5 साल से चल रही दुनिया की सबसे बड़ी दुश्मनी की कहानी
देखिए राजनीति कैसे बदलती है.
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फोटो - thelallantop
ट्रंप अमेरिका के प्रेसिडेंट बन चुके हैं. जनवरी में ओबामा उनको कार्यभार सौंप देंगे. तब तक दोनों लोग आपस में मिलेंगे और बातें करेंगे. एक-दूसरे से सीखेंगे और समझेंगे. इस तस्वीर में दोनों मुस्कुरा रहे हैं. क्योंकि दोनों ने अभी बात की मिलकर. व्हाइट हाउस में. दोनों लोग जब बाहर आये तो दोनों ने किसी भी प्रश्न का जवाब देने से मना कर दिया. हाथ मिलाया और कहा कि हमारे रास्ते एक ही हैं.
उसके बाद ओबामा ने कहा- हमारे लिए ये बहुत जरूरी है कि सब साथ मिलकर काम करें. पार्टी लाइन के ऊपर. मेरी ट्रंप के साथ बहुत अच्छी बात हुई है.ट्रंप ने कहा- मिस्टर प्रेसिडेंट, आपके साथ बात करना मेरे लिए सम्मान की बात है. ओबामा एक अच्छे आदमी हैं.किसी को लग नहीं रहा था कि मिलने के बाद इतने अच्छे तरीके से दोनों पेश आयेंगे. क्योंकि ये हमेशा की तरह का चुनाव नहीं था. ट्रंप ने शुरूआत ही की थी ओबामा के खिलाफ. अमेरिका में प्रेसिडेंट बनने के लिए अमेरिका में पैदा होना बहुत जरूरी है. ट्रंप ने एकदम से शुरू कर दिया कि ओबामा अमेरिका में पैदा ही नहीं हुये थे. और ये चीज सिर्फ एक व्यक्ति के ऊपर नहीं थी. इसने अमेरिका में रह रहे हर अफ्रीकन-अमेरिकन पर सवाल उठा दिया कि ये लोग अमेरिकन नहीं हैं. बाहरी हैं. फ्रस्ट्रेटेड जनता को अचानक से एक मौका मिल गया. दोषी मिल गये थे. अमेरिका की बुरी हालत के. हेट कैंपेन चालू हो गया.

ट्रंप ने फिर ओबामा के बारे में कहा- ये आदमी अमेरिका के इतिहास का सबसे अज्ञानी आदमी है.ओबामा ने ट्रंप को सलाह दी- एक बढ़िया रूल है. जब लोग चिल्लाने लगें तो किसी भी सवाल का जवाब ना दो. चुप हो जाओ.
ओबामा ये भूल गये कि ट्रंप के आगे कौन चिल्लायेगा. जिस आदमी का इतना दीदा है कि टेप पे बोलता है कि मैं लड़कियों की वजाईना पकड़ लेता हूं. और फिर जीत भी जाता है. क्या पता कि ओबामा के रूल अब काम ना करें. ट्रंप कुछ अपना ही रूल लेकर आएं.
ट्रंप ने कहा- हमारे पास बहुत काम है. हम लोग इमिग्रेशन के मुद्दे को देखेंगे. अमेरिका में इससे दिक्कत है. हेल्थ के मुद्दे को भी देखेंगे. जॉब्स के बारे में भी देखना है. ट्रंप ने देखने के आगे कुछ नहीं बताया.
जब ओबामा अमेरिका के प्रेसिडेंट बने थे तो अमेरिका में बड़ा उत्साह आ गया था. पहला अफ्रीकन-अमेरिकन. नेटिव लोगों के लिए ये बड़ी खुशी की बात थी. पर अमेरिका तो अमेरिका है. दुनिया में हर जगह हाथ डाले हुए है. ओबामा ने वादा किया कि मैं अमेरिका के सारे हाथ खोल दूंगा. इस चक्कर में अमेरिका के हाथ कई जगह और फंस गये. पर ओबामा ने इसका दोष किसी पर डाला नहीं. पता था कि राजनीति ऐसे ही चलती है. जाने का वक्त भी आ गया. इससे पहले कि वो अपनी सत्ता किसी काबिल इंसान के हवाले कर दें, डोनाल्ड ट्रंप आ गये. ट्रंप ने वो बात बोलनी शुरू कर दी, जो अमेरिका ने कभी सुनना नहीं चाहा था. सीधा अमेरिका में रह रहे मैक्सिकन, मुसलमान सब पर अटैक कर दिया. अमेरिका की जनता अपने नैतिक प्रोपगैंडा को ढो रही थी. ट्रंप के बोले पर नाक-भौं सिकोड़ रही थी. पर दिल ही दिल में खुश हो रही थी कि कोई तो बोला. सच ही तो है. आखिरकार नफरत के आधार पर किये गये कैंपेन पर ट्रंप जीत ही गये.
अब जो भी हो, ट्रंप प्रेसिडेंट बन ही गये हैं. ओबामा मुस्कुरा रहे हैं. क्योंकि उनको पता है कि क्या हुआ है. अब डैमेज जितना कंट्रोल कर लिया जाये, उतना बेहतर है.
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