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आर्यन खान की जमानत के लिए मुकुल रोहतगी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में क्या तर्क दिए?

समीर वानखेड़े के परिवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नवाब मलिक पर क्या आरोप लगाए?

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शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को जेल से बाहर निकालने का जिम्मा अब मशहूर वकील मुकुल रोहतगी ने उठाया है.
शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को जेल से बाहर निकालने का जिम्मा अब मशहूर वकील मुकुल रोहतगी ने उठाया है.
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सुरेश
26 अक्तूबर 2021 (अपडेटेड: 26 अक्तूबर 2021, 05:01 PM IST)
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मुंबई के एक क्रूज़ पर ड्रग्स पकड़ने के लिए डाली गई रेड का मामला अब कुछ और ही हो चुका है. एक तरफ है एक सूपरस्टार का बेटा, जिसे बेल नहीं मिल रही. और दूसरी तरफ है एक प्रभावशाली एनसीबी अफसर, जिसकी भूमिका हर बीतते दिन के साथ नए सवालों के घेरे में आ जाती है. और एक तीसरे पक्ष के रूप में सामने आ गए हैं एनसीपी नेता नवाब मलिक. बेल के मामले पर आज बंबई उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई. सुनवाई से पहले और सुनवाई के दौरान ऐसा काफी कुछ हुआ, जो आपको बताएगा कि इस मामले में जितने स्टेकहोल्डर नज़र आ रहे हैं, उससे कहीं ज़्यादा हैं. एक के बाद एक नए खुलासे जिस तरह एक इल्ली कायांतरण के बाद तितली बन जाती है, उसी तरह मुंबई के तट के करीब एक क्रूज़ पर पड़ी NCB की रेड का मामला भी अब ड्रग्स की बरामदगी और उस पर कार्रवाई से आगे निकल गया है. फिलहाल पूरा फोकस है शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की बेल और NCB अधिकारी समीर वानखेड़े से जुड़े विवादों पर. पहले बेल मामले की बात करते हैं. आज आर्यन खान की बेल का मामला बंबई उच्च न्यायलय में सुना गया. उच्च न्यायालय के समक्ष ये मामला आईटम नंबर 57-59 के रूप में आया. ये सुनवाई का क्रम है. दर्शक जानते ही हैं कि 19 अक्टूबर के रोज़ मुंबई की विशेष NDPS अदालत ने आर्यन खान, मुनमुन धमेचा और अर्बाज़ मर्चेंट की ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया था. आर्यन खान को लेकर अदालत ने तब कहा था कि आर्यन जानते थे कि उनके दोस्त अर्बाज़ मर्चेंट के पास छह ग्राम चरस है. इसीलिए चाहे नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को आर्यन के पास कोई ड्रग्स न मिली हों, ये माना जाएगा कि आर्यन खान के पास ड्रग्स का कॉन्शियस पज़ेशन था. सादी भाषा में कहें तो अदालत ने 2 अक्टूबर की घटनाओं को इसी तरह देखा कि आर्यन के पास ड्रग्स और उनकी जानकारी दोनों थीं. अब मुकुल रोहतगी लड़ रहे आर्यन का केस आर्यन की अब तक की सारी बेल याचिकाओं में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि उनके पास ड्रग्स नहीं थीं. और न ही इस बात की पुष्टि हुई कि उन्होंने नशा किया था. इसीलिए उनपर मामला नहीं बनता है. लेकिन 19 अक्टूबर के दिन आए NDPS कोर्ट के आदेश ने साबित किया कि महज़ इस दलील से काम चलेगा नहीं. इसीलिए आज के दिन उच्च न्यायालय में आर्यन के वकील न सिर्फ ज़्यादा तैयारी से उपस्थित हुए, बल्कि अपने साथ एक नए और नामी वकील को भी लेकर आए- भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी. भारत सरकार के सबसे बड़े वकील रहने के अलावा रोहतगी ने फेसबुक, वॉट्सएप, वोडाफोन जैसी नामी कंपनियों के केस भी लड़े हैं. वो पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के वकील रहे हैं. रिया चक्रवर्ती मामले में उन्होंने बिहार सरकार का भी पक्ष रखा था. इन सारी बातों ने अदालत में होने वाली जिरह को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी थी. लेकिन जिरह शुरू होने से पहले भी बहुत कुछ हुआ. NCB ने आर्यन खान की ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए अपना जवाब दायर किया. इसमें एजेंसी ने कहा कि शुरुआती जांच के बाद आर्यन खान के अंतरराष्ट्रीय संबंधों का पता चला है. प्रथम दृष्टया इनका इशारा ड्रग्स की अवैध खरीद की तरफ ही है. ये साबित करते हैं कि आर्यन खान महज़ कंज़्यूमर (ड्रग्स का सेवन करने वाला) नहीं हैं. अतः ये कहना जल्दबाज़ी होगी कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है. एनसीबी ने अपने जवाब में रेड के दौरान गवाह रहे प्रभाकर सैल के हलफनामे का ज़िक्र भी किया. सैल ने दावा किया था कि उन्होंने एनसीबी के ज़ोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े को मामले में लेनदेन की बातें करते सुना था. इसके बाद ये इल्ज़ाम ज़ोरशोर से लगाया गया था कि समीर वानखेड़े ये सारी कार्यवाही उगाही के लिए कर रहे थे. सैल की मांग के बाद उन्हें महाराष्ट्र पुलिस से सुरक्षा मिली हुई है. अब लौटते हैं एनसीबी के जवाब पर. सैल के हलफनामे पर एनसीबी ने कहा कि इस मामले पर सबूतों से छेड़छाड़ करने और जांच को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है. ऐसा लगता है कि शाहरुख खान की मैनेजर पूजा ददलानी ने रेड के पंचों से संपर्क किया. आर्यन खान की ज़मानत याचिका तो इसी बात पर खारिज कर दी जानी चाहिए. सैल के हलफनामे के बाद समीर वानखेड़े बैकफुट पर आ गए थे. विजिलेंस शाखा ने आरोपों पर एक अंदरूनी जांच भी बैठा दी थी. कहां तो इसे आर्यन खान का मामला मज़बूत करना था. लेकिन एनसीबी ने अदालत में इसी बिंदु पर ज़मानत का विरोध कर दिया. इसीलिए आर्यन खान के वकीलों ने तत्परता से सुनवाई शुरू होने से पहले ही हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल कर दिया. इसमें आर्यन खान की तरफ से साफ कहा गया कि उनका प्रभाकर सैल या केपी गोसावी से कोई संबंध नहीं है. अपील की गई कि ज़मानत याचिका को किसी और के हलफनामे से प्रभावित हुए बिना सुना जाए. और ये भी कि आर्यन खान एनसीबी या किसी अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं. एक तरफ ये सब होता रहा, और दूसरी तरफ कोर्टरूम में भीड़ बढ़ने लगी. कोविड प्रोटोकॉल का पालन न होते देख जज उठ गए. तब अदालत के स्टाफ ने कहा कि जिन मामलों का नंबर आने वाला है, उनसे संबंधित लोग ही कोर्टरूम में रहें. वर्ना सुनवाई शुरू नहीं होगी. पुलिस के अधिकारों का इस्तेमाल करती है NCB क्राउड कंट्रोल के बाद अदालत ने अपना काम फिर शुरू किया. जब तक आर्यन खान मामले का नंबर आया, तब तक कोर्टरूम के बाहर इतनी भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी, कि शोर अंदर तक आने लगा. इसी शोर के बीच मुकुल रोहतगी ने आर्यन खान का पक्ष रखना शुरू किया. उन्होंने कहा कि आर्यन खान और अर्बाज़ मर्चेंट प्रतीक गाबा के बुलावे पर क्रूज़ जा रहे थे. लेकिन क्रूज़ टर्मिनल पर ही उन्हें एनसीबी ने हिरासत में ले लिया. आर्यन के पास न तो ड्रग्स मिलीं, और न ये साबित किया जा सका कि उन्होंने ड्रग्स का सेवन किया था. उन्हें तो गिरफ्तार ही नहीं किया जाना चाहिए था. आर्यन का कोई मेडिकल टेस्ट भी नहीं किया गया था. रोहतगी ने इसके बाद दलील दी कि एनसीबी के अधिकारी भले पुलिस अधिकारी न हों, लेकिन वो पुलिस के अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं. 2020 में तूफान सिंह मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि NCB के अधिकारियों को पुलिस अधिकारी माना जा सकता है और उनके सामने दिया गया कबूलनामा सबूत की तरह पेश नहीं किया जा सकता. इसके बाद रोहतगी ने कॉन्शियस पज़ेशन की व्याख्या पर दलील दी. उन्होंने कहा कि कॉन्शियस पज़ेशन उसी चीज़ का माना जा सकता है, जो हमारी जानकारी में हो और जिसपर हमारा काबू हो. मान लीजिए हम एक कार चला रहे हैं. अगर कार में कुछ मिले, तो उसे कॉन्शियस पज़ेशन माना जा सकता है. लेकिन आर्यन के मामले में ऐसा नहीं है. कोई अपने जूते में क्या लेकर चलता है, वो आर्यन को प्रभावित नहीं करता. उसे आर्यन का कॉन्शियस पज़ेशन नहीं कहा जा सकता. अगर ये मान भी लिया जाए कि चरस आर्यन के पास थी, तब भी अधिकतम सज़ा 1 साल की ही हो सकती है. फिर कानून की मंशा तो ये है कि अगर कोई ड्रग्स की छोटी मात्रा के साथ पकड़ा जाए या उसने कम मात्रा में नशा किया हो, तो उसे पुनर्वास केंद्र भेजा जाए, न कि जेल. रोहतगी ने ये भी पूछा कि जब आर्यन पर NDPS एक्ट की धारा 27 A के तहत आरोप नहीं लगाए गए, तो उन्हें साज़िशकर्ता कैसे बताया जा रहा है. दर्शकों की जानकारी के लिए हम बता दें कि 27 A तब लगती है, जब आरोपी नशे के कारोबार को फाइनैंस करता हो या फिर नशीली दवाओं को बनाने में संलिप्त पाया जाए. नशे के कारोबार में पैसा लगाने वाले को मुख्य आरोपी की तरह देखा जाता है और ये बड़ा संगीन आरोप होता है. इसके मामलों में ज़मानत आसानी से नहीं मिलती. आर्यन की कथित चैट्स पर रोहतगी ने कहा कि चैट की बातें रिकॉर्ड पर नहीं रखी गईं, लेकिन उनका ज़िक्र किया गया. जबकि किसी चैट का संबंध क्रूज़ पार्टी से नहीं था. रोहतगी ने ये भी साफ किया कि आर्यन का किसी भी पंच, माने रेड के दौरान गवाह रहे प्रभाकर सैल और केपी गोसावी से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने नवाब मलिक का नाम लिए बिना ये भी जोड़ा कि उनके द्वारा लगाए गए किसी आरोप से भी आर्यन का संबंध नहीं है. चैट्स में आर्यन और अचित कुमार की बातचीत का ज़िक्र भी था. इसपर अचित कुमार के वकील ने कहा कि जिन चैट्स का ज़िक्र हुआ है, वो 12 से 14 महीने पुरानी हैं. और उसमें भी बात एक ऑनलाइन गेम खेलने की हो रही है. इसके बाद अचित कुमार के वकील अमित देसाई ने अपना पक्ष रखा और सुनवाई कल दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित हो गई. अब आगे क्या? तो अब इस मामले में आर्यन खान की बेल इस बात पर निर्भर करेगी कि अदालत कॉन्शियस पज़ेशन की व्याख्या कैसे करती है. और ये व्याख्या सिर्फ आर्यन खान वाले मामले को ही प्रभावित नहीं करेगी. इससे इस तरह के सभी मामलों में आरोपियों के भविष्य पर असर पड़ेगा. वैसे चलते चलते एक अपडेट ये भी कि NDPS अदालत ने मुंबई क्रूज़ मामले में गिरफ्तार हुए दो आरोपियों अविन साहू और मनीष राजगरिया को बेल दे दी है. साहू पर क्रूज़ पर गांजा पीने का आरोप है और राजगरिया पर 2.4 ग्राम गांजा रखने का आरोप है. ये दो पहले आरोपी हैं, जिन्हें इस मामले में बेल मिली है. इस पूरे मामले में एक और पक्ष है, जिसपर ध्यान दिया जाना चाहिए. हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू होती, उससे पहले ही अनन्या पांडे के साथ उनकी चैट लीक कर दी गईं. इन कथित चैट्स के आधार पर दावा किया जा रहा है कि अनन्या ने आर्यन के लिए गांजा अरेंज किया था. लेकिन ये 2019 की बात है. ऐसे मामलों में अंतिम फैसला अदालत को ही करना है. कि कौन सही, कौन गलत. लेकिन जिस तरह ये चैट्स बाहर आई हैं, ये कई सवाल खड़े करती हैं. क्या अदालत की सुनवाई से पहले ही एक मोमेंटम बिल्ड करने की कोशिश की जा रही है. अगर लीक से कोई जानकारी बाहर आ रही है, तो वो पूरी क्यों नहीं है? चैट लीक करने और लीक चैट पर दावे करने वालों को इन बातों पर भी ध्यान देना चाहिए. समीर वानखेड़े पर उठ रहे सवाल अब आते हैं समीर वानखेड़े पर. कल एनसीबी नेता नवाब मलिक ने आरोप लगाया था कि वानखेड़े ने अपने धर्म के बारे में गलत जानकारी दी है. आज वानखेड़े का परिवार मीडिया के सामने आया और उनका बचाव किया. उनकी बहन ने कहा,
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परिवार कह रहा है कि नवाब मलिक जाली दस्तावेज़ दिखा रहे हैं. साथ ही धमकी के आरोप भी लगा रहा है. समीर वानखेड़े अब बचाव की मुद्रा में हैं. फिलहाल जिस तरह के आरोप लगे हैं, उन्हें लेकर उनपर सीधी कार्रवाई नहीं हुई है. लेकिन ऐसा कितने दिन चलेगा ये कहा नहीं जा सकता. और न इस बात का अनुमान अभी लगाया जा सकता है कि समीर के पिटारे में आगे के लिए क्या है.

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