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'पता नहीं इस बच्चे का बाप कौन है, रेप 6 लोगों ने किया था'

मां बनना गर्व की बात हो सकती है. पर हर बार नहीं.

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फोटो - thelallantop
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प्रतीक्षा पीपी
16 मार्च 2016 (अपडेटेड: 25 जनवरी 2019, 02:29 PM IST)
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ये टाइम मैगजीन के मार्च, 2016 के अंक का कवर है. कवर में अंडरवियर में एक 'ब्लैक' औरत है. औरत प्रेग्नेंट है.
बीते दिनों हमने एक चलन देखा है. प्रेग्नेंट फोटो शूट का. क्योंकि मां बनना गर्व कि बात है. है न? डेमी मूअर ने आज से बीस साल पहले ऐसा ही पोज दिया था वैनिटी फेयर मैगजीन के लिए. कहते हैं जिस बोल्डनेस के साथ डेमी ने अपनी प्रेगनेंसी को दुनिया को दिखाया कोई और न दिखा पाया.
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लेकिन ये जो औरत टाइम मैगजीन के कवर पर है न. ये 'सुंदर' नहीं है. क्योंकि ये 'काली' है. गरीब है. और ये एक 'बुरी' औरत है. क्योंकि ये मां नहीं बनना चाहती. कहती थी पैदा होते ही बच्चे को मार दूंगी.
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नहीं, अयाक सेक्स वर्कर नहीं थी. सूडान में अपने गांव पर हमला होने के बाद राहत कैंपों की तरफ भाग रही थी. पकड़ी गई. सैनिकों ने बार बार रेप किया. अयाक से जब पूछते हैं कि वो अपना बच्चा गिरा क्यों नहीं देती. वो कहती है कि उसका आने वाले बच्चा उसका इकलौता साथी होगा. क्योंकि उसका पूरा परिवार खत्म हो चुका है.
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सूडान में ही मेरी भी रहती है अपने पूरे परिवार के साथ. वो लोग नुएर आदिवासी हैं. देश के नए राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के बीच सत्ता की लड़ाई ने देश के उत्तरी इलाके को बीहड़ सा बना दिया है. 50,000 से भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. लाखों लोग भुखमरी के शिकार हैं. लाखों घर छोड़ कर भाग चुके हैं. यूनाइटेड नेशंस के एक कैंप में मेरी ने अपने परिवार के साथ सहारा लिया हुआ था जब 2014 में राष्ट्रपति कीर कि सेना ने उनपर हमला कर दिया.
मेरी ने टाइम को बताया कि पहले सेना ने उसके पति को गोली से उड़ा दिया.फिर उसके दो बेटों को मार डाला. एक की उम्र 5 साल थी, दूसरे की 7. फिर इन वर्दी पहने हुए लोगों ने उसकी गोद से उसकी बच्ची को छीन लिया. मेरी को तब तक नहीं पता था कि इससे बुरा भी कुछ हो सकता है.
सैनिकों ने मेरी से कहा कि उन्हें नुएर लोगों से खतरा है. क्योंकि वो विद्रोही होते हैं. मेरी के लड़के बड़े होकर लड़ाके बन सकते थे. इसलिए उन्हें खत्म कर दिया गया. ''लेकिन हम औरतों को जान से नहीं मारते. सिर्फ उनका रेप करते हैं, सैनिकों ने मेरी से कहा. "जैसे रेप हत्या से बेहतर होते हों." मेरी कहती है.
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मेरी जैसी लाखों औरतों को कौन बताएगा कि उनका रेप होने में उनका कोई हाथ नहीं होता. उनके साथ हिंसा की जाती है.
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पूर्वी कॉन्गो में पिछले बीस सालों में 50,000 से भी ज्यादा ऐसे बच्चे हुए हैं जो रेप होने के कारण पैदा हुए. जिनके पिता के बारे में उन्हें पता नहीं है. जिनके पास कोई पहचान पत्र नहीं है क्योंकि उनके बिर्थ सर्टिफिकेट पर उनके बाप का नाम नहीं है. ये बच्चे जब बड़े होते हैं तो लोग इन्हें दुशमनों के बच्चे कहकर इनसे नफरत करते हैं.
1971 की बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में पाकिस्तान के सैनिकों ने मिलकर एक मिशन के तहत दो से चार लाख महिलाओं का रेप किया. जिसमें हजारों औरतें प्रेगनेंट हुईं. हजारों एबॉर्शन हुए. फिर भी हजारों बच्चे पैदा हुए. वो बच्चे जिनको देख कर माओं की ममता नहीं जागती. क्योंकि वो उनके लिए बोझ थे. दुनिया के लिए उसकी मां का पाप थे.
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बांग्लादेश के मेहरपुर में आजादी की लड़ाई में हुए रेप को दिखाता एक स्कल्पचर
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निकोल एक सेक्स वर्कर थीं. साल 2010 में कॉन्गो देश के गोमा शहर में संयुक्त राष्ट्र ने शहर में अपने पीसकीपर अपॉइंट किए थे. जिनमें भारत के सैनिकों की एक टुकड़ी भी शामिल थी. एक दिन एक लड़का निकोल के पास आया, और एक सैनिक के साथ सेक्स करने की बात तय हुई. फिर सैनिक निकोल के लिए आर्मी वाली वर्दी लेकर आया. कि सैनिकों के कैंप में कोई उसे घुसते न देखे.
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तस्वीर आउटलुक मैगजीन से
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सैनिक जीतने के नाम पर दुश्मन देश की औरतों का रेप करते हैं. अपने देश में रक्षा के नाम पर अपनी ही औरतों का रेप करते हैं.
ये आर्टिकल आउटलुक मैगजीन ने 2011 में किया था. उस वक्त कॉन्गो में लगभग 4000 भारतीय सैनिकों की पोस्टिंग थी. उसके बाद कॉन्गो में भारतीय से दिखने वाले कई बच्चे पैदा हुए. सेक्शुअल मिसकंडक्ट की शिकायत भी हुई. 12 अफसरों और 40 जवानों की दोषी पाया गया.
फिल्मों में हमने अपने सैनिकों को भारत माता का जयकारा करते हुए देखा है. देखा है कैसे देश के लिए जान लुटा देते हैं. जिन्हें ये 'मां' जैसा मानते हैं. जिनके रेप ये करते हैं, क्या वो किसी की कुछ नहीं लगतीं? क्या एक औरत का सेक्स वर्कर होना उसके रेप को जस्टिफाई कर देता है?
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नादिया के मुताबिक रेप करने के पहले लड़कियों से दुआ पढ़वाई जाती है. ये धर्म है.
नादिया ISIS के चंगुल से भाग आई थी. लेकिन उन हजारों का क्या जिनके साथ रोज हिंसा हो रही है?
लड़ाइयां उतनी ही पुरानी हैं जितनी ये दुनिया है. ये सिर्फ एक देश, एक जगह या एक काल की बात नहीं है. दुनिया भर के इतिहास के पन्ने मासूमों के खून से लाल हैं. और हर युद्ध का एक पैटर्न है. पुरुषों को मार दिया जाता है. और औरतों और बच्चों पर कब्जा कर लिया जाता है. ठीक उसी तरह जैसे शहरों, सड़कों, गलियों पर कब्जा कर लिया जाता है. जैसे जानवरों पर कब्ज़ा कर लिया जाता है. लड़ाई सिर्फ पुरुष की पुरुष से होती है. फिर औरतों का रेप किया जाता है. जैसे जमीन पर झंडा गाड़कर उसपर मुहर लगा दी जाती है कि अब ये हमारा हो गया है. पर एक बार रेप हो जाने के बाद औरत किसी की नहीं होती. न उसका बच्चा किसी का होता है. लड़ाई खत्म होने के बाद डाटा आता है. इतने मरे, इतने घायल. कितनी औरतों का रेप हुआ, कितनों की वेजाइना में सरिया या गरम बुलेट घुसा दी गई ये कहीं नहीं आता. क्योंकि युद्ध तो पुरुषों में होता है.
क्या हमेशा सारी लड़ाइयां तब तक जीती नहीं मानी जाएंगी जब तक पुरुष का वीर्य औरत की योनि में न गिरा दिया जाए?

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