विकास दुबे एनकाउंटर से ठीक पहले पुलिस की गाड़ी में क्या हुआ था?
ADG अमिताभ यश ने बताया, "कानपुर आते-आते विकास दुबे ने पुलिसवालों को..."

यूपी पुलिस और उसकी स्पेशल टास्क फोर्स इन दिनों उमेश पाल हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर चर्चा में है. इस मर्डर केस के कई आरोपी या तो पुलिस एनकाउंटर में मारे गए हैं या आपराधिक घटना में उनकी मौत हुई है. यूपी पुलिस की ये कार्रवाइयां कई लोगों को विकास दुबे एनकाउंटर की याद दिला गईं. 10 जुलाई 2020 को यूपी पुलिस ने एक विवादित एनकाउंटर में गैंगस्टर विकास दुबे को मार दिया था.
इस बेहद चर्चित एनकाउंटर को लेकर दी लल्लनटॉप ने यूपी एसटीएफ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) अमिताभ यश से सवाल किए. हमारे स्पेशल शो ‘बैठकी’ में संपादक सौरभ द्विवेदी ने अमिताभ से विकास दुबे के केस, यूपी पुलिस के कई एनकाउंटर और उन पर उठाए जाने वाले सवालों पर बात की. ADG ने बताया,
"हर एनकाउंटर बहुत ही कठिन कानूनी जांच से गुजरता है. एनकाउंटर के बाद उसकी मैजिस्ट्रेटिव जांच होती है. पुलिस द्वारा इन्वेस्टिगेशन होता है. पुलिस इन्वेस्टिगेशन भी ज्यूडिशियल जांच से गुजरती है. इसके बाद NHRC और स्टेट ह्यूमन राइट कमीशन भी अपनी इंक्वायरी करते हैं. अगर वो अपनी इंक्वायरी से संतुष्ट नहीं होते हैं तो अपनी इन्वेस्टिगेशन भी करते हैं. मीडिया, NGO भी जांच करते हैं. सभी के पास मौका होता है कि वो इन्वेस्टिगेशन से जुड़े, खासतौर पर मेजिस्ट्रेटेव जांच से."
विकास दुबे केस में न्यायिक जांच को लेकर अमिताभ यश ने बताया,
'विकास दुबे ने पुलिसकर्मियों को दबाया'"इस केस में न्यायिक जांच हुई थी. किसी ने भी आज तक STF पर कोई दाग नहीं लगाया. STF हमेशा से ही कानून के दायरे में काम करती रही है. लेकिन मौके पर कुछ और कह देना अलग बात है. मीडिया में कुछ कह देना अलग बात है. भारत एक लोकतांत्रिक देश है. इसलिए हम हर व्यक्ति का स्वागत करता हैं. जो सवाल पूछना चाहता है. ये उसका अधिकार है. उसका जवाब हम पूरे न्याय व्यवस्था के साथ इंक्वायरी में देते हैं."
ADG ने विकास दुबे एनकाउंटर के भी कई पन्ने खोले. उन्होंने बताया,
“विकास दुबे ने 8 पुलिसकर्मियों को छिपकर मारा और फिर फरार हो गया. जब उसने सरेंडर किया और वो कानपुर पुलिस को सौंपा गया तो उसकी बॉडी लैंग्वेज बहुत अजीब थी. ऐसा लग रहा था कि उससे बड़ा दब्बू (डरा हुआ) कोई नहीं होगा. लेकिन जैसे-जैसे वो कानपुर पहुंचता गया तो उसकी बॉडी लैंग्वेज पूरी तरह से परिवर्तित होती गई. वो गाड़ी की सीट के बीच में बैठा था. उसके दोनों तरफ पुलिस वाले बैठे थे.
विकास ने कानपुर पहुंचते-पहुंचते दोनों पुलिसवालों को अपनी बाहों से दबाना शुरू कर दिया. लेकिन पुलिस वालों ने इस बात को चुपचाप सहा. क्योंकि उनके साथ एक मुल्जिम जा रहा है तो उसको चोट पहुंचाना उचित नहीं है. विकास उन पुलिसवालों की हिरासत में था. अगर उसको कोई चोट आती तो वो इसके जिम्मेदार होते. तो मैं तो पुलिसवालों की सहनशीलता की दाद देता हूं. लेकिन जैसे ही एक्सीडेंट हुआ. तो विकास की फितरत फिर से बदल गई. वो वापस अपने उस रूप में आ गया जिसमें वो चंद दिनों पहले था.”
ADG ने माना कि विकास दुबे एनकाउंटर एक बड़ा केस था और इससे जुड़ी सभी बातों की जांच हुई है.
वीडियो: लल्लनटॉप बैठकी: UP STF चीफ़ अमिताभ यश ने अतीक मर्डर, विकास दुबे एनकाउंटर और मुख्तार अंसारी पर क्या बताया?

