कितने ऐसे गणतंत्र दिवस आपको याद होंगे जब आप टीवी पर राजपथ पर होने वाली परेड नहींदेख पाए थे. क्योंकि आप स्कूल की परेड में थे. या 'क्या हम सच्चे मायनों मेंगणतंत्र हैं?' वाला स्पीच दे रहे थे. या 'लोकनृत्य' कर रहे थे. या फिर तालियां बजारहे थे. जो भी हो, आप 8 से 11 के बीच टीवी के सामने नहीं थे. और जब साढ़े बारह बजेआप दो लड्डू लेकर घर पहुंचते हैं, तब तक सब खतम हो जाता है.तो आपको बताएं उस गणतंत्र दिवस परेड के बारे में जो आपने नहीं देखी, पर उसमें कुछऐसा हुआ जो उस से पहले और बाद में कभी नहीं हुआ. बात बहुत पहले की है. 1963 की.गणतंत्र दिवस की परेड होनी थी. लेकिन माहौल आज से काफी अलग था. महज़ दो महीने पहलेतक चीन से लड़ाई चल रही थी. वो लड़ाई जिसे हम अपनी कुर्बानियों के बावजूद जीत नहींपाए. लेकिन गणतंत्र दिवस की परेड रवायत के मुताबिक हुई. पर एक बदलाव के साथ.इस गणतंत्र दिवस पर फौज की टुकड़ियों के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भीराजपथ पर होने वाली परेड में हिस्सा लिया. कहते हैं कि उस दिन राजपथ पर 3500स्वयंसेवकों ने परेड की.फोटोः आरएसएस की वेबसाइट से साभारगणतंत्र दिवस की परेड में आमतौर पर सेना, पैरामिलिट्री (अर्ध सैनिक बल), एनसीसी औरस्कूलों से दस्ते होते हैं. 1963 की परेड में RSS का शामिल होना एक नई बात थी.दरअसल RSS ने चीन के साथ हुई लड़ाई में फौज की मदद की थी. इस बात का आभार जताने केलिए उन्हें प्रधानमंत्री नेहरू ने परेड में हिस्सा लेने का न्योता दिया था.इसके अलावा जानने लायक बात ये भी है कि 1950 से अब तक की सारी परेड राजपथ पर नहींहुईं. राजपथ पर परेड 1955 से हो रही है. इस से पहले परेड इरविन स्टेडियम, किंग्सवे,लाल किले और रामलीला मैदान पर भी हो चुकी है. 1955 के बाद से राजपथ परेड के लिएपक्का वेन्यू बना. इस साल पाकिस्तान के गवर्ऩर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद परेड केमुख्य अतिथि थे.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेंःगणतंत्र दिवस पर असम और ईस्ट इंफाल में बम धमाके