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क्यूरेटिव पिटीशन क्या होती है जो निर्भया के रेपिस्ट फाइल करने वाले हैं?

चार दोषियों का डेथ वॉरंट जारी हो चुका है, 22 जनवरी को दी जाएगी फांसी.

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7 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 7 जनवरी 2020, 04:24 PM IST)
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पटियाला हाउस कोर्ट ने गैंगरेप के चारों दोषियों का डेथ वॉरंट जारी कर दिया है.
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निर्भया गैंगरेप मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी कर दिया है. 22 जनवरी की सुबह 7 बजे चारों को फांसी होगी. निर्भया के पैरेंट्स ने दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द डेथ वॉरंट जारी करने के लिए याचिका दायर की थी. दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा है कि वो इस मामले पर क्यूरेटिव पिटीशन फाइल करेंगे. आइए जानते हैं ये कि क्यूरेटिव पिटीशन क्या होती है? सुप्रीम कोर्ट में किसी दोषी की फांसी पर मुहर लगने के बाद फांसी से बचने के लिए उसके पास दो विकल्प होते हैं. दया याचिका- जो राष्ट्रपति के पास भेजी जाती है. और पुनर्विचार याचिका जो सुप्रीम कोर्ट में लगाई जाती है. ये दोनों याचिकाएं खारिज होने के बाद दोषी के पास क्यूरेटिव पिटीशन का ऑप्शन होता है. ये पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में लगाई जाती है. इसमें कोर्ट ने जो सज़ा तय की है उसमें कमी के लिए रिक्वेस्ट की जाती है. यानी फांसी की सज़ा उम्रकैद में बदल सकती है. यह विकल्प इसलिये है ताकि न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो सके. क्यूरेटिव पिटीशन फाइल करते हुए यह बताना होता है कि किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जा रही है. पिटीशन का किसी सीनियर वकील द्वारा सर्टिफाइड होना जरूरी होता है. क्यूरेटिव पिटीशन को कोर्ट के तीन सबसे सीनियर जजों के पास भेजा जाता है, उनका फैसला अंतिम होता है. क्यूरेटिव पिटीशन पर फैसला आने के बाद अपील के सारे रास्ते खत्म हो जाते हैं. 2002 में सुप्रीम कोर्ट में रूपा हुर्रा बना अशोक हुर्रा एवं अन्य का मामला आया. यह तलाक का केस था. इस केस में पति-पत्नी ने पहले आपसी सहमति से तलाक की अर्ज़ी दी थी. लेकिन बाद में पत्नी मुकर गईं. ऐसे में तलाक की वैधता को लेकर सवाल उठा. इस केस में सवाल उठा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी आरोपी के पास राहत पाने का कोई विकल्प हो सकता है. इस केस के आधार पर ही क्यूरेटिव पिटीशन की प्रैक्टिस शुरू हुई.
 वीडियो- निर्भया गैंगरेप के दोषियों का बचाव करने के चक्कर में वकील एपी सिंह ये क्या बोल गए?

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