संसद के तीन सत्र होते हैं बजट, मॉनसून और शीत. अलग अलग समय के लिए अलग अलग सत्र.मकसद भी अलग अलग. बजट सत्र, जैसा नाम से ज़ाहिर है, बजट बनाने और पास कराने के लिएहै. मॉनसून और शीत सत्र में सरकार अपने विधायी काम करती है. लेकिन अब सिर्फ एक तरहका सत्र बाकी रह गया है. हंगामा सत्र. सदन चालू होता है. विपक्ष हंगामा करता है. औरसरकार हंगामे के बीच बिल पास करती जाती है. यही हमने इस साल मॉनसून सत्र में देखा.और अब शीत सत्र में भी देखने लगे हैं. आज दिन की बड़ी खबर में हम इसी पर बात करेंगेकि कैसे पिछले सत्र की एक घटना इस सत्र को प्रभावित कर रही है. शीत सत्र जिस माहौलमें शुरू हुआ था, उससे सभी को उम्मीद तो यही थी कि अब संसद आगे की तरफ देखेगी.अर्थव्यवस्था कोरोना तालाबंदी की छांव से बाहर आ रही थी. पेगसस जासूसी कांड पर शोरकम हो गया था. महंगाई को लेकर भी सरकार ने एक संदेश देने की कोशिश तो कर ही दी थी.और फिर जो सबसे विवादित मुद्दा था, माने तीन कृषि कानून, उसे लेकर खुद प्रधानमंत्रीने वादा कर दिया था, कि कानून वापस ले लिए जाएंगे. इसीलिए लग नहीं रहा था सरकार औरविपक्ष के बीच टकराव के लिए कोई बहुत बड़ा मुद्दा होगा. सब यही मानकर चल रहे थे किकुछ हंगामा होगा, लेकिन अगस्त जैसा नहीं. लेकिन 29 नवंबर को फिर कुछ ऐसा हो ही गयाकि संसद से अब फिर स्थगन और हंगामे की खबरें ही ज़्यादा आ रही हैं. तीन कृषि कानूनवापस भी वैसे ही लिए गए, जैसे वो पास हुए थे - बिना चर्चा. और फिर मॉनसून सत्र केआखिरी दिन हुए राज्यसभा के अंदर हुए बलवे के लिए 12 सांसदों को पूरे शीत सत्र केलिए निलंबित कर दिया गया. आरोप लगाया गया अनुशासनहीनता का. इस बारे में हमने 29नवंबर के दी लल्लनटॉप शो में आपको बताया भी था. जिस तरह पेगसस कांड पर हंगामा पूरेमॉनसून सत्र को निगल गया था, निलंबन पर टकराव भी इतना बढ़ सकता है कि सदन चलना और नचलना बराबर लगने लगे. संभवतः इसीलिए सरकार और विपक्ष के बीच बैकचैनल बातचीत हुई,जिसके बारे में सूत्रों के हवाले से प्रेस में दावे हुए. संसदीय परंपराओं कीजानकारी रखने वाले विशेषज्ञ और राजनैतिक दल जानते हैं कि खेद प्रकट करने और माफीमांगने के बाद निलंबन का आधार कमज़ोर हो जाएगा. फिर जिस तरह सभापति वैंकैया नायडूने 11 अगस्त की घटना को याद किया था, उसमें भी सुलह का रास्ता माफी के रास्ते हीजाता दिखाई दिया. सभापति ने 29 नवंबर को कहा था कि सरकार General InsuranceBusiness (Nationalisation) Amendment Bill को पास कराने के दौरान हुए घटनाक्रम कीजांच चाहती थी, लेकिन कुछ सांसद जांच का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे. फिर मैं भीइंतज़ार में था कि सभी पक्षों के वरिष्ठ 11 अगस्त की घटनाओं को लेकर गंभीरतादिखाते, चिंतन होता और ये भरोसा दिलाया जाता कि आइंदा ऐसा नहीं होगा. लेकिन ये नहींहुआ. सभापति के इस बयान का सबटेक्सट यही है कि माफी से बात खुद ब खुद बन जाती.संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयरकिया. उन्होंने कहा कि भाजपा के सांसद भी विपक्ष में रहते हुए वेल में जाते थे. तोप्रह्लाद जोशी का ज़ोर भी इसी बात पर था कि निलंबित सांसद माफी मांगें. लेकिन कम सेकम कुछ निलंबित सांसद ऐसे हैं, जो माफी मांगने के विचार के खिलाफ हैं. इनमें से एकहैं भाकपा के बिनॉय विस्वम. बिनॉय का कहना है कि वो आत्मनिर्भर भारत के लिए निजीकरणके खिलाफ लड़ रहे थे. इसलिए माफी नहीं मांगेंगे. आज सुबह 11 बजे जब राज्यसभा कीकार्यवाही शुरू हुई, तो विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने निलंबन वापसी की गुहारलगाई. उन्होंने कहा कि विपक्ष सभापति वैंकैया नायडू के दफ्तर उनसे मिलने भी गया था.फिर ये वाकया पिछले सत्र का है तो इस सत्र में कार्रवाई कैसे हो सकती है. इसपरवैंकैया नायडू ने कहा कि राज्यसभा के सभापति और राज्यसभा, दोनों इस तरह की कार्रवाईकर सकते हैं. अतः निलंबन वापस नहीं लिया जाएगा. इसके बाद विपक्ष के सांसद राज्यसभासे उठकर चले गए. साथ में लोकसभा के विपक्षी सांसदों ने भी वॉकआउट किया. सभी संसदपरिसर स्थित गांधी प्रतिमा के पास पहुंचे और वहां प्रदर्शन करने लगे. इसके बाददोनों सदन 1-1 घंटे के लिए स्थगित हो गए. जब राज्यसभा की कार्रवाई दोबारा शुरू हुई,तब केंद्रीय उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राज्य सभा में सरकार का पक्ष रखा. आपजानते ही हैं कि पीयूष गोयल राज्यसभा में सदन के नेता हैं. और उन्होंने ही 11 अगस्तकी घटनाओं को लेकर 20 सांसदों के खिलाफ एक शिकायत सभापति को सौंपी थी. उन्होंनेकहा- विपक्ष ने हमपर आरोप लगाए कि हमने ग़लत ढंग से सदन के सदस्यों को सस्पेंड कियाहै. यह आरोप बिल्कुल ही ग़लत है. चूंकि सदन की कार्यवाही के दौरान इस गतिरोध कासमाधान नहीं हो सका. इसीलिए मल्लिकार्जुन खडगे अब सभापति के नाम निलंबन को लेकर एकचिट्ठी लिखने वाले हैं. रही बात निलंबित सांसदों की, तो उन्होंने कल से पूरे सत्रके दौरान सुबह 10 से शाम 6 तक गांधी प्रतिमा पर धरना देने की बात कही है. अब बातकरते हैं लोकसभा की. हम पहले ही बता चुके हैं कि राज्यसभा में विपक्षी सांसदों केनिलंबन पर लोकसभा से भी वॉकआउट किया गया था. दोपहर दो बजे एक बार फिर लोकसभा मेंकार्रवाई शुरू हुई, लेकिन तुरंत ही हंगामे के चलते स्थगित हो गई. फिर स्पीकर ओमबिड़ला ने एक सर्वदलीय बैठक बुलवाई, ताकि गतिरोध दूर हो सके. बावजूद इसके, जब 3 बजेलोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तब पीछे से विपक्षी सांसदों के हंगामे की आवाज़ आतीरही. कई सांसद सदन में तख्तियां लहराते रहे. तेलंगाना राष्ट्र समिति के सांसद तोवेल की तरफ भी आए. मांगें वही थीं - कृषि कानूनों पर चर्चा हो. न्यूनतम समर्थनमूल्य पर कानून बने और किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को मुआवज़ामिले. ये तो बात हुई कहने सुनने की. इस तरह की कार्रवाई के अलावा लिखित सवाल-जवाबसे भी बहुत सारी जानकारियां निकलकर आती हैं. आज केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंदराय ने लोकसभा को बताया कि अब तक राष्ट्रव्यापी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स NRCबनाने पर फैसला नहीं हुआ है. राय ने ये भी जोड़ा कि सिटिज़नशिप अमेंडमेंट एक्ट CAA10 जनवरी 2020 से लागू हो गया है. और इसके तहत नागरिकता के लिए आवेदन नियमों केअधिसूचित होने के बाद दिए जा सकते हैं. तो अब भी सरकार ने CAA और NRC को बैक बर्नरपर ही रखा हुआ है. NRC पर फैसला नहीं है. और CAA के लिए नियम ही नहीं बन रहे हैं.इसी साल 27 जुलाई को केंद्रीय गृहमंत्रालय ने संसद में दोनों सदनों की कमेटी ऑनसबऑर्डिनेट लेजिस्लेशन को सूचित किया था कि उसे CAA के तहत नियम बनाने के लिए छहमहीने और लगेंगे. सरकार ने इससे पहले फरवरी 2021 में भी छह महीनों की मोहलत मांगीथी. इन नियमों का ताल्लुक उन दस्तावेज़ों से भी होगा, जिनके आधार पर ये माना जाएगाकि आवेदन दे रहा शख्स 2014 की कटऑफ डेट से पहले भारत आया था. दिक्कत ये भी है किभारत आए कई लोग ऐसे हैं जिनके पास कोई दस्तावेज़ नहीं है. वैसे सरकार ने अपनी तरफसे एक छूट पहले ही दे दी है. गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से बहुत पहलेये बात कह दी गई थी कि आवेदक को ये साबित नहीं करना पड़ेगा कि उसके भारत आने की वजहधार्मिक उत्पीड़न थी. सरकार ये मानकर ही चलेगी की उत्पीड़न हुआ था. उन्होंने कहा किजम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद 1 हज़ार 678 कश्मीरीप्रवासी सूबे में लौटे. इन्हें प्रधानमंत्री विकास पैकेज 2015 के तहत रोज़गार दियागया है. इसके अलावा जो हिंदू पलायन को मजबूर हुए उनमें से भी 150 आवेदकों को उनकीपैतृक भूमि लौटा दी गई है. कश्मीर के बाद नित्यानंद राय आए महाराष्ट्र पर. उन्होंनेलोकसभा को बताया कि सरकार द्वारा अलग विदर्भ राज्य बनाने संबंधी किसी प्रस्ताव परविचार नहीं किया जा रहा है. इसके बाद बारी आई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की.उन्होंने कहा कि क्रिप्टो करेंसी के विज्ञापनों को बैन करने का पर फिलहाल फैसलानहीं लिया गया है. सरकार रिज़र्व बैंक और सेबी जैसी संस्थाओं के मार्फत जागरूकताबढ़ाने की कोशिश कर रही है. जल्द ही क्रिप्टो को लेकर सरकार एक बिल भी लाएगी. इसकामतलब उन खबरों में दम था, जिनमें ये कहा गया था कि सरकार क्रिप्टो के नियमन कीतैयारी में है. कुल मिलाकर संसद का शीत सत्र मॉनसून सत्र की राह पर चल निकला है.सदनों में हंगामा हो रहा है. विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है. इस प्रदर्शन से अप्रभावितसरकार अपना काम करती जा रही है. और आम जनता के काम की जानकारी जो थोड़ी बहुत निकलकरसामने आ रही है, वो लिखित जवाबों के मार्फत. वो भी उन सवालों के मामले में, जिन्हेंसरकार जवाब लायक मान रही है.