The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • travelogue of a bihari young man who is doing a bag pack trip of Europe

चंचल मन 1 : मैं यहां जोर से हंसता हूं तो लोग घूरने लगते हैं.

निर्मल वर्मा और मिलान कुंदेरा वाले प्राग में भटक रहे एक बिहारी बालक की डायरी

Advertisement
pic
3 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 4 फ़रवरी 2016, 09:14 AM IST)
Img The Lallantop
बसंत में, जो कि आने को है इधर की तरफ, यूं नजर आता है प्राग (फोटो- फेसबुक)
Quick AI Highlights
Click here to view more
अविनाश चंचल मेरा दोस्त है. हमारे बीच उम्र का एक दरमियान है. फिर भी. अभी ये लिख रहा हूं तो बचपन का एक फुटनोट याद आ गया. कानपुर में मेरे केमिस्ट्री टीचर संजय चौहान कहते थे. अपनी उमर के लोगों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए. या तो बड़ा पकड़ो या छोटा. क्योंकि उनसे कुछ सीख पाओगे. कुछ बता पाओगे. साथ वाले तो उसी पिनक में होंगे, जिसमें तुम बजरा रहे हो.
avinash chanchal profile pic
प्राग में अविनाश चंचल

अविनाश से एक बहनापा है. कम ही लड़कों के साथ हो पाता है. खैर, अब जो है, तो उसी के भरोसे एक हक जता दिया. और नतीजा यहां नीचे है. वो इन दिनों यूरोप घूम रहा है. कुछ काम, कुछ तफरीह. इधर कुछ दिनों से फेसबुक पर उसकी तस्वीर नजर आ रही थी. स्लेटी सुंदरता पर टंका एक पीला मफलर.
मैंने इसरार किया. उसने इकरार किया. दी लल्लनटॉप के लिए ट्रैवलॉग सा कुछ लिखने का. हूबहू क्या बनेगा. पता नहीं. और न पता होने में ही संभावनाओं की सुंदरता बेल सी चढ़ आती है.
अब आप चंचल नजर से एक शहर घूमिए. तब तक हम उसके नक्शे पर उभरे अगले शहर की धुन गुनती तस्बीह खोजते हैं.
- सौरभ द्विवेदी
 


प्राग मेरे लिये अननोन शहर नहीं था. यूरोप जाऊंगा ऐसा कभी सोचा नहीं था. लेकिन प्राग देखने का मोह हमेशा रहा. यह संयोग है कि पहली यूरोप यात्रा प्राग से ही शुरू हुई. प्राग में कोई उस तरह के टूरिस्ट प्लेस को देखने नहीं गया हूं. लेकिन टहला हूं. खूब. शहर के इस छोर से उस छोर तक. पूरे शहर को प्रेम से सहेज कर रखा गया है. हर गली, हर मुहल्ला, हर घर, हर चर्च, हर सड़क यादों में संजोने लायक है. टहलते-टहलते निर्मल वर्मा के ‘वे दिन’ याद हो आते हैं, तो फ्रांज, टीटी, रियाना भी याद आ जाते हैं. उनके यहां बिताये मुफलिसी और प्रेम के दिन भी याद आते हैं.
charles bridge prague
शहर को जोड़ने वाला मशहूर चार्ल्स ब्रिज

प्राग प्रेम है. सरसराती हुई बर्फीली हवा है. पैदल चलते लोग हैं. बर्फ के चहबच्चे हैं. बीयर और कैफे हैं. इतिहास से भी पहले से चली आ रही इमारतें हैं. कम्युनिस्ट शासन के जर्जर होने के किस्से हैं. सड़कों का खालीपन है. उस पर चल रहा अकेलापन है. लचकती-लड़खड़ाती ट्राम है. ओवरकोट में लिपटे लोग हैं.
street music prague
स्ट्रीट फूड तो आपने खूब सुना होगा, यहां स्ट्रीट म्यूजिक का लुत्फ लीजिए

बस है. कैसल है. चार्ल्स ब्रिज है. बल्तावी नदी है. संगीत है. म्यूजियम है. हाउसफुल थियेटर हैं. राइटर्स हैं. मिलान कुन्देरा का जिरोमिल है. काफ्का की डायरी है. स्प्रिंग रिवॉल्यूशन है. वेलवेट रिवॉल्यूशन का बना बाजार है. हर कोना फोटो है. यादों में कैद होने लायक.
ganpati in europe prague
यहां भी गणपति बप्पा मोरया के सहारे भिक्षाम देहि का चलन है

प्राग एक सपना था. अब प्राग पूरा है. प्राग में लोग विनम्र, शांत और बहुत सफिस्टकैटिड हैं. लेकिन सहज भी. खामोश इतने कि मुख्य सड़क पर भी 'पिन ड्रॉप साइलेंस' पसरा रहता है. कहीं हॉर्न की आवाज तक नहीं सुनी. है तो ट्राम की खड़खड़ाहट. लोगों का खुसुर-पुसुर आपस में बतियाना. सड़कों पर स्वाभाविक ही लोग मेरे जोर-जोर से बोलने, ठहाका लगाकर हंसने पर घूरकर देखने लगते हैं. लेकिन इस में भी हल्की सी मुस्कुराहट होती है.
prag 1

प्राग एक टीस भी है. 1989 तक यहां कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार थी. पूरे चालीस साल. कम्युनिस्ट जमाने की ढेरों कहानियां यहां बिखरी हुई हैं. चालीस साल पहले यहां एक कम्युनिस्ट नेता हुए, च्यूबेक. उन्होंने सिस्टम को डेमोक्रेटिक बनाने की कोशिश की. सोवियत रूस को पसंद नहीं आया. टैंक उतार दिए गए शहर में. लोगों की आजादी को सील कर दिया गया. स्लोवाकिया की रहने वाली एक दोस्त ने कल बताया, कि कैसे कम्युनिस्ट शासन के दौरान यहां लोग अपने दोस्तों से भी बात करने से डरते थे. अगर दो लोगों के बीच लड़ाई हुई और किसी ने शिकायत कर दी कि अमुक आदमी बुर्जुआ की तरह बात कर रहा है तो उसकी नौकरी चली जाती थी. उसकी पत्नी की भी. बच्चों को स्कूल से निकाल दिया जाता था. सोवियत रूस की निंदा करना ईशनिंदा कानून जैसा ही था.
"attachment_9254" align="alignnone" width="600"

Advertisement

Advertisement

()