क्या है 'निशान साहिब' की कहानी, जिसे फहराने के लिए किसान लाल किले के ऊपर चढ़ गए
भारतीय फौज से इस झंडे का क्या संबंध है?
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लाल किले पर 26 जनवरी को प्रदर्शनकारियों ने निशान साहिब फहरा दिया. पीछे एक पोल पर तिरंगा लहराता भी नजर आया. (तस्वीर: पीटीआई)
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26 जनवरी 2021 को भारत ने 72वां गणतंत्र दिवस मनाया. इसी दिन नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकली. इस दौरान कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. भीड़ में एक वर्ग काफ़ी आक्रामक दिखा. तोड़फोड़ की गई. पुलिसवालों को पीटा गया. यहां तक कि लाल किले की प्राचीर से झंडा फहरा दिया गया. इस झंडे को सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने खालिस्तान का झंडा बताया. लेकिन असल में ऐसा नहीं था. वह झंडा खालिस्तान का नहीं, निशान साहिब का है. आइए इसी निशान साहिब की कहानी आपको बताते हैं.
पहले लाल किले का वो नजारा एक बार फिर देख लीजिए, जब पोल पर चढ़कर निशान साहिब फहराया गया. कई लोगों ने आरोप लगाया कि लाल किले पर तिरंगे को हटाकर निशान साहिब फहराया गया. लेकिन यह सच नहीं है. प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे को लाल किले से नहीं हटाया था. खाली पोल पर ये झंडा फहराया था. इसके बाद कुछ लोगों ने राष्ट्रगान भी गाया था. हालांकि पुलिस ने कुछ देर बाद ही इस झंडे को लाल किले से हटा दिया था.
हालांकि सोशल मीडिया पर कई लोग इस बात से भी नाराज़ थे कि लाल किले पर निशान साहिब को क्यों फहराया गया. वहां सिर्फ तिरंगा ही फहराना चाहिए था. निशान साहिब निशान साहिब माने ऊंची पताका या ऊंचा झंडा. इसे सिख धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है. इसे सिखों का धार्मिक झंडा कहा जा सकता है. हर गुरुद्वारे और सिखों के धार्मिक आयोजनों में निशान साहिब दिखाई देता है. गुरुद्वारों के प्रांगण में ऊंचाई पर इसे फहराया जाता है. हर साल बैसाखी के मौके पर पुराने झंडे को गुरुद्वारों से उतारकर नया निशान साहिब फहराया जाता है. यह तिकोना झंडा होता है. यह झंडा सामान्य तौर पर कपास या रेशम के कपड़े से बना होता है. इसके सिरे पर रेशम की एक लटकन होती है. झंडे के रंग निशान साहिब या खालसा पंथ का झंडा आमतौर पर केसरिया रंग का होता है. निहंगों के गुरुद्वारों में इसका रंग नीला होता है. इतिहास में इस झंडे का रंग लाल और सफ़ेद रहा है. लेकिन मौजूदा वक्त में केसरिया झंडा ही प्रमुखता से फहराया जाता है. माना जाता है कि 1609 में पहली बार गुरु हरगोबिंदजी ने अकाल तख़्त पर केसरिया निशान साहिब फहराया था. धार्मिक चिन्ह इस झंडे के केंद्र में ☬ (खंडा) का चिन्ह होता है. इस खंडे में तीन चिन्ह होते हैं. सिख धर्म में इसके भी अपने मतलब होते हैं. जैसे- *निशान साहिब के केंद्र में दोधारी तलवार होती है. इसको लेकर मान्यता ये है कि यह अच्छाई को बुराई से अलग करती है. *खंडे के बीच में एक चक्र होता है जिसे ईश्वर का प्रतीक माना जाता है. *दोनों छोर पर एकधारी तलवार होती है, जिसे आध्यात्मिक और राजनीतिक संप्रभुता का प्रतीक माना जाता है. फौज़ में निशान साहिब भारतीय फौज़ में एक रेजीमेंट है, सिख रेजीमेंट. इस रेजीमेंट के हरेक गुरुद्वारे में निशान साहिब फहराया जाता है. रेजिमेंट के जवान और अफसर इसका बेहद सम्मान करते हैं. सिख रेजिमेंट और सिख लाइट इन्फेंट्री का वॉर क्राई है- 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल'. सिख रेजिमेंट का आदर्श वाक्य है- 'निश्चय कर अपनी जीत करूं. इस पंक्ति को गुरु गोविन्द सिंह के एक स्त्रोत से लिया गया है. बताया जाता है कि प्रदर्शनकारियों ने जब लाल किले पर निशान साहिब फहराया था, तब भी 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के नारे लगाए गए थे. ट्रैक्टर रैली के दौरान भी कई जगह ये गूंजा था. इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में पंजाब की झांकी भी थी. इस झांकी में भी निशान साहिब नजर आया. इसका वीडियो आप यहां क्लिक करके देख सकते हैं.#WATCH A protestor hoists a flag from the ramparts of the Red Fort in Delhi#FarmLaws #RepublicDay pic.twitter.com/Mn6oeGLrxJ
— ANI (@ANI) January 26, 2021

