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किडनैपिंग के बाद जान बची तो दुर्योधन चल दिया सुसाइड करने

दुर्योधन अड़ गए थे, चटाई-पियरिया उठाई, चल दिए घर-द्वार छोड़ के.

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20 मई 2016 (अपडेटेड: 20 मई 2016, 11:23 AM IST)
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कौरवों ने पांडवों की दुर्गति कर रखी थी. बेचारे जंगल में दिन काट रहे थे. ऐसे में भी दुर्योधन को पांडवों ने एक बार गंधर्वों से बचाया. जब दुर्योधन की जान बचाने के लिए लड़ पड़े थे भीम. दुर्योधन का मेंछा बूड़ गया. मारे शर्म के बिचारा भुइयां में गड़ा जा रहा था. पहली बार ऐसा हुआ होगा कि जान के लाले पड़े हों और जी बच जाए फिर भी अगला दुःखी हो. दुर्योधन ने दुःशासन को बुलाया और कहा-देख भाई अब ये राज-वाज की मुझसे होने से रही. मेरा हो रखा है मोरल डाउन. पेट में उड़ रही हैं तितलियां. हम जा रहे हैं. खाना-पीना छोड़ के मरने.
ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नही. हस्तिनापुर में हाहाकार मच गया. सारे भाईयों ने मनाया. कर्ण ने मनाया. मंत्रियों ने मनाया. दुर्योधन अड़ गए. चटाई-पियरिया उठाई चल दिए घर-द्वार छोड़ के.
उधमी का साथी उधमी. राक्षसों ने देखा कि दुर्योधन जान देने पर तुला है तो उनमें हाय-तौबा मच गई. फुर्ती में उपवास करते दुर्योधन को अगवा कर लिया. अपने अड्डे पर ले गए और तसल्ली से समझाया. भरोसा दिलाया कि हमारे गुर्गे द्रोण ,कृपाचार्य और भीष्म के सिस्टम में घुसकर उसे करप्ट कर देंगे ताकि वो पांडवों के लिए अपने दिल के सॉफ्टवेयर से सॉफ्ट कार्नर डिलीट कर दें. हमारे लड़के मौके पे आपकी तरफ से लड़ेंगे. आप मरने का प्लान करो कैंसल. घर जाकर करो तैयारी लड़ाई की. दुर्योधन ने भी बात समझी और ओके-ओके हो गया. राक्षसों ने उसे फिर उठाया और जहां से लाए थे वहीँ छोड़ आए. सुबह नींद खुली तो उसे लगा. उसने कोई सपना देखा था. अपने लोगों के बीच वापिस लौटा और एक ही बात कही - "अइसा है,बहुत हुआ गोरिल्ला वार. युद्ध समझते हो न युद्ध.. अब वही होगा. तैयारी करो. ऐ कर्ण! गाड़ी निकाल!!"

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