16 मार्च, 2018. ये वो दिन था जब इरफ़ान खान ने बताया कि उन्हें न्यूरोएंडोक्राइनट्यूमर है. इरफ़ान का यह ट्वीट देख सकते हैं.🙏🏻 pic.twitter.com/IDThvTr6yF— Irrfan (@irrfank) March 16, 2018 न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर एक अम्ब्रेला टर्म है.मतलब कोई एक रोग नहीं. कई रोगों का ग्रुप है. किस तरह के रोगों का ग्रुप? इन रोगोंमें क्या कॉमन होता है कि इन्हें एक ही ग्रुप में रख दिया गया है?‘न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर’ शब्द को समझने पर ये बात समझ में आती है. लेकिन इससेपहले हमें नर्वस सिस्टम समझना होगा. नर्वस सिस्टम नर्वस सिस्टम हम सभी के दिमाग़ सेशुरू होकर पैर की उंगलियों के अंतिम सिरे तक जाता है. इसका काम जानकारियों को शरीरके अलग-अलग हिस्से तक पहुंचाना होता है. और ये ऐसा करता कैसे है? सेल्स (कोशिकाओं)के जरिए. इन सेल्स को न्यूरॉन्स कहते हैं. जैसे अगर अंगुली में चोट लगती है,तो न्यूरॉन्स के जरिए ही हमें पता चलता है कि चोट लगी है. अब न्यूरोएंडोक्राइनसिस्टम समझ लेते हैं एंडोक्राइन सिस्टम हम सबके शरीर में होता है. जैसे हड्डी केढांचे में कई तरह की हड्डियां होती हैं. वैसे ही किसी इंसान के एंडोक्राइन सिस्टममें कई तरह के ऑर्गन (अंग) होते हैं. जो आपके खून में सीधे हार्मोन छोड़ते हैं.थायराइड, ओवरी, टेस्टीज़ वग़ैरह इन ऑर्गन्स के उदाहरण हैं. इन अंगों को ग्लैंड्सकहा जाता है. और शरीर में इनसे बने सिस्टम को या इन ग्लैंड्स के ग्रुप को हीएंडोक्राइन सिस्टम कहा जाता है. लेकिन इस एंडोक्राइन सिस्टम में ग्लैंड्स के अलावाएक और चीज़ भी होती है- न्यूरोएंडोक्राइन. न्यूरोएंडोक्राइन दरअसल न्यूरॉन्स की तरहही होते हैं पर वो हार्मोन भी रिलीज़ करते हैं. यही हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्णफ़ंक्शन को कंट्रोल करते हैं. न्यूरो सेल्स की तरह ही न्यूरोएंडोक्राइन सेल्स शरीरके हर हिस्से में पाए जाते हैं. अब ट्यूमर की बात ट्यूमर शरीर के किसी भी अंग मेंहो सकता है. जहां भी कोशिकाएं बढ़ जाएं वो ट्यूमर. अब ट्यूमर दो तरह के होते हैं.बिनाइन ट्यूमर और मैलिग्नेंट कैन्सरस ट्यूमर. मैलिग्नेंट ट्यूमर को कैन्सरस भी कहतेहैं. बिनाइन का अर्थ होता है नुक़सान न करने वाला. लेकिन मैलिग्नेंट ट्यूमर याकैन्सरस ट्यूमर जानलेवा होता है. तो न्यूरोएंडोक्राइन + ट्यूमर मानेन्यूरोएंडोक्राइन सेल्स में होने वाला ट्यूमर. कोलन इंफ़ेक्शन कोलन बड़ी आंत का एकहिस्सा होता है, इसका काम खाने में से लिक्विड को सोखना और मल को प्रोसेस करके शरीरसे निकालने के लिए तैयार करना होता है. इस हिस्से में होने वाले इंफ़ेक्शन को कहाजाता है, कोलन इंफ़ेक्शन या कोलाइटिस. ये आमतौर पर वायरस, पैरसाईट या बैक्टीरियाकिसी से भी हो सकता है. अधिकतर ये जानलेवा नही होता. फिर इरफ़ान की मौत कोलनइंफेक्शन से कैसे हुई? कैंसर या ट्यूमर, आमतौर पर मृत्यु का कारण नहीं होता. मृत्युके कारण का कारण होता है. मतलब, आपने ऐसा अतीत में भी देखा होगा कि अगर किसी कोकैंसर हो तो उसकी मृत्यु मल्टीपल ऑर्गन फ़ेलियर या सांस लेने की तकलीफ़ के चलतेहुई. इरफ़ान के केस में भी यही हुआ. कैसे हुआ होगा, इसके कई अंदाज़े लगाए गए हैं.लेकिन सबसे लॉजिकल उत्तर ये लग रहा है कि, ‘थाइमस ग्लैंड’ हमारी छाती के पीछे स्थितएक ऑर्गन है. इसमें हार्मोंस के अलावा इंफ़ेक्शन से लड़ने वाले वाइट ब्लड सेल्स भीपैदा होते है, जिन्हें टी-लिंफोसाईटिस कहा जाता है. और चूंकि ये ग्लैंड है तो हमेंपता ही है कि ये हार्मोंस भी बनाता होगा. ‘थाइमस ग्लैंड’ में बनने वाले हार्मोंस काकाम होता है टी-लिंफोसाईटिस को इंफ़ेक्शन्स आदि से लड़ने के लिए ट्रेन करना.न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर का एक असर यह भी होता है कि उससे इन हार्मोंस के रिलीज़होने पर असर पड़ता है. शरीर की इन्फ़ेक्शन से लड़ने की क्षमता कमजोर होती है. साथही जिनकी किमोथेरेपी या सर्जरी हुई हो उनको इंफ़ेक्शन होने का ख़तरा ज़्यादा रहताहै. और इरफ़ान की तो किमोथेरेपी और सर्जरी दोनों ही हुई थी. जिसके चलते कोलनइन्फ़ेक्शन हुआ, जो जानलेवा साबित हुआ.--------------------------------------------------------------------------------विडियो- मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती इरफ़ान का निधन