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'हिंदू रेट ऑफ़ ग्रोथ' का हिंदुओं से कोई कनेक्शन नहीं, लेकिन हिंदू सभ्यता से है!

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि भारत ‘हिंदू रेट ऑफ़ ग्रोथ’ की तरफ बढ़ रहा है. इसका मतलब जानिए.

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7 मार्च 2023 (अपडेटेड: 7 मार्च 2023, 03:31 PM IST)
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(बाएं) रघुराम राजन. दाईं तस्वीर सांकेतिक है. (साभार- PTI)
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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि भारत ‘हिंदू रेट ऑफ़ ग्रोथ’ (Hindu rate of growth) की तरफ बढ़ रहा है. उन्होंने इसे ‘देश के लिए ख़तरनाक’ बताया है. रघुराम राजन ने देश के धीमे आर्थिक विकास, प्राइवेट सेक्टर में निवेश, बढ़ते इंटरेस्ट रेट्स और वैश्विक मंदी की तरफ़ इशारा करते हुए ये बात कही है.

लेकिन ये 'हिंदू रेट ऑफ़ ग्रोथ' है क्या?

पिछले महीने राष्ट्रीय सांख्यिकि विभाग (NSO) ने एक रिपोर्ट जारी की. इसमें लगातार हो रही मंदी के संकेतों का जिक्र था. रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2022) के मुक़ाबले तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2022) में देश के GDP ग्रोथ रेट में चिंताजनक घटोती दिखी है. ये दर अनुमानित 6.3 फीसद से घटकर 4.4 फीसद पर आ गई है.

इसी का ज़िक्र करते हुए रघुराम राजन ने कहा है,

"देश के हालिया GDP नंबर्स से हमें साफ़-साफ़ धीमी वृद्धि दिखाई पड़ रही है. RBI ने इस वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 4.2% की ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया है. ये हमारे पुराने हिंदू ग्रोथ रेट से बहुत क़रीब है! हमें और बेहतर करना चाहिए."

फिर हिंदू ग्रोथ रेट! क्या है हिंदू ग्रोथ रेट? क्या हिंदुओं की बढ़ती आबादी से कोई कनेक्शन है? नहीं.

- पहली दफ़ा, 1987 में अर्थशास्त्री राज कृष्ण ने ये टर्म ईजाद किया था. राज कृष्ण दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स में अर्थशास्त्र पढ़ाते थे.

- 1940 से 1980 के बीच देश की आर्थिक स्थिति बहुत हंकी-डोरी नहीं थी. मतलब बहुत अच्छी नहीं थी. उद्योग समय-समय पर बन रहे थे. लेकिन बाज़ार खुला नहीं था. मुख्यतः किसानी पर ही निर्भरता रहती थी. लिहाज़ा देश का GDP ग्रोथ रेट 4 पर्सेंट के आस-पास रहता था. इसी को राज कृष्ण ने कहा 'हिंदू रेट ऑफ़ ग्रोथ'.

तस्वीर - विकीपीडिया

-  भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की बनाई सूचना पुस्तक ‘द न्यू ऑक्सफ़ोर्ड कम्पेनियन टू इकोनॉमिक्स इन इंडिया’ में इस बात का तफ़्सील ब्योरा है कि यही नाम क्यों? 

- दरअसल, आज़ादी के बाद से लेकर 1980 तक अर्थव्यवस्था के लिहाज से देश के लिए बहुत उथल-पुथल का समय रहा. दूसरे विश्व युद्ध और बंटवारे के प्रभाव, नई विश्व व्यवस्था, तीन युद्ध (दो पाकिस्तान से, एक चीन से), इमरजेंसी, अकाल और कई दूसरे फैक्टर्स के चलते भारत की GDP ग्रोथ 3.5 से 4 पर्सेंट के आस-पास ही रही. इसी को राज कृष्ण ने कहा 'द हिंदू रेट ऑफ़ ग्रोथ'. 

राज कृष्ण ने इसे भारतीय सभ्यता से जोड़ दिया—कि तमाम आक्रमणों, युद्धों, लूटपाट के बावजूद हिंदू सभ्यता बची रही.

- हालांकि, ये टर्म इस्तेमाल तो मज़बूत, स्थिर और टिकाऊ के अर्थ में आया था. अब इसे एक 'अपमानजनक' फ़्रेज़ के तौर पर गिना जाता है. क्योंकि एक विकासशील देश के लिए 4 पर्सेंट ग्रोथ रेट हताश करने वाला है. 

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