौर में मैक्सिको की सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ ने सैकड़ों लेफ़्ट विद्रोहियों को अगवा करके उनकी हत्या कर दी. उनके अवशेष तक नहीं मिले. इसके बाद से ही मैक्सिको में अगवा करके मारने का सिलसिला चालू हुआ.
मिसिंग पर्सन्स का ये मुद्दा ज़्यादा फ़ोकस में आया 2006 से. इसका बैकग्राउंड ड्रग कार्टल्स के साथ शुरू हुई लड़ाई से जुड़ा था. उस समय मैक्सिको के राष्ट्रपति थे, फेलिपे कालडेरॉन. उन्होंने ड्रग कार्टल्स से लड़ने के लिए सेना को तैनात किया. ड्रग्स के खिलाफ़ शुरू हुई ये जंग जल्द ही मानवाधिकार अपराधों का भी प्राइम बन गई. कभी आर्म्ड फोर्सेज़ लोगों को पकड़कर सीक्रेटली उन्हें मारती. कभी ड्रग कार्टल्स फ़िरौती और बदले जैसी मंशा के चलते लोगों को किडनैप करके मारते.
Felipe Calderón
मैक्सिको पूर्व राष्ट्रपति फेलिपे कालडेरॉन. (एएफपी)


चूंकि कार्टल्स काफी ताकतवर थे और समानांतर सरकार चलाते थे, सो स्थानीय पुलिस भी उनके साथ मिल जाती थी. ये सभी लोग मिलकर मैक्सिको के मिसिंग पर्सन्स वाली लिस्ट में इज़ाफा करते गए. सबसे ज़्यादा भीषण स्थिति थी तमाउलीपास, रेर्रेरो, वेराक्रूज़, सिनालोआ और ज़ैकाटेकस राज्यों की. ये सभी प्रांत संगठित आपराधिक गिरोहों के सबसे मज़बूत अड्डों में से थे.
अगर आप 2006 से लेकर अबतक के आंकड़े देखें, तो पता चलेगा कि साल-दर-साल ये संख्याएं किस तेज़ी से बढ़ी हैं. मसलन, 2006 में केवल 241 लोग गायब हुए. 2016 के साल 5,827 लापता हुए. 2019 में ये संख्या बढ़कर हो गई नौ हज़ार. 23 नवंबर, 2020 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल गुमशुदाओं की संख्या में थोड़ी कमी आई है. अब तक केवल 6 हज़ार लोग मिसिंग रिपोर्ट हुए हैं.
Drugs In Mexico
मैक्सिको में ड्रग्स की स्मगलिंग एक बड़ा मुद्दा है लेकिन सरकार इसे रोकने में नाकामयाब रही है. (एएफपी)


अब सवाल है कि जिस तेज़ी से लोग लापता होते हैं, क्या उनका हश्र पता लगाने में भी वैसी तेज़ी दिखाई जाती है?
जवाब है, नहीं. वहां लापता होने का मतलब है पूर्णविराम. गायब हुए इंसान के परिवार को कोई जवाब नहीं मिलता. सरकारी एजेंसियां इन मामलों में कोई मुस्तैदी नहीं दिखाती हैं.
इसके कई कारण हैं. पहला तो ये कि अपराधी लाश ठिकाने लगाने में बहुत चालाकी दिखाते हैं. बहुत कम ही ऐसा होता है कि समूची लाश बरामद हो. ज़्यादातर केसेज़ में लाश को छोटे-छोटे टुकड़े में काटकर उन्हें रोस्ट किया जाता है. तब तक, जब तक कि हड्डियां छोटे-छोटे काली मिर्च के साइज़ जितने छोटे टुकड़ों में न तब्दील हो जाएं. फिर इन टुकड़ों को कहीं रेगिस्तान में, तो कहीं किसी बियावान में गाड़ दिया जाता है. इन अवशेषों को खोजना, DNA जांच से उनकी पहचान मालूम करना बहुत जटिल और महंगी प्रक्रिया है.
दिक्कत ये भी है कि मैक्सिको में क्राइम भी कम नहीं हो रहे. हर साल हज़ारों नए नाम ग़ुमशुदा लोगों की लिस्ट में जुड़ जाते हैं. इसके अलावा एक बड़ी दिक्कत ये भी है कि लापता लोगों को खोजने के लिए एजेंसी को स्थानीय पुलिस, सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ और मिलिटरी की ज़रूरत पड़ती है. ये सभी एजेंसियां दाग़दार हैं. मुमकिन है कि जिन लोगों के साथ मिलकर मिसिंग एजेंसी काम कर रही हो, वही लोग अपराध के लिए जिम्मेदार हों. मसलन, 2014 में वहां 43 छात्र एकसाथ लापता हो गए थे. माना जाता है कि अपने फील्ड वर्क के दौरान वो शायद ग़लती से किसी गैंग के अड्डे पर पहुंच गए और मारे गए. जांच के दौरान इस केस में पुलिस, मिलिटरी और जस्टिस डिपार्टमेंट के लोगों की भी मिलीभगत पाई गई थी.
Mexico President Andrés Manuel López Obrador
मैक्सिको के मौजूदा राष्ट्रपति आंद्रेज़ मैन्युअल ओब्रादोर. (एएफपी)


मौजूदा सरकार क्या कर रही?
अब आपको समझ आ गया होगा कि मैक्सिको में इन गुमशुदाओं की तलाश करना कितनी मुश्किल चुनौती है. आपको ये भी समझ आ गया होगा कि हमने CNB की चीफ कार्ला क्विनटाना का नाम हाइलाइट क्यों किया. इंटरनैशनल मीडिया में छपी कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये क्विनटाना ही हैं, जिनकी मेहनत के कारण मैक्सिको में धड़ाधड़ सामूहिक कब्रें मिल रही हैं. 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने अपनी ऐसी ही एक ख़बर में एक लापता बच्चे की मां के हवाले से लिखा है-
अगर क्विनटाना न होतीं, तो प्रशासन कब्रों को खोदता तक नहीं. जिस तरह वो अब तक इन कब्रों को छुपाते आए थे, आगे भी छुपाते रहते.
रिपोर्ट्स बताती हैं कि मैक्सिको के राष्ट्रपति आंद्रेज़ मैन्युअल ओब्रादोर भी इस मसले पर पहले से अधिक संजीदा हुए हैं. उनकी इस संजीदगी के पीछे भी एक बड़ी वजह महिलाएं ही हैं. पिछले कुछ महीनों से मैक्सिको की महिलाएं एक बड़ा आंदोलन चला रही हैं. किस तरह का आंदोलन है ये? इस मूवमेंट के कई चेहरे हैं. कोई महिला अपने साथ हुए सेक्शुअल क्राइम के खिलाफ़ संघर्ष कर रही है. कोई महिला, अपनी लापता बेटी के लिए आंदोलन से जुड़ी है. कोई महिला इसलिए भी साथ है कि उसकी चार-पांच साल की बच्ची के साथ परिवार के ही किसी आदमी ने यौन अपराध किया.
आंकड़ों के मुताबिक, मैक्सिको में 66 पर्सेंट से अधिक महिलाएं यौन हिंसा की शिकार हैं. इसके अलावा एक बड़ा मुद्दा फेमिसाइड भी है. फेमिसाइड माने, लड़की या महिला होने की वजह से मार दिया जाना. मैक्सिको में हर रोज़ औसतन 10 महिलाएं फेमिसाइड की शिकार होती हैं. ज़्यादातर मामलों में हत्यारों को कोई सज़ा नहीं मिलती. केस तक नहीं चलता. स्थिति ये है कि बाहर तो आपको ड्रग कार्टल्स और बाकी अपराधियों से ख़तरा है. और घर के भीतर भी आप सुरक्षित नहीं.
Marc 9 2020 Protest
9 मार्च, 2020 को मैक्सिको की महिलाओं ने राष्ट्रीय हड़ताल किया था. (एएफपी)


अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ़ मैक्सिको की महिलाओं ने क्या किया?
वो संगठित हुईं. इस एकता से जुड़ी पहली बड़ी ख़बर आई 9 मार्च, 2020 को. इस रोज़ मैक्सिको की महिलाओं ने राष्ट्रीय हड़ताल कर दी. उनकी मांग थी कि सरकार उनके साथ होने वाले अपराधों पर सख़्त कदम उठाए.
फिर दूसरी बड़ी ख़बर आई 4 सितंबर, 2020 को. इस रोज़ कुछ दर्जन भर महिलाओं ने मैक्सिकन मानवाधिकार आयोग की बिल्डिंग पर कब्ज़ा कर लिया. उन्होंने इमारत की दीवार पर लिख दिया- हम न माफ़ करते हैं, न भूलते हैं. इन महिलाओं ने अपने और अपने बच्चों के साथ अपराध करने वालों के नाम लिखकर दीवारें गोद डालीं. जिन्हें सिस्टम से लेकर सोसायटी तक ने अनसुना किया, उन्होंने एकजुट होकर पूरी दुनिया तक अपनी आवाज़ पहुंचा दी थी.
जानकारों का मानना है कि महिलाओं की ये मुखरता, उनकी बग़ावत मैक्सिको का माहौल बदल रही है. इसके कारण सरकार पर भी दबाव पड़ रहा है. ये बदलाव अच्छा तो है, मगर मैक्सिको में बेहतरी का रास्ता अभी बहुत लंबा है.

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