सावन में मीटशॉप बंद करवाने वालों, क्या रमजान में रोजे रख लोगे?
दिल्ली से कुल 56 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर मौजूद दादरी तक पहुंचते-पहुंचते 'कावड़' शब्द अपने मायने बदल कर डर का पर्याय बन जाता है.

हमारे दिमाग में एक शब्दकोष होता है, जोकि किताबी शब्दकोष से एकदम अगल होता है, अलहदा होता है. वहां किसी शब्द के आगे उसका ब्यौरा नहीं बल्कि तस्वीर टंगी होती है. मसलन जब भी आपका साबका 'कावड़ यात्रा' शब्द से पड़ता है तो आपके दिमाग में किसम-किसम की छवि आ सकती हैं. किसी के दिमाग में आ सकता है सड़कों पर गुंडई करते, नशे में झूम रहे, भगवा पहने आवारा युवक, किसी के दिमाग में आ सकता है बिना रुके कई किलोमीटर चलते-चले जाने वाला भक्त. जो चलता जा रहा है और शिव जी का कोई सुंदर सा भजन गुनगुनाता चला जा रहा है.
दिल्ली से कुल 56 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर मौजूद दादरी तक पहुंचते-पहुंचते यह शब्द अगल ही मायने ले लेता है. यहां कावड़ कई बार डर का पर्याय बन जाता है. ख़ास तौर पर यहां के मीट कारोबारियों के लिए. बुधवार को स्थानीय पुलिस ने अपने एसएचओ राम सेन सिंह के आदेश जीटी रोड पर मौजूद सभी मीट की दूकाने और अंडे के ठेले बंद करवा दिए. राम सेन सिंह का कहना है कि एरिया के लोगों की भक्ति को देखते हुए जलाभिषेक तक कस्बे में अंडा व मीट आदि बेचने वाले और मांसाहारी होटलों को बंद करा दिया गया है. इससे पहले मंगलवार को कुछ हिंदूवादी संगठनों ने दादरी में मीट-अंडे की दुकानों को बंद करवाने की मांग की थी.

ऐसी मांग पिछले साल भी हुई थी. तब प्रदेश में सपा की सरकार हुआ करती थी. उस समय इस मांग पर प्रशासन ने कोई ख़ास तरजीह नहीं दी थी. इसके बाद गोरक्षा हिंदू दल ने जबरिया दूकाने बंद करवा दी थीं. साल भर में सूबे का निज़ाम बदल चुका है. लिहाजा प्रशासन की तरजीह भी बदल चुकी हैं.
इसी किस्म की कुछ मांग एक बार महाराष्ट्र में भी हुई थी. साल था 2015. 29 अगस्त से 5 सितंबर तक जैन धर्म का पर्युषण पर्व था. मुंबई नगर निगम ने यह तय किया कि जैन धर्म को मानने वाले लोगों की आस्था का खयाल रखते हुए पर्युषण पर्व के दौरान मुंबई में मीटशॉप और बूचड़खाने बंद रहेंगे. नगर निगम के इस कदम पर शिवसेना के मुखपत्र सामना में अगिया-बैताल संपादकीय छपा.
"मुलसमानों के पास जाने के लिए कम से पकिस्तान तो है. अगर जैनों की धार्मिक कट्टरता इसी तरह बढ़ती रही तो उन्हें सोचना चाहिए कि वो कहां जाएंगे? अगर ये 'धरतीपुत्रों' से उलझे तो इन्हें धूल चाटनी पड़ जाएगी. हमें इनके पैसे के साम्राज्य को खाक करने में ज्यादा वक़्त नहीं लगेगा."
इस संपादकीय को लिखने वाले के तौर पर उद्धव ठाकरे का नाम दर्ज था. इसी तरह पकिस्तान में भी एक कानून जो कहता है कि रमजान के दौरान सार्वजानिक जगहों पर खाना-पीना गैरकानूनी है. आप यहां थोड़ा ठहरिए. सोचिए. सोचिए कि हम किस तरफ बढ़ रहे हैं. यह कितना जायज है कि कोई अपनी धार्मिक मान्यता आप पर थोंप दे. आप खुद समझिए. पढ़िए और गुनिए. हमारा काम यहां खत्म होता है.
ये भी पढ़ें

