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ब्रैथवैट के चार छक्कों की कहानी, उनकी जुबानी

इस मैच में ब्रैथवेट की बल्लेबाज़ी वही थी, जिसके लिए अंग्रेज़ी में कहते हैं: "If it is in the V, it goes in the tree. If it in the arc, it goes out of park."

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कार्लोस ब्रैथवेट. Photo: AP
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कुलदीप
4 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 4 अप्रैल 2016, 02:13 PM IST)
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कार्लोस ब्रैथवेट अब खुद एक करिश्मे का पर्याय बन गए हैं. टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में लगातार चार छक्के ठोंककर उन्होंने वेस्टइंडीज को नामुमकिन लग रहा मैच जिता दिया. हर शॉट के बाद उनके दिमाग में क्या चल रहा था, यह उन्होंने 'espn क्रिकइंफो' से बातचीत में बताया है. सुशोभित सक्तावत ने इसका अनुवाद किया है. पढ़ने लायक है.
यह एक ऐसी चीज़ थी, जिससे किंवदंतियां बना करती हैं. कार्लोस ब्रैथवेट और मर्लोन सैम्युअल्स रविवार रात अनवरत कैरेबियाई किंवदंतियों में शुमार हो गए. और हां, ब्रैथवेट ने इस मैच में बल्लेबाज़ी की उसी ताबड़तोड़ शैली का अनुपालन किया, जिसके लिए अंग्रेज़ी में कहते हैं: "If it is in the V, it goes in the tree. If it in the arc, it goes out of park." आज सुबह क्रिकइंफ़ो से बातचीत करते हुए कार्लोस ब्रैथवेट ने उन चार गेंदों को सिलसिलेवार याद किया, जिन्होंने उन्हें अब कभी न भूले जाने वाला खिलाड़ी बना दिया है:
 
"हमें अच्छी तरह मालूम था कि क्रिस (जॉर्डन) क्या कर रहे हैं (जॉर्डन और ब्रैथवेट सहपाठी रह चुके हैं). वे डेथ ओवर्स में यॉर्कर गेंदें फेंकने में सिद्धहस्त हैं. लेकिन हमें यह भी मालूम था कि बेन स्टोक्स हमें मौका देंगे. वे ओवर में एक-दो फुलटॉस फेंकते ही हैं.
"आखिरी ओवर शुरू होने से पहले मार्लोन मेरे पास आए और बोले, 'दो बातें, याद रखो. वी आर स्विंगिंग फॉर द हिल्स.' (हम हर गेंद को मैदान के बाहर पहुंचाने की कोशिश करेंगे). और दूसरे, हम दौड़ेंगे, चाहे जो हो. गेंद बल्ले पर आए न आए, हम दौड़ेंगे.
"पहली ही गेंद कमज़ोर थी. इसने गुड लेंग्थ पर लेग स्टंप पर टप्पा खाया और मैंने उसे घुमाकर मारा. मुझे लगा वह मिडविकेट पर गई है. मैं उसे वहीं खोज रहा था. लेकिन वह फ़ाइन लेग पर गई. यह अच्छा ही हुआ, क्योंकि वहां पर बाउंड्री छोटी है. गेंद बाउंड्री के बाहर जाकर गिरी.
"दूसरी गेंद मेरे आर्क में थी और मैंने इसे सीधे लॉन्गे ऑन के ऊपर मारा. यह चारों छक्कों में से सबसे लंबी हिट थी और गेंद को स्टैंड में जाता देख एक अनिर्वचनीय उल्लास मुझे मथने लगा. लेकिन मैं अभी अपनी भावनाएं नहीं दिखाना चाहता था.
"तीसरी गेंद को मैंने मिडऑफ के ऊपर से उठाकर मारा. वह एक मिस-हिट थी. लेकिन इससे क्या फ़र्क पड़ता है. 65 मीटर या 94 मीटर, छक्का तो छक्का ही है."
"चौथी गेंद. हमें विश्व विजेता बनने के लिए केवल एक रन की दरक़ार थी, लेकिन मैं सिंगल नहीं लेना चाहता था, क्योंकि क्षेत्ररक्षक घेरे के भीतर आने लगे थे. मुझे पता था कि मुझे इनफ़ील्ड को क्लीयर भर करना है. बेन ने गेंद फेंकी. मैंने गेंद को बल्ले पर लिया और अच्छी हिट लगाई. उसके बाद मुझे पता नहीं क्या हुआ. मुझे यह भी नहीं मालूम कि गेंद किस दिशा में गई. मुझे इतना ही मालूम था कि गेंद इनफ़ील्ड को पार कर चुकी है और अब हम दुनिया के सरताज हैं."
अखबार 'टेलीग्राफ' के लिए खेल पत्रकार पॉल हेवार्ड की टिप्पणी भी मजेदार है. वह लिखते हैं: उनके (ब्रैथवेट के) पहले छक्के से इंग्लैंड खेमे में घबराहट की कंपकंपी छा गई. दूसरे ने उनकी कमर तोड़ दी. तीसरे ने वेस्टइंडीज की विजय सुनिश्चित कर दी. चौथा पूरी तरह से गैरजरूरी था.

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