'मुस्लिम विरोधी' डोनाल्ड ट्रंप के नाम एक खुला खत
'मैंने देखा है तुम्हें उल्लास से वे कहानियां सुनाते हुए, जिसमें सुअर के खून में भीगी गोलियों से मुसलमानों को मार डालने की बात होती है. रिफ्यूजियों को 'सांप' कहते देखा है तुम्हें, मिस्टर ट्रंप.'
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फोटो - thelallantop
डोनाल्ड ट्रंप! नाम तो सुना ही होगा. अमेरिका के राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की रेस में सबसे आगे दौड़ रहे हैं. मार पैसे वाले आदमी. पर कुख्यात हैं अपने खुले मुस्लिम विरोध के लिए. कह दिया कि मुसलमानों की अमेरिका में एंट्री बंद हो जानी चाहिए. फिर बोले कि दुनिया के 27 परसेंट मुसलमान 'वेरी मिलिटेंट' नेचर के हैं.
तो ये शख्स जो है, वो दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क की दावेदारी कर रहा है. समर्थन करने वाले भी कम नहीं है, लेकिन आधी दुनिया आशंकाओं से भरी हुई है. लगता है, ट्रंप आ जाएगा तो पता नहीं क्या कर डालेगा. ऐसे में ट्रंप के नाम एक पत्रकार ने खुला खत लिखा है.
अमेरिका के नामी ब्लॉग 'ह्यूमंस ऑफ न्यूयॉर्क' के ब्रैंडन स्टैंटन ने डोनाल्ड ट्रंप के नाम फेसबुक पर एक लेटर चस्पा किया है. इस चिट्ठी में वह लिख रहे हैं कि वह क्यों ट्रंप को खारिज करते हैं, क्यों नापसंद करते हैं.
इस पोस्ट को 15 लाख से ज्यादा लाइक और 8 लाख से ज्यादा शेयर मिल चुके हैं. पढ़िए, इस चिट्ठी का हिंदी तर्जुमा.
मिस्टर ट्रंप,
मैं पॉलिटिकल न होने की पुरजोर कोशिश करता हूं. मैंने आपके कई साथी उम्मीदवारों के इंटरव्यू करने से मना कर दिया. एक झगड़ालू चुनाव में किसी का पक्ष लेकर मैं निजी रिश्तों को खतरे में नहीं डालना चाहता. मुझे लगा, 'शायद यह सही मौका नहीं है.' लेकिन अब मुझे लगता है कि हिंसा और पूर्वाग्रह का विरोध करने का कोई मौका सही नहीं होता. सही समय हर वक्त 'अभी' होता है. क्योंकि लाखों अमेरिकियों की तरह मैंने महसूस किया है कि तुम्हारा विरोध करना अब राजनीतिक फैसला नहीं है. यह एक नैतिक फैसला बन चुका है. मैंने तुम्हें रेसिस्ट तस्वीरें शेयर करते देखा है. मैंने तुम्हें रेसिस्ट झूठ रिट्वीट करते देखा है. चमड़ी के रंग की श्रेष्ठता को खारिज करने में मैंने तुम्हें 48 घंटे का वक्त लेते देखा है. मैंने देखा है तुम्हें खुशी से हिंसा को बढ़ावा देते हुए और तुम्हारे लिए मार-काट करने वालों की 'लीगल फीस अदा करने' का वादा करते हुए. मैंने देखा है तुमको, टॉर्चर के इस्तेमाल और आतंकवादियों के परिवार को मार डालने की वकालत करते. तुम्हें उल्लास से वे कहानियां सुनाते देखा है जिसमें, सुअर के खून में भीगी गोलियों से मुसलमानों को मार डालने की बात होती है. रिफ्यूजियों को 'सांप' कहते देखा है और यह कहते भी, कि इस्लाम हमसे नफरत करता है. [facebook_embedded_post href="https://www.facebook.com/humansofnewyork/posts/1207382856002479"] मैं एक पत्रकार हूं, मिस्टर ट्रंप. बीते दो सालों में मैंने खूब सारे इंटरव्यू किए हैं. इनमें सैकड़ों मुसलमान भी थे, ईरान, इराक और पाकिस्तान की सड़कों से, बेतरतीबी से चुने गए. मैंने 7 देशों में सैकड़ों सीरियाई और इराकी रिफ्यूजियों के इंटरव्यू किए हैं. और मैं कंफर्म कर सकता हूं- इनमें घिनौना कोई है तो तुम हो. हम में से जो लोग भी इस सब पर नजर रखे हुए हैं, वे तुम्हें खुद को रिब्रांड नहीं करने देंगे. तुम लोगों को जोड़कर रखने वाले नहीं हो. तुम 'प्रेसिडेंशियल' नहीं हो. तुम उस गुस्से के शिकार नहीं हो जिसे तुम महीनों से आनंद लेते हुए हवा दे रहे हो. तुम वो शख्स हो जिसने निजी सत्ता पाने के मकसद से पूर्वाग्रह और हिंसा को बढ़ावा दिया. फिर भी तुम्हारी बातें बिलाशक आने वाले महीनों में नहीं बदलेंगी. तुम हमेशा वही रहोगे, जो तुम हो. सिंसियरली ब्रैंडन स्टैंटन

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