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विराट कोहली : सचिन जैसा पर सचिन से अलग

वन डाउन उतरता है. मैच जिताकर लौटता है. ऐसे मारता है जैसे कह रहा हो, सवारी अपने सामान की खुद ज़िम्मेदार है.

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केतन बुकरैत
28 मार्च 2016 (Updated: 29 मार्च 2016, 11:26 AM IST)
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इंडिया वर्सेज़ ऑस्ट्रेलिया. 160 का टार्गेट. 157 रन बनने पर टीम का कप्तान चौव्वा मार देता है. 161. टीम जीत जाती है. नॉन-स्ट्राइकिंग एंड पे खड़ा बैट्समैन कुछ कदम Kohli
चलकर पिच पर घुटने के बल बैठ जाता है बल्ला उसके सर के ऊपर है. सर झुका हुआ. वो अपने ग्लव्स खोलता है, खोल कर ज़मीन पर फैंक देता है. हेलमेट उतारता है. क्यूंकि वो जो कुछ भी करने आया था, हो चुका है. अगले मैच तक इनकी ज़रुरत अब नहीं पड़ेगी. इतनी ही देर में सामने वाली टीम के प्लेयर्स उसके पास आ जाते हैं. सबसे पहले वो बॉलर आता है जिसे उसने कुछ दिन पहले ही कहा था, "तुझे पूरी ज़िन्दगी मारा है मैंने, अब बातें बनाने का कोई फ़ायदा नहीं." उससे हाथ मिलाते हुए वो खड़ा होता है. खड़ा होकर अपना दाहिना हाथ हवा में उठाता है और आसमान में देखता है.
मैच से ठीक पहले एक ताज़ा रिटायर हुआ तेज़ बॉलर ट्वीट कर के उन्हें चिढ़ाता है. कहता है कि ये बहुत बोलता है लेकिन पिछले वर्ल्ड कप में उसका मुंह बंद हो गया था. अगले ही दिन इस बॉलर ने इंडिया की जीत की बधाई दी.
Mitchell Johnson
विराट कोहली. जिसके नाम को लेकर तमाम वर्डप्ले होते हैं. क्यूंकि नाम में विराट है. जब भी इंडिया को जिताते हैं, जो कि अक्सर जिताते हैं, इंडिया की जीत को विराट जीत कहा जाता है. टी-20 में डेढ़ हज़ार रन पार कर चुका ये प्लेयर वन-डे मैच में 25 सेंचुरी मार चुका है. पचासे हैं 36. माने 143 खेले हुए मैचों में 61 बार 50+ का स्कोर बना चुके हैं. टी-20 में 42 मैचों में 15 बार 50 के ऊपर का स्कोर. लेकिन इनके स्टैट्स की और बात नहीं करेंगे. स्टैट्स अपने मालिकों को बांध देते हैं. वो उन्हें सिर्फ 22 यार्ड की पट्टी तक सीमित कर देते हैं. हाथ में एक बल्ला पकड़े.

विराट कोहली स्टैट्स के ऊपर उठ चुके हैं. जैसे सचिन कभी उठ गए थे. शायद शारजाह में कैस्प्रोविच को उसके सर के मीलों ऊपर छक्का मारने के बाद.




कोहली सचिन की गद्दी संभालने की राह पर हैं. कोहली अब वो सुकून देने लगे हैं जो सचिन देते थे. अच्छी बात ये है कि मेरी मां कोहली की बैटिंग देखती है. सचिन की
Kohli bowing to Sachin after scoring 50 against Bangladesh
Kohli bowing to Sachin after scoring 50 against Pakistan

नहीं देखती थी. उन्हें लगता था कि उनके सचिन की बैटिंग देखने से वो आउट हो जायेगा. कहने में अजीब लगता है पर कोहली टीम इंडिया के लिए चेज़ करते वक़्त सचिन से बेहतर बैट्समैन बन चुके हैं. एक सच ये भी है कि प्लेयर्स को आपस में एक दूसरे से कम्पेयर करना उनके साथ सबसे बड़ी नाइंसाफ़ी होती है. लेकिन क्या करें, आदत जैसी भी कोई चीज़ होती है.
श्री लंका के ख़िलाफ़ होबार्ट में क्वालीफ़ाई करने के लिए 320 का टार्गेट मिला था. 40 ओवर में बनाना था. 320 रन. 240 गेंद में. कोहली ने 86 गेंद में 133 मारे. मलिंगा के सातवें ओवर में 24 रन मारे थे. कहते हैं कोहली ने उस दिन मलिंगा की आत्मा को मार दिया था. उसके बाद से बस उनका शरीर गेंद फेंके जा रहा है. दिसंबर 2014 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ पहले टेस्ट में दोनों इनिंग्स में सेंचुरी मारी. ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ सेंचुरी मारना कैल्कुलस समझ लेने से भी मुश्किल काम होता है. यहां कोहली दोनों सेमेस्टर में टॉप किये घूम रहे थे.
मालूम है, कहा था स्टैट्स की बात नहीं करेंगे. लेकिन क्या करें, आदत है. कोहली की भी आदत है. सामने वाले को धूल चटाने की. उसे आटे दाल का भाव बताने की. अपने सामने किसी को न टिकने देने की. आउट होता है तो चेहरे पर वो भाव दिखते हैं जैसे किसी बच्चे का खिलौना छीन लिया गया हो. झुंझलाता है. कोसता है. खुद को. यहां ये सचिन से बहुत अलग है. सचिन ग़लत आउट होने पर एक हल्की सी मुस्कान लिए बल्ला बगल में फंसाये निकल लेते थे. कोहली खुद को एक्सप्रेस करते हैं. सामने वाले से बतकही करनी हो या उसे चुप कराना हो, कोहली से कोई सीखे.
एमआरएफ़ का स्टीकर लगा है बल्ले पे. कभी सचिन के पास होता था. होता तो स्टीव वॉ और लारा के बल्ले पर भी था लेकिन सचिन, सचिन हैं. वो अजर और अमर हैं. बाकी सभी मॉर्टल हैं. ऐसा लारा ने कहा था कभी.

एमआरएफ़ के स्टीकर वाला बल्ला जब भांजता है तो लगता है बॉलर को तमाचा मारा है. आवाज़ आती है कड़ाक की. जैसे कांच का एक बड़ा मर्तबान गिर के टूटा हो.




 
बॉलर का कॉन्फिडेंस ज़रूर टूट जाता है. बॉल ज़्यादा टाइम नहीं लेती बाउंड्री तक पहुंचने में. बल्ला बन्दूक में बदलता है और गेंद गोली में. बीच में कोई चाह कर भी नहीं आना चाहता.
कोहली का पहला वर्ल्ड कप. 2011. बांग्लादेश से पहला मैच. सहवाग 175 मार रहे थे. कोहली ने भी 83 गेंद में 100 रन मारे थे. ये इनिंग्स ऐसी है जिसके बारे में बहुत ही कम बात की जाती है. लेकिन ये इनिंग्स कोहली की तमाम शानदार इनिंग्स की शुरुआत थी. इस बैटिंग ने बांग्लादेश को तहस नहस किया था. बॉक्सिंग में तमाम मार पीट के बाद एक नॉकआउट पंच मारा जाता है. जिसके बाद विरोधी अपने पैरों पे दोबारा नहीं खड़ा हो पाता. सहवाग ने उस इनिंग्स में मारपीट की थी. नॉकआउट पंच कोहली ने दिया था. बेशर्म हो कर मारा था ढाका में.
Virat Kohli

कोहली बड़े मैचों के प्लेयर बन चुके हैं. वर्ल्ड कप में अब वो उसी भार को लेकर खेलते हैं जो हम सचिन के कंधों पर डाला करते थे. इसी कोहली ने सचिन को 2011 वर्ल्ड कप जिता के अपने कन्धों पर स्टेडियम में घुमाया था. बाद में कहा भी था,

"24 साल सचिन ने देश को अपने कन्धों पर उठाया है, अब समय आ गया था कि हम उन्हें अपने कन्धों पर उठाएं."




 
बात में दम थी. मेच्योरिटी भी थी. कोहली से तेज़ मेच्योर होता हुआ क्रिकेट प्लेयर अब तक नहीं दिखा. सिचुएशन को पढ़कर खेलने वालों में अब इसका नाम भी शुमार हो चुका है.
आप बड़े प्लेयर यूं ही नहीं बनते. आस पास वालों का आपके बारे में बात करना ये साबित नहीं करता कि आप बड़े प्लेयर बन चुके हैं. बड़े प्लेयर्स के बारे में खुद उनके विरोधी बात करते हैं. जैसा कोहली के लिए होता है. मैच के ठीक बाद, वर्ल्ड कप से निकलने के बाद, ग्लेन मैक्सवेल ट्वीट करके बताते हैं कि कैसे उनकी पूरी टीम एक इंसान से मैच हार गयी - विराट कोहली.
Maxwell Tweet

मैंने सचिन को उनके शुरुआती दौर में खेलते नहीं देखा. देखा है तो सिर्फ यूट्यूब पर मुट्ठी भर वीडियोज़ में. लेकिन मैंने कोहली को खेलते देखा है.

सचिन अगर मेरे क्रिकेट के मर्यादा पुरुषोत्तम हैं तो कोहली भोलेनाथ हैं. इंडिया को इनके ताण्डव का इंतज़ार रहता है.



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