बिल्ली को जिंदा जलाने, ऊंटनी के पैर काटने वालों को सजा कैसे मिलेगी?
भारत में पशु अधिकारों के कानून क्या कहते हैं?
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राजस्थान में एक ऊंटनी के पैर काटे गए (बाएं). दूसरी तरफ एक बिल्ली को जलाने का वीडियो वायरल है. पिछले कुछ दिनों में जानवरों पर हिंसा के मामले तेजी से सामने आए हैं.
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भारत के लिए कहा जाता है कि यह प्रकृति को पूजने वाला देश है. ऐसा कहने की एक वजह यह भी रही है कि यहां पर जानवरों को भी पूजा जाता रहा है. मान्यताओं के अनुसार, देश में बाघ, हाथी, कुत्ता, बंदर, सांप, मोर, गाय-बैल आदि की पूजा होती रही है. लेकिन यहां पर जानवरों के साथ क्रूरता का भी इतिहास रहा है. राजा-महाराजा शौक के चलते जंगली जानवरों का शिकार करते थे. हालिया समय में भबी जानवरों से क्रूरता के मामले बढ़े हैं. जैसे-
# 27 मई को केरल में एक हथिनी ने विस्फोटक से भरा फल खा लिया था. बाद में हथिनी की मौत हो गई थी. यह फल जंगली सुअरों को मारने के लिए लगाया गया था.
# 6 जून को हिमाचल प्रदेश में एक गर्भवती गाय को विस्फोटक खिलाने का मामला आया. विस्फोटक से गाय का जबड़ा उड़ गया.
# 10 जून को तमिलनाडु में विस्फोटक भरा मांस खिलाकर एक सियार को मार डाला गया.
# 19 जुलाई को राजस्थान के चूरू जिले में कुछ लोगों ने ऊंटनी के पैर काट दिए. बताया जाता है कि ऊंटनी एक खेत में घुस गई थी. इससे नाराज होकर खेत मालिक ने उस पर हमला कर दिया. बाद में ऊंटनी की इलाज के दौरान मौत हो गई.

केरल में मारी गई हथिनी कुछ दिनों तक पानी में खड़ी रही थी. बाद में यहीं उसकी मौत हो गई थी
बिल्ली को जिंदा जलाने का वीडियो वायरल
अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो आया है. यह वीडियो एक बिल्ली को जिंदा जलाने का है. वीडियो में दिख रहा है कि बिल्ली को एक आदमी ने लाइटर से जलाया. ह्यूमन सोसायटी इंटरनेशनल ने यह वीडियो पोस्ट किया है. उसने लोगों से आरोपी को पकड़ने में मदद मांगी है. जानकारी देने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम देने का ऐलान भी किया गया है. यह वीडियो कुछ-कुछ एनिमल क्रश वीडियो जैसा है.
एनिमल क्रश वीडियो क्या है
एनिमल क्रश वीडियो जानवरों को टॉर्चर करने के वीडियो होते हैं. इनमें छोटे जानवरों को निर्ममता से मारा, जलाया, कुचला या काटा जाता है. यह सब पैसों के लिए किया जाता है. इंटरनेट पर इस तरह के ढेरों वीडियो पड़े हैं. फिलीपींस, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे कई देशों में इस तरह के वीडियो का एक बड़ा मार्केट है, जहां पैसे देकर जानवरों को टॉर्चर करने के वीडियो बनाए और बनवाए जाते हैं. हालांकि पुलिस इन पर कार्रवाई भी करती है. लेकिन चोरी-छुपे यह क्रूरता जारी है.

पिल्ले को कुचलने वाले वीडियो का एक दृश्य.
दिल्ली में तीस हजारी कोर्ट में कार्यरत वकील अभिषेक असवाल ने बताया कि भारत में जानवरों के प्रति अत्याचार रोकने के लिए दो तरह के कानून हैं. एक, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए एक्ट), 1960. यह किसी भी जानवर पर अत्याचार और यातना को रोकने के लिए बनाया गया है. पीसीए एक्ट में जानवरों को रखने, उनके खाने-पीने, उन्हें लाने-ले जाने, उनसे काम लेने के बारे में साफ लिखा है.
दूसरा, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972. यह जंगली जीवों को सुरक्षा देता है. साथ ही सर्कस, चिड़ियाघर के जानवरों के लिए भी यही कानून लागू होता है. इनके अलावा जानवरों के लिए राज्यवार अलग-अलग कानून होते हैं. भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 जानवरों पर अत्याचार करने वालों के लिए सजा का प्रावधान करती है. इनमें दो से पांच साल की सजा और जुर्माने की व्यवस्था है.
रिपोर्ट कैसे कर सकते हैं?
जानवरों पर अत्याचार के मामलों की रिपोर्ट पुलिस में कर सकते हैं. इसके अलावा जानवरों के लिए काम करने वाली संस्थाओं जैसे- पीपल फॉर दी इथिकल ट्रीटमेंट्स ऑफ एनिमल (पेटा), पीपल फॉर एनिमल की मदद भी ले सकते हैं.
जानवरों से क्रूरता करने पर किस तरह की सजाएं हैं?
इस बारे में अभिषेक असवाल ने बताया-
जंगली जानवरों से बुरे बर्ताव या उनके शिकार के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत दंड का प्रावधान है. इस कानून के तहत, पहली बार अपराध पर 3 से 7 साल की जेल की सज़ा के साथ 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.

पालतू या जंगली जानवर की क्या परिभाषा है?
पीसीए एक्ट के अनुसार, ऐसे जानवर जो मनुष्यों के हिसाब से ढल गए हैं और उनसे साथ आराम से रह सकते हैं, वे पालतू जानवर कहे जाते हैं. जैसे- कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, गाय-भैंस, बकरी आदि. इनके उलट जो जानवर आते हैं, वे जंगली जानवर कहलाते हैं. जैसे- शेर, बाघ, सियार आदि. हालांकि हाथी जंगली जानवर ही है और वन्यजीव अधिनियम के तहत इसे पकड़ना मना है. लेकिन फिर भी हाथियों को पर्यटकों को ले जाने या शादी-ब्याह के काम में लिया जाता है.
पालतू जानवरों के लिए मालिकों के क्या नियम है?
पीसीए एक्ट के सेक्शन 3 में पालतू जानवरों के लिए नियम लिखे हैं. इसके तहत,
# जानवर को ठीक रखने का जिम्मा उसके मालिक का होगा. साथ ही उसे किसी तरह की पीड़ा और यातना से बचाने का काम भी उसी का होगा.
# जानवर को पर्याप्त खाना-पानी देना, सही से रखना भी इसमें शामिल है.
# साथ ही सेक्शन 11 के तहत पालतू जानवर के रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. अगर जानवर पिंजरे में रहता है, तो वह साइज में बड़ा होना चाहिए. उसमें इतनी जगह होना अनिवार्य है कि जानवर आसानी से घूम सकें और मुड़ सके.
# किसी पालतू जानवर को घर से बाहर छोड़ देना अपराध है.
# वहीं पालतू जानवरों को बेचने वाली दुकानों का संबंधित राज्य के पशु कल्याण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है.

पालतू जानवर रखना जिम्मेदारी का काम है.
क्रूरता के खिलाफ कानून हैं, तो फिर बकरे, मुर्गी, मछली को कैसे खा सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट के वकील अनस तनवीर ने बताया कि संविधान का आर्टिकल 21 जीने का अधिकार देते हैं. इसमें पसंद के अनुसार खाने की स्वतंत्रता भी मिलती है. ऐसे में पीसीए एक्ट की धारा 3 में भी भोजन के लिए जानवर को मारे जाने की छूट है. लेकिन यह भी लिखा है कि जानवर को इस दौरान टॉर्चर न किया जाए.
पेटा के अनुसार, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशंस, 2011 के तहत उन जानवरों का जिक्र है, जिन्हें मांस के लिए काटा जा सकता है. इसी में बकरे, भेड़, मुर्गी, मछली, भैंस शामिल हैं. लेकिन इन जानवरों को भी मांस के अलावा किसी और वजह से मारा नहीं जा सकता.
राज्यों के हिसाब से मांस के लिए काटे जाने वालों जानवरों की अलग-अलग लिस्ट है. जैसे देश के अधिकांश राज्यों में गाय काटने पर बैन है. लेकिन केरल, गोवा, समेत उत्तर-पूर्व के राज्यों में गोमांस पर बैन नहीं है. इसी तरह उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों में कुत्ते का मांस भी खाया जाता है.
क्या जानवरों को मांस के लिए काटने के भी नियम है?
हां. यह नियम स्लॉटरहाउस रुल्स, 2001 के तहत दर्ज हैं. इसके तहत,
# मांस के लिए सरकारी मान्यता प्राप्त बूचड़खानों में ही जानवर को काटा जा सकता है. ये बूचड़खाने रिहायशी इलाकों से बाहर होने चाहिए.
# बीमार और गर्भधारण कर चुके पशु को नहीं मारा जा सकता है.
# बूचड़खानों में काटे जाने से पहले पशु चिकित्सक से जानवर की जांच करानी होती है.
# जानवरों को पर्याप्त आराम दिया जाना चाहिए.
# पशु को काटे जाने के दौरान यातना नहीं दी जा सकती है.
# एक पशु के सामने दूसरे पशु को नहीं काट सकते.

क्या धार्मिक बलि के लिए जानवरों को मारा जा सकता है?
पीसीए एक्ट में धार्मिक बलि को अपराध नहीं माना गया है. लेकिन राज्य अपने हिसाब से जानवरों को बलि पर फैसला लेते हैं. कई राज्यों में धार्मिक बलि पर रोक है तो कई जगह ऐसा नहीं है. हालांकि ज्यादातर राज्यों में भोजन के लिए पशू बलि पर रोक नहीं है. लेकिन इस दौरान जानवर को टॉर्चर न करने की शर्ते लागू होती हैं.
कम सजा से कैसे रुकेंगे जानवरों पर अत्याचार?
पेटा इंडिया के सीईओ डॉ. मणिलाल पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की सजाओं पर सवाल उठाते हैं. उनका कहना है,
यह कानून 1960 में बना तब से अब तक इसकी सजाएं नहीं बदली गई. उस समय 50 रुपये का जुर्मान बड़ी बात थी. लेकिन आज यह कुछ भी नहीं है. इस वजह से लोगों में डर ही नहीं है. कोई पकड़ा भी जाता है तो 50 रुपये जुर्मान देकर बच जाता है.
वे कहते हैं कि आईपीसी की धारा 428, 429 लगाने पर जरूर केस मजबूत बनता है. लेकिन इसके लिए पुलिस पर जोर डालना पड़ता है. सरकार से लगातार सजा बढ़ाने को कहा जा रहा है लेकिन ध्यान ही नहीं दिया जा रहा.
Video: लाइसेंसी बंदूक खरीदने का तरीका और नियम क्या हैं?
# 27 मई को केरल में एक हथिनी ने विस्फोटक से भरा फल खा लिया था. बाद में हथिनी की मौत हो गई थी. यह फल जंगली सुअरों को मारने के लिए लगाया गया था.
# 6 जून को हिमाचल प्रदेश में एक गर्भवती गाय को विस्फोटक खिलाने का मामला आया. विस्फोटक से गाय का जबड़ा उड़ गया.
# 10 जून को तमिलनाडु में विस्फोटक भरा मांस खिलाकर एक सियार को मार डाला गया.
# 19 जुलाई को राजस्थान के चूरू जिले में कुछ लोगों ने ऊंटनी के पैर काट दिए. बताया जाता है कि ऊंटनी एक खेत में घुस गई थी. इससे नाराज होकर खेत मालिक ने उस पर हमला कर दिया. बाद में ऊंटनी की इलाज के दौरान मौत हो गई.

केरल में मारी गई हथिनी कुछ दिनों तक पानी में खड़ी रही थी. बाद में यहीं उसकी मौत हो गई थी
बिल्ली को जिंदा जलाने का वीडियो वायरल
अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो आया है. यह वीडियो एक बिल्ली को जिंदा जलाने का है. वीडियो में दिख रहा है कि बिल्ली को एक आदमी ने लाइटर से जलाया. ह्यूमन सोसायटी इंटरनेशनल ने यह वीडियो पोस्ट किया है. उसने लोगों से आरोपी को पकड़ने में मदद मांगी है. जानकारी देने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम देने का ऐलान भी किया गया है. यह वीडियो कुछ-कुछ एनिमल क्रश वीडियो जैसा है.
एनिमल क्रश वीडियो क्या है
एनिमल क्रश वीडियो जानवरों को टॉर्चर करने के वीडियो होते हैं. इनमें छोटे जानवरों को निर्ममता से मारा, जलाया, कुचला या काटा जाता है. यह सब पैसों के लिए किया जाता है. इंटरनेट पर इस तरह के ढेरों वीडियो पड़े हैं. फिलीपींस, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे कई देशों में इस तरह के वीडियो का एक बड़ा मार्केट है, जहां पैसे देकर जानवरों को टॉर्चर करने के वीडियो बनाए और बनवाए जाते हैं. हालांकि पुलिस इन पर कार्रवाई भी करती है. लेकिन चोरी-छुपे यह क्रूरता जारी है.

पिल्ले को कुचलने वाले वीडियो का एक दृश्य.
अब बात भारत में जानवरों से जुड़े कानूनों की.
जानवरों के अधिकारों के लिए कौनसे कानून हैं?दिल्ली में तीस हजारी कोर्ट में कार्यरत वकील अभिषेक असवाल ने बताया कि भारत में जानवरों के प्रति अत्याचार रोकने के लिए दो तरह के कानून हैं. एक, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए एक्ट), 1960. यह किसी भी जानवर पर अत्याचार और यातना को रोकने के लिए बनाया गया है. पीसीए एक्ट में जानवरों को रखने, उनके खाने-पीने, उन्हें लाने-ले जाने, उनसे काम लेने के बारे में साफ लिखा है.
दूसरा, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972. यह जंगली जीवों को सुरक्षा देता है. साथ ही सर्कस, चिड़ियाघर के जानवरों के लिए भी यही कानून लागू होता है. इनके अलावा जानवरों के लिए राज्यवार अलग-अलग कानून होते हैं. भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 जानवरों पर अत्याचार करने वालों के लिए सजा का प्रावधान करती है. इनमें दो से पांच साल की सजा और जुर्माने की व्यवस्था है.
रिपोर्ट कैसे कर सकते हैं?
जानवरों पर अत्याचार के मामलों की रिपोर्ट पुलिस में कर सकते हैं. इसके अलावा जानवरों के लिए काम करने वाली संस्थाओं जैसे- पीपल फॉर दी इथिकल ट्रीटमेंट्स ऑफ एनिमल (पेटा), पीपल फॉर एनिमल की मदद भी ले सकते हैं.
जानवरों से क्रूरता करने पर किस तरह की सजाएं हैं?
इस बारे में अभिषेक असवाल ने बताया-
पीसीए एक्ट के सेक्शन 11 में जानवरों के अत्याचारों से जुड़े सभी अपराधों के बारे में लिखा है. इनमें किसी पशु को मारने, जहर देने, अपंग करने और पशुओं की लड़ाई करने जैसे अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं. इनमें पुलिस आरोपी को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है. वहीं जानवर को घर से निकालने, भूखा रखने जैसे अपराध में आरोपी को वॉरंट के तहत ही गिरफ्तार किया जाता है. लेकिन पीसीए एक्ट के तहत बहुत कम सजा है.इस कानून के तहत पहली बार अपराध करने वालों को केवल 50 रुपये का जुर्माना भरना पड़ता है और गंभीर मामलों में तीन महीने की सजा हो सकती है. हालांकि गंभीर अपराधों में आईपीसी की धारा 428, 429 लगती है. ऐसा होने पर पांच साल तक की जेल हो सकती है.
जंगली जानवरों से बुरे बर्ताव या उनके शिकार के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत दंड का प्रावधान है. इस कानून के तहत, पहली बार अपराध पर 3 से 7 साल की जेल की सज़ा के साथ 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.

पालतू या जंगली जानवर की क्या परिभाषा है?
पीसीए एक्ट के अनुसार, ऐसे जानवर जो मनुष्यों के हिसाब से ढल गए हैं और उनसे साथ आराम से रह सकते हैं, वे पालतू जानवर कहे जाते हैं. जैसे- कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, गाय-भैंस, बकरी आदि. इनके उलट जो जानवर आते हैं, वे जंगली जानवर कहलाते हैं. जैसे- शेर, बाघ, सियार आदि. हालांकि हाथी जंगली जानवर ही है और वन्यजीव अधिनियम के तहत इसे पकड़ना मना है. लेकिन फिर भी हाथियों को पर्यटकों को ले जाने या शादी-ब्याह के काम में लिया जाता है.
पालतू जानवरों के लिए मालिकों के क्या नियम है?
पीसीए एक्ट के सेक्शन 3 में पालतू जानवरों के लिए नियम लिखे हैं. इसके तहत,
# जानवर को ठीक रखने का जिम्मा उसके मालिक का होगा. साथ ही उसे किसी तरह की पीड़ा और यातना से बचाने का काम भी उसी का होगा.
# जानवर को पर्याप्त खाना-पानी देना, सही से रखना भी इसमें शामिल है.
# साथ ही सेक्शन 11 के तहत पालतू जानवर के रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. अगर जानवर पिंजरे में रहता है, तो वह साइज में बड़ा होना चाहिए. उसमें इतनी जगह होना अनिवार्य है कि जानवर आसानी से घूम सकें और मुड़ सके.
# किसी पालतू जानवर को घर से बाहर छोड़ देना अपराध है.
# वहीं पालतू जानवरों को बेचने वाली दुकानों का संबंधित राज्य के पशु कल्याण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है.

पालतू जानवर रखना जिम्मेदारी का काम है.
क्रूरता के खिलाफ कानून हैं, तो फिर बकरे, मुर्गी, मछली को कैसे खा सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट के वकील अनस तनवीर ने बताया कि संविधान का आर्टिकल 21 जीने का अधिकार देते हैं. इसमें पसंद के अनुसार खाने की स्वतंत्रता भी मिलती है. ऐसे में पीसीए एक्ट की धारा 3 में भी भोजन के लिए जानवर को मारे जाने की छूट है. लेकिन यह भी लिखा है कि जानवर को इस दौरान टॉर्चर न किया जाए.
पेटा के अनुसार, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशंस, 2011 के तहत उन जानवरों का जिक्र है, जिन्हें मांस के लिए काटा जा सकता है. इसी में बकरे, भेड़, मुर्गी, मछली, भैंस शामिल हैं. लेकिन इन जानवरों को भी मांस के अलावा किसी और वजह से मारा नहीं जा सकता.
राज्यों के हिसाब से मांस के लिए काटे जाने वालों जानवरों की अलग-अलग लिस्ट है. जैसे देश के अधिकांश राज्यों में गाय काटने पर बैन है. लेकिन केरल, गोवा, समेत उत्तर-पूर्व के राज्यों में गोमांस पर बैन नहीं है. इसी तरह उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों में कुत्ते का मांस भी खाया जाता है.
क्या जानवरों को मांस के लिए काटने के भी नियम है?
हां. यह नियम स्लॉटरहाउस रुल्स, 2001 के तहत दर्ज हैं. इसके तहत,
# मांस के लिए सरकारी मान्यता प्राप्त बूचड़खानों में ही जानवर को काटा जा सकता है. ये बूचड़खाने रिहायशी इलाकों से बाहर होने चाहिए.
# बीमार और गर्भधारण कर चुके पशु को नहीं मारा जा सकता है.
# बूचड़खानों में काटे जाने से पहले पशु चिकित्सक से जानवर की जांच करानी होती है.
# जानवरों को पर्याप्त आराम दिया जाना चाहिए.
# पशु को काटे जाने के दौरान यातना नहीं दी जा सकती है.
# एक पशु के सामने दूसरे पशु को नहीं काट सकते.

क्या धार्मिक बलि के लिए जानवरों को मारा जा सकता है?
पीसीए एक्ट में धार्मिक बलि को अपराध नहीं माना गया है. लेकिन राज्य अपने हिसाब से जानवरों को बलि पर फैसला लेते हैं. कई राज्यों में धार्मिक बलि पर रोक है तो कई जगह ऐसा नहीं है. हालांकि ज्यादातर राज्यों में भोजन के लिए पशू बलि पर रोक नहीं है. लेकिन इस दौरान जानवर को टॉर्चर न करने की शर्ते लागू होती हैं.
कम सजा से कैसे रुकेंगे जानवरों पर अत्याचार?
पेटा इंडिया के सीईओ डॉ. मणिलाल पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की सजाओं पर सवाल उठाते हैं. उनका कहना है,
यह कानून 1960 में बना तब से अब तक इसकी सजाएं नहीं बदली गई. उस समय 50 रुपये का जुर्मान बड़ी बात थी. लेकिन आज यह कुछ भी नहीं है. इस वजह से लोगों में डर ही नहीं है. कोई पकड़ा भी जाता है तो 50 रुपये जुर्मान देकर बच जाता है.
वे कहते हैं कि आईपीसी की धारा 428, 429 लगाने पर जरूर केस मजबूत बनता है. लेकिन इसके लिए पुलिस पर जोर डालना पड़ता है. सरकार से लगातार सजा बढ़ाने को कहा जा रहा है लेकिन ध्यान ही नहीं दिया जा रहा.
Video: लाइसेंसी बंदूक खरीदने का तरीका और नियम क्या हैं?

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