ये इंटरिम डिविडेंड क्या होता है, जिसके नाम पर सरकार फिर RBI से पैसे मांग रही है?
सरकार पहले भी RBI के दरवाज़े पर पहुंच चुकी है.
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ये लगातार तीसरा साल है जब सरकार ने RBI से इंटरिम डिवडेंड मांगा है. फोटो: India Today
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हीरालाल एंड संस का होटल है. खूब चलता है. हीरालाल का मन हुआ कि होटल का बिजनेस और बढ़ाया जाए. इसके लिए उन्होंने तीन लोगों से कहा कि आप भी हमारे होटल में पैसा लगाइए. तीनों को भरोसा दिया कि बिजनेस में अगर प्रॉफिट हुआ तो आपको उसका भी एक हिस्सा दिया जाएगा. यही प्रॉफिट का हिस्सा बैंकिंग के टर्म में डिविडेंड कहलाता है. हिंदी में इसे लाभांश कहते हैं. लाभ का एक अंश.केंद्र सरकार एक बार फिर रिज़र्व बैंक (RBI) के दरवाज़े पर है. 10 हज़ार करोड़ रुपए इंटरिम डिविडेंड या अंतरिम लाभांश के तौर पर मांगे हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बजट 2020 से पहले सरकार वित्तीय वर्ष 2019-20 में टैक्स वसूली के टारगेट से पीछे रह गई है. मतलब राजघोषीय घाटा बढ़ा हुआ है. हालांकि अभी RBI को इस पर मुहर लगानी है और 15 फरवरी को बैंक की सेंट्रल बोर्ड की बैठक में इस पर फैसला हो सकता है. बजट पेश होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सेंट्रल बोर्ड को संबोधित कर सकती हैं. ये लगातार तीसरा साल है जब राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए सरकार ने इंटरिम डिविडेंड की मांग की है. वित्तीय वर्ष 2017-18 में RBI ने सरकार को 10 हज़ार करोड़ रुपए का इंटरिम डिविडेंड दिया. 2018-19 में 28,000 करोड़ और 2019-20 में 10 हज़ार करोड़ दिए गए.

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास. फोटो: India Today
डिविडेंड और इंटरिम डिविडेंड
डिविडेंड का मतलब हीरालाल एंड संस के उदाहरण से समझा गया. बैंकिंग की भाषा में कहा जाए तो किसी कंपनी को अगर प्रॉफिट हुआ, उसका कुछ हिस्सा वो अपने शेयरहोल्डर्स के साथ शेयर करती है. इसे डिविडेंड कहते हैं.
यहां कंपनी जैसा काम RBI का है और शेयरहोल्डर के रूप में सरकार है.
लेकिन शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड देना कंपनी के लिए अनिवार्य नहीं होता है. अगर कोई कंपनी डिविडेंड दे रही है तो गारंटी नहीं है कि आगे भी वो देगी ही. डिविडेंड देना है या नहीं कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स पर निर्भर करता है. इस मामले में भी फैसला RBI का सेंट्रल बोर्ड लेगा. लेकिन फिलहाल तीन सालों से बोर्ड पैसे दे देता है. इसे लेकर विवाद भी हुआ है.
कितना डिविडेंड देना है, ये कंपनी की सालाना मीटिंग में तय होता है. इसे फाइनल डिविडेंड कहते हैं. अगर कंपनी वित्तीय वर्ष के बीच में ही डिविडेंड दे तो उसे इंटरिम डिविडेंड या अंतरिम लाभांश कहा जाता है. इंटरिम डिविडेंड तब दिया जाता है, जब कंपनी किसी वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में प्रॉफिट कमाती है.

RBI जुलाई से जून का वित्तीय वर्ष फॉलो करता है जबकि सरकार अप्रैल से मार्च का. दिसंबर में RBI की छमाही होती है. RBI की तरफ से छह महीने पर सरकार को इंटरिम डिविडेंड देने की शुरुआत वित्तीय वर्ष 2017-18 में हुई.
सरकार ने बैंक से इंटरिम डिवडेंड अपना राजघोषीय घाटा पूरा करने के लिए मांगना शुरू किया. फरवरी में बजट पेश होने के बाद सरकार की फाइनल बैलेंस शीट अगस्त तक तैयार होती है. तब तक इस पैसे से घाटा पूरा किया जाता है. इस स्थिति से निपटने के लिए RBI के पूर्व गवर्नर बिमल जालान ने सुझाव दिया था कि सरकार और RBI का वित्तीय वर्ष एक ही कर दिया जाए.
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