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सिमी: वाजपेयी ने बाय बोला था, शिवराज ने धांय बोला

सिमी का बैकग्राउंड.

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1 नवंबर 2016 (Updated: 1 नवंबर 2016, 01:49 PM IST)
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आठ संदिग्ध आतंकियों के भोपाल सेंट्रल जेल से भागने के दस घंटे के अन्दर उनका एनकाउंटर कर दिया गया.  उन पर कांस्टेबल रमाशंकर यादव की हत्या करके भागने का आरोप था. इनकी पहचान मोहम्मद सलीक, जाकिर हुसैन, अमजद खान, महबूब उर्फ़ गुड्डू, अब्दुल माजिद, मुजीब शेख, मोहम्मद खालिद अहमद और मोहम्मद अकील खिलजी के रूप में की गयी है. वो प्रतिबंधित इस्लामिक छात्र संगठन सिमी (SIMI) से जुड़े बताये जा रहे हैं.

सिमी का बैकग्राउंड क्या है?

सिमी का फाउंडर प्रेसिडेंट मोहम्मद अहमदुल्ला सिद्दीकी है. जो इस समय इलिनॉय यूनिवर्सिटी में जर्नलिज्म और पब्लिक रिलेशंस का प्रोफ़ेसर है. सिमी का कहना है कि उसका उद्देश्य भारत में दार-उल-उलूम (इस्लाम की ज़मीन) और खिलाफत (खलीफा का शासन) कायम करना है. इसके अलावा पश्चिमीकरण के विरुद्ध लड़ना और मुस्लिम समाज को मुस्लिम कोड ऑफ़ कंडक्ट के हिसाब से जीने के लिए कन्वर्ट करना भी उनका मकसद है. इनका नारा है- ‘अल्लाह हमारा मालिक है, कुरआन हमारा संविधान है, मोहम्मद हमारे लीडर हैं, जिहाद हमारा रास्ता है और शहादत हमारा मकसद है.’ सिमी ओसामा बिन लादेन का समर्थक हुआ करता था. इसके अलावा वो ये भी दावा करता है कि हम भारतीय मुसलमानों के हक़ के लिए सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं. वो उन्हें सामाजिक-आर्थिक अवसर दिलवाने की भी बात करते हैं.  25 अप्रैल 1977 को यूपी के अलीगढ़ में सिमी की नींव रखी गई. इसकी शुरुआत जमात-ए-इस्लामी हिन्द (JIH) की स्टूडेंट विंग के रूप में हुई थी. इससे पहले जमात-ए-इस्लामी हिन्द (JIH) की पुरानी स्टूडेंट विंग स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाईजेशन (SIO) थी. जमात-ए-इस्लामी हिन्द (JIH), जमात-ए-इस्लामी (JeI) का भारतीय संगठन है. जमात-ए-इस्लामी (JeI) को मौलाना मदूदी ने 1940 में बनाया था. ये भारत, पाक और बांग्लादेश में फैला था.  बांग्लादेश में तो जमात ने बहुत कांड किए हैं. लेकिन 1981 में जमात-ए-इस्लामी हिन्द ने सिमी से दूरी बनानी शुरू की जब सिमी ने यासिर अराफात के खिलाफ प्रदर्शन किया. सिमी वाले अराफात को पश्चिम की कठपुतली मानते थे जबकि जमात-ए-इस्लामी हिन्द वाले अराफात को फिलिस्तीन की लड़ाई का हीरो मानते थे. 1979 की ईरान की इस्लामिक क्रान्ति की वजह से भी दोनों में मतभेद आ गए. सिमी ने ईरान की इस्लामिक क्रान्ति के समर्थन में रैलियां कीं. जमात-ए-इस्लामी हिन्द फिर से अपने पुराने स्टूडेंट विंग स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाईजेशन (SIO) की तरफ मुड़ गया. योगिंदर सिकंद ने सिमी के नेटवर्क पर शोध किया है. वो मुस्लिम छात्रों के जमात-ए-इस्लामी हिन्द (JIH) से जुड़ने के पीछे के कारण बताते हैं. उनके अनुसार 1950 में जमात-ए-इस्लामी हिन्द (JIH) को समझ में आया कि युवा छात्रों के दिमाग में रैडिकल इस्लामिक विचार फैलाने से इस्लामिक स्टेट बनाने में मदद मिलेगी और हमें आगे के लिए नए नेता मिलेंगे. इसके लिए इन्होंने कई यूनिवर्सिटी और कॉलेज में 'हलका' नाम से स्कूल खोले जहां कुरआन और इस्लाम की शिक्षा दी जाती थी. पहली बार इसने उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक स्कूल खोला जहां ग्रेजुएशन के साथ इस्लामिक शिक्षा को जोड़ा गया. उनका मानना था कि देश में एक 'इस्लामिक चेतना' विकसित करना ज़रूरी है. मुस्लिम लड़कों को इस्लाम के प्रसार के लिए ट्रेनिंग दी गयी. बाद में जमात-ए-इस्लामी हिन्द (JIH) ने अपना छात्र संगठन बनाया: स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन (SIO). 1971 तक स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन (SIO) की आंध्र प्रदेश, केरल, बिहार और पश्चिम बंगाल में 40 शाखाएं बन चुकी थीं. जब इनकी गतिविधियां बढ़ने लगीं तब 1975 में कई इस्लामिक ग्रुप अलीगढ़ में मिले. एक ऑल इंडिया कमेटी बनायी गई. तब इमरजेंसी चल रही थी और जमात-ए-इस्लामी हिन्द (JIH) और स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन (SIO) पर बैन लगा था. 1977 में जमात-ए-इस्लामी हिन्द से प्रतिबन्ध हटाया गया और इसी साल इन लोगों ने सिमी बना लिए. पर स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन के होते हुए भी सिमी क्यों बनाया गया? नाम से ही जाहिर होता है स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन एक संगठन था जबकि सिमी को मूवमेंट बना दिया गया. सिमी काफी कट्टर होता गया जबकि स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन उतना कट्टर नहीं था. 29-30 अक्टूबर 1999 को कानपुर में सिमी का सम्मेलन हुआ जिसे 'इखवान सम्मलेन’ कहा गया. इसमें 20,000 से ज्यादा लोग इकट्ठे हुए. सम्मेलन को जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान के हेड क़ाज़ी हुसैन अहमद, हमास के हेड शेख यासीन ने फोन से संबोधित किया. इसके अलावा जेरूसलम की अल-अक्सा मस्जिद के इमाम ने भी संबोधित किया. इसमें कहा गया- 'इस्लाम का गाज़ी, बुतशिकन, मेरा शेर, ओसामा बिन लादेन’. सिमी के पुराने फाइनेंशियल सेक्रेटरी सलीम साजिद ने खुलासा किया था कि हमास से सिमी को बहुत बड़ी फंडिंग होती है. इसके अलावा सऊदी अरब से भी सिमी की फंडिंग होती है. रियाद से वर्ल्ड असेंबली ऑफ़ मुस्लिम यूथ और कुवैत से इंटरनेशनल इस्लामिक फेडरेशन ऑफ़ स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन इसके मुख्य सोर्स हैं. 2005 में सिमी ने 25,000 लोगों को मुंबई में इकठ्ठा किया जिसमें भारत के खिलाफ जिहाद और यहां खिलाफत व्यवस्था स्थापित करवाने की बात की गयी. विश्व के तमाम इस्लामिक संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा (LeT), हरकत-उल-जिहाद-इस्लामी (HUJI), बांग्लादेश का इस्लामिक छात्र शिविर (ICS),पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई (ISI) और कई माफियाओं से सिमी के सम्बन्ध हैं. वो इन संगठनों के लिए नए लड़कों की भर्ती भी करते हैं. अब तक सिमी को कई बार बैन किया जा चुका है. 9/11 के हमले के बाद पहली बार 27 सितम्बर 2001 को टाडा और मकोका के तहत इस पर दो साल का बैन लगाया गया. दूसरा बैन 27 सितम्बर 2003 से 27 सितम्बर 2005 तक लगाया गया. तीसरी बार इस पर 8 फरवरी 2005 को फिर से दो साल का बैन लगा. अगस्त 2008 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सिमी से बैन हटा लिया. फिर से सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2008 से लेकर 7 फरवरी 2010 तक बैन लगाया. बाद में पांचवीं बार 7 फरवरी 2012 को बैन लगाया गया.फिलहाल 2019 तक इस पर बैन लगा हुआ है. कुछ जानकार मानते हैं प्रतिबंधित होने के बाद इन लोगों ने इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) के नाम से काम किया. कुछ जानकारों का मानना है ये दोनों अलग संगठन हैं. सिमी का अपना संविधान भी है जिसके हिसाब से ये संगठन चलता है. इरफ़ान अहमद के मुताबिक़ 30 साल से ऊपर के लोग सिमी में भर्ती नहीं हो सकते थे. सिमी के कैडर में महिलाएं भी हैं जिन्हें इसके सदस्यों की पत्नियां या परिवार के सदस्य संचालित करते हैं. सिमी का असर यूपी, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश में था. 2013 में भी इससे जुड़े सात आतंकी खंडवा जेल से भागे थे. ‘द हिन्दू’ के मुताबिक़ 22 जनवरी 2008 तक अकेले केरल में सिमी के 12 संगठन थे. पुलिस से बचने के लिए अपने संगठन के नाम बदलते रहते हैं. कुछ लोग मानते हैं 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से सिमी और ज्यादा आक्रामक हो गया है. सिमी से भारत को खतरा है. पूरी दुनिया ISIS में अपने लोगों को जाने से रोक रही है. सिमी का प्रभाव भारत के प्रयासों को कमजोर कर देगा. इसलिए इसका बैन रहना बहुत जरूरी है.

ये स्टोरी निशांत ने की है.


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