राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कारों का आयोजन जारी है. सोमवार 8 नवंबर, 2021 कोरामनाथ कोविंद ने कई हस्तियों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों को उनके योगदान के लिए पद्मपुरस्कारों से सम्मानित किया. इनमें से कुछ की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा है. उनमेंसे एक हैं तुलसी गौड़ा जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. ‘जंगलों कीइनसाइक्लोपीडिया’ और ‘वन देवी’ जैसे नामों से प्रसिद्ध तुलसी आज तक तीस हज़ार सेअधिक पौधे लगा चुकी हैं और वन विभाग की नर्सरी की देखभाल करती हैं. अपने काम औरपद्मश्री सम्मान मिलने के अलावा एक और वजह से तुलसी गौड़ा सोशल मीडिया में चर्चा काविषय बनी हुई हैं. दरअसल, सोमवार 8 नवंबर को जब तुलसी गौड़ा राष्ट्रपति से सम्मानलेने पहुंचीं तो उन्होंने पारंपरिक पोशाक पहन रखी थी. वो नंगे पैर थीं. उसी दौरानउनकी एक तस्वीर खिंच गई जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें पीएम नरेंद्र मोदी औरगृह मंत्री अमित शाह 'वन देवी' को प्रणाम करते दिख रहे हैं. कई लोगों ने इस तस्वीरपर प्रतिक्रिया दी है. जैसे एक ये,ऐसे किरदारों को जब पदम् पुरस्कार मिलते है तो खुद पुरस्कार का सम्मान उनकीक्रेडिबिलिटी बढ़ती है। सामान्य दृष्टि में पैर में चप्पल नही तन ढकने भर कपड़े नहीपर उपलब्धि ऐसी देश के 2 सबसे ताकतवर आदमी समाने हाथ जोड़े बैठे है।pic.twitter.com/oNzF2eVjG3— Ajay Dubey (@AjayDindian) November 8, 2021 संघर्ष से भरा रहा जीवन तुलसी गौड़ाका जन्म 1944 में कर्नाटक के एक गांव होन्नली स्थित हक्काली जनजाति में हुआ. वो जबमात्र 2 वर्ष की थीं तभी उनके पिता चल बसे. परिवार गरीब तो पहले से ही था, पिता केजाने के बाद खाने के भी लाले पड़ गए थे. ऐसे में तुलसी को छुटपन से ही एक दिहाड़ीमज़दूर के रूप में काम करना पड़ा. वो अपनी मां के साथ एक स्थानीय नर्सरी में कामकरती थीं. तुलसी ने अपनी मां के साथ 35 साल तक दिहाड़ी मजदूर के रूप में नर्सरी मेंकाम करना जारी रखा. इसके बाद उनके काम को मान्यता देने के लिए एक स्थायी पद कीपेशकश की गई. इसलिए नहीं कि उनको इतने साल हो गए थे काम करते-करते, बल्कि उनके वनसंरक्षण और वनस्पति विज्ञान के व्यापक ज्ञान के चलते उन्हें नर्सरी में स्थायीनौकरी दी गई. परमानेंट हो जाने के बाद तुलसी गौड़ा ने इस नर्सरी में अगले 15 वर्षोंतक काम किया और 70 वर्ष की उम्र में रिटायर हुईं.हाड़ मांस का जर्जर सा शरीर शरीर पर पारंपरिक धोती हाथ में पद्म श्री और चेहरे परगजब की खुद्दारी !!कर्नाटक से 77 बरस की तुलसी गौड़ा हैं। 30 हजार से ज्यादा पेड़ लगा चुकी हैं। खेतकी पगडंडी से चलकर राष्ट्रपति भवन की लाल कालीन पर इन नंगे कदमों का पहुंचना,वाकईसुखद है 🙏 pic.twitter.com/4cJSqIwdRa — Abhinav Pandey (@Abhinav_Pan) November8, 2021 तुलसी गौड़ा ने किसी तरह की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली है. मौक़ा ही कबमिला? तुलसी सिर्फ़ 10 साल की रही होंगी जब उनका विवाह कर दिया गया. जब तक 50 सालकी हुईं पति की भी मृत्यु हो गई. लेकिन औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद, न केवलजंगलों को लेकर उनके ज्ञान की चर्चा दूर दूर तक होती है, बल्कि इस ज्ञान के माध्यमसे उन्होंने पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में बहुत बड़ा योगदान दिया है. जगलों केलिए सबसे आवश्यक ‘मदर ट्री’ की पहचान करने से लेकर बीजों की गुणवत्ता पहचानने तक,उनके इस अर्जित ज्ञान का लोहा बड़े-बड़े वैज्ञानिक मानते हैं. और इसकी ताकीद करताहै उन्हें मिलने वाला भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान.Known as the ‘Encyclopedia of Forest’, Tulasi Gowda from Karnataka is a Tribalwoman known for possessing endless knowledge of plants and herbs. She will behonoured with the Padma Shri Award for Social Work - Environment. #PeoplesPadma#PadmaAwards2020 pic.twitter.com/CCbOvkw0AO— MyGovIndia (@mygovindia) January 25, 2020 हालांकि अपने ‘इनसाइक्लोपीडिया’ होनेके बारे में पूछे जाने पर वो कहती हैं कि पता नहीं कैसे पर उन्हें लगता है कि वोजंगल की भाषा बोल सकती हैं. तुलसी गौड़ा ने अपने गांव में महिलाओं के अधिकारों केलिए भी काम किया है. एक बार जब उनकी जनजाति की एक महिला को बंदूक की नोक पर धमकायाजा रहा था तो तुलसी उस महिला की सहायता के लिए आगे आईं. उनका कहना था, ’अगर अपराधीको दंडित नहीं किया गया तो वो जोरदार विरोध करेंगी.’ तुलसी गौडा का लक्ष्य युवापीढ़ी को जंगलों की देखभाल के लिए प्रेरित करना है. वो कर्नाटक से आती हैं, जहां परदसियों वन्यजीव अभयारण्य और पांच राष्ट्रीय उद्यान हैं. तुलसी की जनजाति, हलक्कीवोक्कालिगा प्रकृति से जुड़ी हुई है और यहां महिलाएं धरती और वन की देखभाल करतीहैं. ऐसे में कर्नाटक को कई तुलसियों की ज़रूरत है. जो इस राज्य के और देश केइको-सिस्टम को बनाए रखने में अपना योगदान दे सकें.