RRB यानी रेलवे रिक्यूटमेंट बोर्ड ने दो भर्तियां निकालीं, भर्ती कब निकाली...मार्च2018 में. नोटिफिकेशन जारी हुआ, परीक्षा साल 2019 के जून और सिंतबर में कंप्लीट होजानी थी. छात्रों ने दिन-दुपरी-रात एक कर पढ़ना शुरू किया. सवाल नौकरी का था.परिक्षाएं, दो तरह की भर्तियों के लिए 3 राउंड में होनी थी. पहली NTPC यानी नॉनटेक्निकल पॉपुलर कैटगरी, जिसके तहत रेलवे क्लर्क, टिकट क्लर्क, गुड्स गार्ड, स्टेशनमास्टर जैसे 35,277 पदों पर भर्ती होनी है. दूसरी है Group Dयानी चतुर्थश्रेणी, जिसके तहत चपरासी, गैंगमैन, ट्रैकमैन की 1,03,769 पदों पर भर्ती. कुल पदोंकी संख्या होती है 1,39,046. और इन पदों के लिए 2 करोड़ 42 लाख से ज्यादा आवेदन.बेरोजगारी के आलम को इन आंकड़ों से समझते चलिए जो 2019 के हैं, कोरोना काल के पहलेहैं. इस बीच जो बेरोजगारी बढ़ी उसका तो कोई कैलकुलेशन नहीं है. कायदे से अब तकभर्ती पूरी हो जानी थी, नौकरियां मिल जानी थीं. मगर हुआ ये कि 2019 में हो जानेवाली भर्ती आज 3 साल बाद 2022 में भी पूरी नहीं हो पाई है. अब जिन युवाओं को नौकरीका लेटर पाकर चहकना था,उन्हीं बदन पर लाठियां चटक रही हैं. 24 से लेकर 26 जनवरी तकउग्र होकर प्रदर्शन किया, पटना से लेकर प्रयागराज तक उसकी तपिश देखने को मिली अबसवाल है कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है, जिन छात्रों का काम कागज, कलम दवाद से होजाना चाहिए, वो सड़कों पर क्यों उतर आए ? ट्रेन में आग क्यों लग गए ? तो जवाब हैकि तीन में से अब तक सिर्फ एक राउंड की परीक्षा हुई, वो भी तय तारीख से दो साल बाद,जुलाई 2021 में. दो साल निल बटे सन्नाटा रहा. रिजल्ट आया 15 जनवरी 2022 को. यानीकुछ दिन पहले ही. रिजल्ट भी NTPC वाले सिर्फ एक राउंड यानी CBT-1 की.यहां CBT-1 कामतबल है कंप्यूटर में बेस्डटेस्ट. दरअसल NTPC के एक्जाम में दो स्टेज में परीक्षाहोनी है, CBT-1 और CBT-2. इसको आप प्री-मेंस जैसा समझिए. पहली जो पास कर लेगा, उसेदूसरी परीक्षा में बैठने को मिलेगा, उसे पास किया तो नौकरी. यहां इंटरव्यू नहींहोना है. लेकिन अब गौर करने वाली बात है कि ग्रुप डी वाली परीक्षा तो अभी हुई हीनहीं, विवाद तो NTPC के CBT-1 के रिजल्ट पर ही हो गया. यानी 3 साल के आगे भीछात्र-छात्राओं का संघर्ष अभी बाकी है, वो अभी यहीं पर अटके हैं, लटके हैं और भटकेभी हैं और ऐसे हमें प्रधानमंत्री मोदी का एक बयान याद आता है जिसमें वो कहते नज़रआते हैं कि कांग्रेस की संस्कृति रही है अटकाने भटकाने लटकाने की. अटकाना, भटकानाऔर लटकाना...इन तीन शब्दों के जरिए प्रधानमंत्री मोदी पुरानी सरकारों को घेरा करतेहैं, आरोप लगाते हैं कि उनकी सरकारों में इन्फ्रास्ट्रचर प्रोजेक्ट लटके रह जातेथे. सालों तक तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए कोई सरकारी नौकरी पा जाना किसीबड़े प्रोजेक्ट से कम नहीं होता. और यहां प्रधानमंत्री के कहे से ठीक उलट हो रहाहै. केंद्र की मोदी सरकार के मातहत होने वाली परीक्षा 3 साल से अटक-लटक-भटक रही है.और कुछ निर्याणक नहीं हो पाया है. 15 जनवरी को घोषित पहले परिणाम पर छात्रों ने उसीदिन से आपत्ति जताना शुरू कर दिया. सोशल मीडिया के जरिए, खासकर ट्विटर पर ट्रेंडकराया जाने लगा, छात्रों की आपत्ति है कि रिजल्ट को ठीक ढंग से नहीं जारी किया गया.नियम था कि CBT-1के निर्धारित पदों से 20 गुना ज्यादा छात्र-छात्राओं कोचयन CBT-2 के लिए होगा. मगर छात्रों का आरोप है कि 20 गुना नहीं सिर्फ 12-13 गुनाही छात्रों को ही क्वालीफाई किया गया. उसमें छात्र नहीं रोल नंबर चुन लिए गए. कईपदों के लिए के ही छात्र का चयन हो गया. माने किसी एक को ही क्लर्क, स्टेशमास्टर,गुड्स गार्ड जैसे 4-5 पदों के लिए चुन लिया गया. जबकि अभ्यर्थी रोलनंबर यूनीक छात्रको चुनने की मांग कर रहे हैं, साथ ही एक और मांग है कि 10+2 और ग्रेजुएशन वालेछात्रों की अलग-अलग परीक्षा हो और इसी मांग को सोशल मीडिया पर करते-करते जब छात्रसड़कों से होते हुए रेल की पटरियों पर पहुंच गए तो फिर पुलिस बर्बरता उतर आई औरउसकी पहली तस्वीर 25 जनवरी को यूपी के प्रयागराज से आई बंदूक की बट से दरवाजे मारागया, लात से दरवाजा तोड़ने की कोशिश हुई, भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं, पुलिस कारवैया ऐसा मानो छात्र नहीं कोई डाकू, डॉन या आतंकवादी हो. प्रयागराज के छोटा बघाड़ामें पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लड़कों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. अब कुछ पुलिसवालेसस्पेंड जरूर किए जा चुके हैं, मगर उस वक्त तो कमरों में घुस-घुसकर, निकाल-निकाल करमारा गया. ये नहीं देखा गया कि कौन प्रदर्शन में था और कौन नहीं. पटना में भी यहीहुआ बात तब और बढ़ी जब रेलवे की तरफ से धमकी भरा नोटिस दिया गया कि प्रदर्शन कियातो नौकरी नहीं देंगे गुस्से से भरे छात्रों को जब प्यार से समझाना था तो रेलवे केअधिकारियों का रवैया समझ से परे रहा, नतीजा हुआ कि बात बढ़ गई और 26 तारीख को गयाके पास उग्र छात्रों ने श्रमजीवी एक्सप्रेस में आग लगी.बोगियां धधकने लगीं, हजारोंयात्री परेशान हुए. बिहार के जहानाबाद, पटना, कटिहार में छात्रों ने रेवले ट्रैक कोकब्जे में ले लिया और जमकर पथराव किया. तब जाकर दिल्ली की सरकार जागी और केंद्रीयरेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान आया छात्र हमारे साथी हैं, भाई है, बहन हैं, जोएग्जाम दे रहे हैं और छात्रों से अपील करने वाली बात लगाएंगे लेकिन ऐसी कोई बातनहीं लगाएंगे जिसमें रिवील ना हो कि मुद्दा क्या हैKoo Appरेल मंत्रालय छात्रों की मांग के प्रति काफी संवेदनशील है। रेलवे बोर्ड स्तर पर हाईपावर कमेटी का गठन किया गया है। RRB NTPC Results से संबंधित शिकायतें/सुझावrrbcommittee@railnet.gov.in पर 16.02.2022 तक भेजा जा सकता है। हाई पावर कमेटीद्वारा प्राप्त आपत्तियों की गंभीरता से जांच कर 04 मार्च तक रिपोर्ट सौंपी जाएगी ।View attached media content- East Central Railway (@ecrailway) 28 Jan 2022जो बात रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्यार से हिंसा के बाद समझाई वो पहले ही समझालेनी चाहिए थी. बात इतनी बिगड़ती ही नहीं, छात्रों की मांग को सुनने के लिए अब 5सदस्यों की कमेटी बना दी गई है, वो 4 मार्च को रिपोर्ट देगी. मगर छात्र पुलिस कीबर्बर कार्रवाई से डरे हुए हैं, आश्वासन के बाद भी आशंका में हैं और बार-बार अपनीमांगों को दोहरा रहे हैं ये छात्र देश के भविष्य हैं, इन्हीं के कंधों पर देश कोआगे ले जाने की जिम्मेदारी है, मगर नौकरी ना मिलना और उससे उपजा गुस्सा इन्हेंहिंसा के रास्ते तक ले गया. इनमें सबसे ज्यादा उग्र ग्रुप-डी के अभ्यर्थी हैं,क्योंकि उनको सिर्फ 1 परीक्षा CBT-1 बाद चुन लेना था, लेकिन कुछ दिन पहले इसमें भीदूसरे चरण की परीक्षा कराने का नोटिफिकेशन आया तो छात्र और नाराज हो गए. पूछने लगेप्री-मेंस करा रहे हैं, चपरासी की भर्ती है या उन्हें IAS-IPS चुनना है. छात्रों कीमांग जायज है, रेल मंत्री ने भी इस पर विचार के लिए कह दिया है. मगर सवाल है कि ऐसाकिया ही क्यों गया ? वो भी तब ग्रुप डी की भर्ती आसानी से हो जाए इसके लिए पीएममोदी ने 2016 में ही इंटरव्यू की व्यवस्था खत्म कर दी थी, तब ऐसा इस सोच के साथकिया गया कि छोटी नौकरी के लिए छात्रों को ज्यादा चरणों से ना गुजरना पड़े. एकपरीक्षा हो और चयन हो जाए, मगर यहां मुश्किल आसान करने के बजाय बढ़ा दी गई. और इसपर रेलवे मंत्री कहते हैं इतने ज्यादा लोगों की परीक्षा करा पाना आसान हीं एजेंसीको सिलेक्ट किया गया . सिलेक्ट करते करते कोरोना आ गया. दिसंबर 2020 में प्रॉसेसचालू हुईं, दूसरी वेव के बावजूद एग्जाम करवाया गया. जो दूसरा वाला ग्रुप बी वालाएग्जाम है , कैट में चले गए थे बच्चे, करीब 5 लाख एप्लीकेशन में फोटोग्राफ मैच नहींहो रहा था. इसके खिलाफ लोग कैट में गए थे, एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल ने जैसे हीइसका समाधान किया उसके तुरंत बाद एग्जाम के प्रॉसेस को आगे किया कोई देरी नहीं की.बड़ी परीक्षा की वजह से देरी की बात उसी सरकार के मंत्री कर रहे हैं, जिस सरकार ने2019 के चुनाव में इसी बात का बढ़चढ़कर प्रचार किया कि हम सबसे बड़ी परीक्षा करारहे हैं. तब के रेल मंत्री पीयूष गोयल का ही बयान था पूर्व रेल मंत्री ने खम ठोंकाकि सबसे बड़ी परीक्षा है, 2019 के चुनाव में इसका फायदा भी मिला, मगर 2022 में कहजा रहा है कि इतनी बड़ी परीक्षा है, इसीलिए देर हो रही है. और इसी देरी पर हीछात्रों का सारा गुस्सा है जब कोई छात्र गांव से गठरी बांध कर तैयारी के लिए निलकताहै. तो कभी नहीं सोचता कि उसे रेल की पटरी पर जाकर प्रदर्शन करना है. पुलिस सेभिड़ना है. अचार और लड्डू का डिब्बा देती मां से वो कभी लाठी खाने का आशीर्वाद नहींलेता और ना ही FIR, कोर्ट-कचहरी के लिए पिता से पैसे मांगता है. उसकी दुनिया तो 10बाई 10 का वो कमरा होता है, जहां कुछ नक्शे चस्पा होते हैं, किताबों का ढेर लगाहोता है और एक ही कूकर में दाल-भात-चोखा के साथ सपने पक रहे होते हैं. मगर उन सपनोंकी सीटी तब बज जाती है, जब साल-साल तैयारी करने के बाद भी उसे नौकरी नहीं मिलती.पहले वैंकेसी के लिए प्रदर्शन करता है, फिर परीक्षा कराने के लिए प्रदर्शन करता है,पेपर लीक हुआ तो उसके लिए प्रदर्शन, प्री-मेंस, इंटरव्यू और रिजल्ट आ जाए तो कचरी,हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ता है. घर से 5 हजार, 7 हजार रुपये तैयारी केलिए मिलते हैं. उसी में खाना, पीना, रूम का किराया, फॉर्म सब भरना पड़ता है. कोर्टका केस भी उसी पैसे का चंदा जमा कर लड़ना पड़ता है. और एक नहीं हर राज्य और केंद्रकी वैकेंसी में होने लगा है. सरकारें परीक्षा टाइम से नहीं करा पाती तो गुस्सासड़कों पर भी दिखता है.मगर छात्रों को भी समझना होगा कि जिस ट्रेन में वो आग लगा गएवो ट्रेन नरेंद्र मोदी या नीतीश कुमार के पैसे से नहीं खरीदी गई. वो उसी पैसे सेखरीदी गई, जिससे उन्होंने फॉर्म खरीदा, जो पैसा उनके माता-पिता टैक्स के रूप मेंदेते हैं. जिस ट्रेन से वो परीक्षा देने जाते हैं, उसी आग लगाकर नौकरी नहीं मिलेगी.गांधी का देश है तो गांधी के अहिंसक रास्ते ही समाधान संभव है.