BJP के केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो हारे या जीते?
टॉलीगंज सीट का फाइनल नतीजा क्या रहा?
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केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को बीजेपी ने विधायकी का चुनाव लड़वा दिया था. फाइल फोटो
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सीट का नाम: टॉलीगंज
कौन जीता
अरूप विश्वास-TMC
कितने वोट मिले:101440
कौन हारा
बाबुल सुप्रियो (BJP)
कितने वोट मिलेः 51360
जीत का अंतर-50080
टॉलीगंज बंगाली फ़िल्म इंडस्ट्री का सेंटर है. टॉलीवुड की फ़िल्मों से जुड़े लोगों का गढ़. इस बार केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के चुनाव में उतरने की वजह से यह सीट हाई प्रोफाइल बन गई थी.
पिछले दो चुनाव के नतीजे:
– 2016 में टीएमसी के अरूप बिस्वास ने इस सीट से जीत हासिल की थी. उन्होंने सीपीएम के मधु सेन रॉय को 9,896 वोटों के अंतर से हराया था.
-2011 में भी टीएमसी के अरूप बिस्वास ने इस सीट से जीत हासिल की थी. सीपीएम के पार्थ प्रतिम बिस्वास को 526 वोटों के अंतर से हराया था.
सीट ट्रिविया
#टॉलीगंज विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पड़ती है. पिछले 20 साल से इस सीट पर टीएमसी का कब्जा है.
#2016 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के अरूप विश्वास यहां से तीसरी बार विधायक बने. 2021 में उन्होंने चौथी बार जीत हासिल की है.
#टॉलीगंज विधानसभा सीट पर पहली बार साल 1952 में वोट डाले गए. कांग्रेस को जीत मिली.
#इसके बाद यहां सीपीएम का लंबे समय तक दबदबा रहा.
#साल 2001 में यह सीट पहली बार टीएमसी की झोली में गई और तब से वह लगातार यहां जीत रही है.
टॉलीगंज बंगाली फ़िल्म इंडस्ट्री का सेंटर है. टॉलीवुड की फ़िल्मों से जुड़े लोगों का गढ़. इस बार केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के चुनाव में उतरने की वजह से यह सीट हाई प्रोफाइल बन गई थी.
पिछले दो चुनाव के नतीजे:
– 2016 में टीएमसी के अरूप बिस्वास ने इस सीट से जीत हासिल की थी. उन्होंने सीपीएम के मधु सेन रॉय को 9,896 वोटों के अंतर से हराया था.
-2011 में भी टीएमसी के अरूप बिस्वास ने इस सीट से जीत हासिल की थी. सीपीएम के पार्थ प्रतिम बिस्वास को 526 वोटों के अंतर से हराया था.
सीट ट्रिविया
#टॉलीगंज विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पड़ती है. पिछले 20 साल से इस सीट पर टीएमसी का कब्जा है.
#2016 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के अरूप विश्वास यहां से तीसरी बार विधायक बने. 2021 में उन्होंने चौथी बार जीत हासिल की है.
#टॉलीगंज विधानसभा सीट पर पहली बार साल 1952 में वोट डाले गए. कांग्रेस को जीत मिली.
#इसके बाद यहां सीपीएम का लंबे समय तक दबदबा रहा.
#साल 2001 में यह सीट पहली बार टीएमसी की झोली में गई और तब से वह लगातार यहां जीत रही है.

