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लाल किले पर किसान प्रदर्शनकारी ने किया था तिरंगे का अपमान, इतनी सजा हो सकती है?

'निशान साहिब' फहराने के जोश में की गई ये गलती भारी पड़ सकती है.

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28 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 29 जनवरी 2021, 07:14 AM IST)
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झंडे का अपमान करना झंडा संहिता 2007 के हिसाब से कानूनी जुर्म है. इसके लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान है. (फोटो-पीटीआई)
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26 जनवरी को लालकिले से काफी निराशाजनक तस्वीरें सामने आईं. किसानों की ट्रैक्टर रैली पटरी से उतर गई और लोग लालकिला पहुंच गए. कुछ लोग लाल किले की उस जगह पर पहुंच गए जहां पर खास मौकों पर झंडा फहराया जाता है. लालकिले में दो जगह पर झंडे लगे होते हैं. एक ऊपर की प्राचीर पर और दूसरा एक ऊंचे पोल पर. 26 जनवरी के हंगामे के बीच ऐसी तस्वीरें सामने आईं कि पोल पर 'निशान साहिब' लहराने वाले ने तिरंगे झंडे को फेंका है. इस तरह से उसने राष्ट्रीय झंडे का अपमान किया है. भारत में मुख्य रूप से तीन चीजों को राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ कर देखा जाता है. भारत का तिरंगा झंडा, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय चिन्ह. क्या है किसी भी राष्ट्रीय चिन्ह के अपमान की सजा, आइए जानते हैं. सबसे पहले तिरंगे झंडे के बारे में जानिए चूंकि अभी तिरंगे को फेंकने को लेकर विवाद हो रहा है इसलिए सबसे पहले झंडे की ही बात करते हैं. तिरंगे के बारे में पूरी जानकारी भारतीय ध्वज संहिता यानि फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 से मिलती है. इसके तीन भाग हैं. पहला भाग, झंडे के बारे में सामान्य जानकारी देता है. जैसे किस रंग का होना चाहिए, साइज क्या होना चाहिए आदि. दूसरे भाग में झंडे को आम जनता, प्राइवेट संस्थान और स्कूल आदि कैसे इस्तेमाल करेंगे, इसके बारे में जानकारी है. तीसरा भाग सरकारों और उनसे जुड़ी एजेंसियों द्वारा झंडे के इस्तेमाल के नियम कायदे बताता है. चूंकि हम सिर्फ तिरंगे का अपमान करने की बात पर चर्चा कर रहे हैं ऐसे में इसकी सजा के प्रावधान बारे में जनाना जरूरी है. तिरंगा फहराने का सही तरीका क्या है? राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर फ्लैग कोड ऑफ इंडिया में बहुत तफ्सील से नियम बताए गए हैं लेकिन हम यहां पर आपको कुछ सामान्य नियम बता रहे हैं, जिससे आप तिरंगे को कायदे से फहरा सकें.
# यदि खुले में झंडा फहराया जा रहा है तो हमेशा सूरज उगने पर फहराया जाना चाहिए और सूरज ढलने से पहले पर उतार देना चाहिए.
# झंडे झुका हुआ नहीं होना चाहिए.
# झंडे का रंग-रूप नहीं बदला जा सकता, न ही इसे उल्टा लगाया या फहराया जा सकता है.
# झंडे पर कुछ लिखा भी नहीं जा सकता.
# संहिता में यह भी बताया गया है कि इसे लंबे रूप में लटकाया नहीं जा सकता. झंडे को 90 डिग्री में घुमाया भी नहीं जा सकता.
# झंडे को बुरी और गंदी स्थिति में न फहराया जाए. यही नियम झंडे के खंभे और रस्सियों पर भी लागू होता है.
# जान-बूझकर झंडे को जमीन छूने देना या पानी में सराबोर होने देना भी दंडनीय अपराध माना जाता है. तिरंगे के अपमान पर सजा कितनी है? प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टु नेशनल ऑनर ऐक्ट 1971 के तहत राष्ट्रीय झंडे और संविधान का अपमान करना दंडनीय अपराध है. ऐसा करने वाले को 3 साल तक की जेल या फिर जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है. इसी तरह,
राष्ट्रगान को जानबूझकर रोकने या फिर राष्ट्रगान गाने के लिए जमा हुए लोगों के लिए बाधा खड़ी करने पर अधिकतम 3 साल की सजा दी जा सकती है. इसके साथ जुर्माना भरने का भी आदेश दिया जा सकता है.
लाल किले पर निशान साहिब लहराते वक्त तिरंगे को फेंकने की हरकत पर दिल्ली पुलिस ने भी एफआईआर में झंडे के अपमान से जुड़ी धारा लगाई है. दिल्ली पुलिस ने प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टु नेशनल ऑनर ऐक्ट 1971 को झंडा फेंकने के लिए एफआईआर में जोड़ा है. अगर मामला सिद्ध होता है तो इसके तहत भी आरोपी को सजा दी जाएगी.
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भारत का तिरंगा फहराने के नियम कायदे भी हैं. इन्हें जरूर जानें.
राष्ट्रगान का सम्मान भी है जरूरी जनगणमन अधिनायक जय हे... हमारा राष्ट्रगान है. सभी देशवासियों से उम्मीद की जाती है वह इस राष्ट्रगान का सम्मान करे. आप शायद अभी वह छण भूले नहीं होंगे जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी और निर्णायक टेस्ट मैच खेलने भारतीय टीम गाबा के मैदान पर उतरी थी. राष्ट्रगान बजने के साथ ही क्रिकेटर मोहम्मद सिराज की आंखों से आंसू निकलने लगे. एक धुन के बजते ही अपनी पहचान का इससे खूबसूरत जज्बा क्या हो सकता है. हर देशवासी की पहचान के साथ उसका राष्ट्रगान जुड़ा हुआ है. हालांकि इसे गाने और बजाने के नियम-कायदे भी तय हैं.
राष्ट्रगान के लिए नियम-कायदे 1971 के “प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट” में बताए गए हैं. नियम-कायदे जानने से पहले एक किस्सा सुनिए.
सन 1986 में केरल के एक स्कूल में जब राष्ट्रगान बजा तो बाकी बच्चों ने इसे गाया लेकिन तीन बच्चों ने ऐसा नहीं किया. ऐसा करने के आरोप में उन तीन बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया. भले ही इन बच्चों ने राष्ट्रगान नहीं गाया था लेकिन बच्चे इस दौरान खड़े जरूर हुए थे. मामला प्रिसिंपल के पास पहुंचा और बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने इन बच्चों को वापस स्कूल में वापस लेने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा
यदि कोई राष्ट्रगान के समय सम्मानपूर्वक खड़ा है और वह गा नहीं रहा है तब भी यह अपमान की श्रेणी में नहीं आता है.
मतलब यह कि सम्मान देने का तरीका जरूरी नहीं कि एक जैसा ही हो. हर शख्स का सम्मान देने का तरीका अलग हो सकता है. ऐसे में सजा का फैसला आरोपी की मंशा से ही होगा न कि सिर्फ लिखे हुए नियम से. अब बात नियम की-
राष्ट्रगान के सम्मान में कुछ बेसिक नियम बनाए गए हैं. इनमें शामिल हैं
# जब राष्ट्रगान गाया या बजाया जा रहा हो तब हमेशा सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए.
# राष्ट्रगान का उच्चारण सही होना चाहिए और इसे 52 सेकेंड की अवधि में ही पूरा किया जाए. इसको छोटे रूप में तय करने की अवधि 20 सेकेंड की है.
# अगर कोई राष्ट्रगान गा रहा है तो उसे परेशान नहीं करना चाहिए. राष्ट्रगान गाते वक्त अशांति, शोर-गुल या दूसरे गाने और संगीत की आवाज नहीं होनी चाहिए.
# राष्ट्रगान के लिए कभी भी अशोभनीय शब्दों का उपयोग नहीं किया जा सकता.
1971 के “प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट” के सेक्शन 3 के मुताबिक, जानबूझ कर किसी को राष्ट्रगान गाने से रोकने या गा रहे समूह को बाधा पहुंचाने पर तीन साल तक की कैद की सजा हो सकती है या जुर्माना भरना पड़ सकता है. दोनों सजाएं एक साथ भी दी जा सकती हैं.
National Anthem Team India 1200
Sydney Test में National Anthem के दौरान भावुक हुए Mohammed Siraj (एपी फोटो)
राष्ट्रीय चिन्ह मतलब देश की पहचान हर देश ने अपनी पहचान के लिए एक खास चिन्ह को निर्धारित किया है. भारत भी राष्ट्रीय चिन्ह के तौर पर अशोक स्तंभ के शीर्ष को अपनाया है. इसमें तीन सिंह दिखाई पड़ते हैं. मूल आकृति में स्तम्भ के चार सिंह एक दूसरे की ओर पीठ किए हुए खड़े हैं. इसके नीचे की पट्टी के बीच में उभरी नक्काशी में चक्र है. इसके दायीं ओर एक-एक बैल और बायीं ओर एक घोड़ा है. नीचे देवनागरी लिपि में ‘सत्यमेव जयते’ लिखा हुआ है. यह वचन मुंडकोपनिषद से लिया गया है.
ये तो हुई इसकी बनावट की बात. अब बात इसके मान-सम्मान से जुड़े नियम-कायदों की. राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न अशोक स्तंभ को अधूरा व बेढंगे तरीके में छापना, प्रदर्शित करना और लगाना कानून के तहत अपराध है. राष्ट्रीय चिन्ह के उपयोग की जगह तय है इसके अलावा इसे दूसरी जगह पर नहीं लगाया जा सकता. संवैधानिक पदों के लिए इसका उपयोग होता है. इसके लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने अलग से परिपत्र भी सभी राज्यों को जारी किया जाता है. कौन लगा सकता है अशोक की लाट का निशान भारत में उंचे संवैधानिक पदों पर बैठे लोग और सरकारी आदेशों पर ही अशोक की लाट का खास चिन्ह लगाया जा सकता है. इसे कहां और कौन लगा सकता है इसके बारे में विस्तृत जानकारी भारत का राज्य संप्रतीक (अनुचित प्रयोग निषेध) अधिनियम 2005 में दी गई है. इसके अनुसार
राष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति
राज्य का राज्यपाल
संघ राज्य क्षेत्र का उप राज्यपाल
विदेशी राज्यों के प्रमुख अतिथि
विदेशी राज्यों के अतिथि उपराष्ट्रपति या समतुल्य स्टेटस वाले उच्चाधिकारी
विदेशी सरकारों के प्रमुख अतिथि या समतुल्य स्टेटस वाले उच्चाधिकारी
 
ये व्यक्ति भारत में कहीं भी यात्रा कर रहे हों तो वे अशोक चिन्ह का उपयोग अपनी गाड़ी पर कर सकते हैं.
प्रधानमन्त्री
कैबिनेट मंत्री
लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
राज्य सभा के उपसभापति
 
अपनी कारों पर अशोक चिन्ह का प्रयोग केवल अपने राज्य क्षेत्र के भीतर ही कर सकते हैं.
भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश और अन्य न्यायधीश
उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायधीश और अन्य न्यायधीश
राज्यों के कैबिनेट मंत्री
राज्यों के राज्य मंत्री
विधान सभाओं के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
राज्य विधान सभाओं के सभापति और उप सभापति
दिल्ली और पुदुचेरी विधान सभाओं के मंत्री और इनकी विधानसभाओं के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
National Emblem President Car
भारत के राष्ट्रपति अपनी कार के नंबर प्लेट पर अशोक की लाट का निशान लगा सकते हैं. इस तरह की प्लेट आम इंसान नहीं लगा सकता.
इसको लगाने के भी हैं सख्त नियम-कायदे केंद्र सरकार ने 2005 में राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न के लिए स्टेट एंबलेम (अनुचित प्रयोग निषेध) अधिनियम 2005 जारी किया था. इसके क्रियान्वयन के लिए स्टेट एंबलेम नियम 2007 जारी हुए थे. इन नियमों में नेशनल एंबलेम अशोक स्तंभ को इस्तेमाल करने के तरीके के बारे में बताया गया है. यह भी बताया गया है कि कौन इसका उपयोग कर सकता है.
इसका दुरुपयोग करने वाले को 2 साल तक कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है.
एक बात याद रखें कि देश का सम्मान करना न सिर्फ हमारा फर्ज है बल्कि हमारी पहचान का भी हिस्सा है. आपकी पहचान भी आपके देश से जुड़ी हुई है. कभी अपनी पहचान से जुड़े डॉक्यूमेंट्स पर नजर डालिए, हर तरफ देश के ये निशान नजर आएंगे.

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