ये आर्टिकल अंतरा ने एक पर्सनल ब्लॉग के लिए लिखा था. फिर इसे द लेडीज फिंगर परछापा गया. हम इसे आपको अंतरा की अनुमति से ट्रांसलेट कर पढ़ा रहे हैं.-------------------------------------------------------------------------------- छह साल पहले, यानी 18 साल की उम्र में मेरा एक अजीब सा एक्सीडेंट हुआ. मुंबई कीबारिश में पीपल के पेड़ की एक टहनी मेरे ऊपर गिर पड़ी. मेरा बांया पांव दो टुकड़ों मेंटूट गया. और मेरे दांए पांव की एड़ी और टखना ऐसे कचर गए कि वो ठीक नहीं हो सकते हैं.कई दर्दनाक घंटों के बाद मुझे पता चला कि मेरा दांया पांव काटना पड़ेगा. पहले कुछहफ्ते अजीब से धुंध में बीत गए. मेरे डॉक्टर और दोस्तों ने मुझे बताया कि मैंनॉर्मल लाइफ जी सकती हूं. डरने, परेशान होने की कोई बात नहीं है. लेकिन वो पूरी तरहठीक नहीं थे. तब मैं हॉस्पिटल में ही थी, मैंने परदे के पीछे किसी को बातें करतेसुना. वो फुसफुसा रहे थे, 'बेचारी. अब इससे शादी कौन करेगा. परिवार वाले भी आखिर कबतक खयाल रखेंगे इसका?' मैंने सुना, हंसकर टाल दिया. ये सोचकर कि ये तो बस किसी कोजिंदगी में पीछे खींचने के मकसद से कही हुई बात है. लेकिन जैसे-जैसे टाइम बीततागया, ये फुसफुसाहट मेरा पीछा करने लगी. और उस समय मैं बिलकुल टूट गई जब एक्सीडेंटके डेढ़ साल बाद उस लड़के ने, जिसे मैं पसंद करती थी, मुझसे कहा कि मुझे यूके याफ़्रांस शिफ्ट हो जाना चाहिए. जहां मेरी 'अपंगता' को लेकर लोग ज्यादा समझदारी से कामलें. उस उम्र में मेरे लिए 'अपंग' शब्द के साथ सामंजस्य बैठाना बहुत मुश्किल था(नहीं, मुझे रोने के लिए आपका कंधा नहीं चाहिए.) और कोई मुझे कभी डेट नहीं करेगा,ये ख्याल बहुत ही डरावना था. अपने आपको बचाने के लिए मैंने तय किया कि अब कभी इसडेटिंग के मामले में नहीं पड़ूंगी. पर एक साल बाद मैंने टिंडर जॉइन किया, यूं हीदोस्तों के साथ बैठकर दारू पीते हुए. मैंने सुन रखा था कि किस तरह से इस तरह कीडेट्स खतरनाक निकल सकती हैं. मैंने कभी नहीं सोचा था कि जिन लोगों को टिंडर पर देखरही हूं, उनसे कभी बात करूंगी, डेट करना तो दूर की बात है. लेकिन मुझे मेरा 'मैच'मिल गया. हमने चैट करना शुरू किया. वो मुझे अच्छा लगा. हमने तय किया कि किंग्ससर्कल पर मिलेंगे फ़िल्टर कॉफ़ी के लिए. और इतने दिनों में मैंने उसे अब तक नहींबताया कि मेरा एक पांव नहीं है. जिस दिन हम मिलने वाले थे, उसके एक रात पहले मैंनेपूरी हिम्मत जुटाई और उसे सब कुछ बता दिया. उससे ये भी कहा कि अगर वो सच जानने केबाद डेट पर नहीं आना चाहे, तो न आए. उसने तुरंत मैसेज पढ़ा. जवाब टाइप करना शुरूकिया. मुझे लगा कि जैसे वो टाइप ही करता चला जा रहा है. फिर मैसेज आया: 'मुझे पताहै. मैंने तुम्हें गूगल पर खोज कर इतना तो जान ही लिया था. पर मैं डेट पर क्योंनहीं आना चाहूंगा!' इतना हल्का मुझे शायद ही कभी महसूस हुआ हो. उसे मालूम था! उसनेमुझे गूगल पर सर्च करने का कदम उठाया! उसने मेरे पांव की कोई परवाह नहीं की! मुझेलगा जैसे मेरे पीछे बैकग्राउंड डांसर नाच रहे हों, लोग बाजे बजा रहे हों, और सब कुछएक बॉलीवुड के भारी-भरकम सीन में बदल गया हो. कॉफ़ी डेट अच्छी थी. लेकिन उस डेट सेभी अच्छा था उस डेट पर जाना. जिसने मेरे अंदर जान फूंक दी थी. शायद मैं इतनी बुरीनहीं थी. मैं घर वापस आई. और टिंडर पर ऐसे स्वाइप करने लगी जैसे बीते दो सालों काबदला ले रही हूं. वो दो साल, जिनमें मैंने डेट नहीं किया. एक साइंस का फैन तो बहुतही एक्साइटेड हो गया. ये सोचकर कि वो किसी सायबॉर्ग यानी ख़ास ताकतों वाली लड़की सेबात कर रहा है. कुछ लड़के मुझे बहादुर और प्रेरणादायक बोलते थे. वैसे टिंडर पर मेराअनुभव वैसा ही रहा, जैसा शारीरिक रूप से किसी 'नॉर्मल' लड़की का होता है. एक लड़का,जो मुझे टिंडर पर मिला था, लड़कियों की एक्सेल शीट मेंटेन करता था. उनको 'नाइस','क्यूट', 'इससे बात करना पसंद है', 'इससे सेक्स करना है', 'ये गर्लफ्रेंड हो सकतीहै' जैसी कैटेगरी में बांटकर रखता था. उसने मुझे क्यूट की कैटेगरी में रखा था, जानेक्यों. एक और था, जो अच्छा था, पर मैं उसके बारे में रोमैंटिक महसूस नहीं करती थी.उसने मुझसे पूछा था कि क्या मैं लड़कों को इसी तरह 'फ्रेंडज़ोन' करती हूं. एक ने बहुतसीरियसली पूछा था कि मेरी ड्रॉइंग तो बहुत अच्छी होगी क्योंकि मैंने कॉलेज मेंआर्ट्स लिया था. आपको सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन टिंडर पर जितने भी लोगों सेमिली, मैंने ये जाना है कि सचमुच कोई परवाह नहीं करता आपके शरीर की. मेरे लुक्स,मेरी अक्ल और मेरी सादगी बहुत थे. मैंने अपने आपको टिंडर पर ज्यादा से ज्यादाअवेलेबल किया. जो मुझसे नफरत करते उनको इग्नोर करना आसान होता गया. क्योंकि मुझेचाहने वाले उससे ज्यादा थे. इतनी डेट्स के बाद, मैं ये जरूर कहूंगी कि टिंडर परमिलने वाला हर लड़का सपनों के राजकुमार जैसा नहीं होता. लेकिन डेट करने में मज़ा आताहै. टिंडर पर मिला एक लड़का आज मेरा सबसे करीबी दोस्त है. एक है जो मेरी फेसबुकपोस्ट्स जब-तब लाइक करता रहता है. एक तो इसी जुगाड़ में लगा रहता है शादी के पहलेमुझसे एक हुक-अप कर ले. कुछ और हैं जो सिर्फ ये देखने आते हैं कि मैं अब तक सिंगलहूं या नहीं. मैंने डेढ़ साल पहले टिंडर छोड़ दिया. एक लड़के के साथ रिलेशनशिप में आनेके बाद, जो मुझे ऑफलाइन मिला था. मुझे नहीं लगता मैं टिंडर पर वापस जाऊंगी. लेकिनमैं हर टिंडर मैच से ये कह देना चाहती हूं (उससे भी जिसने मुझसे पूछा था, एक पांवही खराब है न, बाकी सब तो ठीक है?) कि मुझे ये अहसास दिलाने के लिए शुक्रिया कि मैंएक कमाल की लड़की हूं.--------------------------------------------------------------------------------ये आर्टिकल सबसे पहले सेक्शुएलिटी एंड डिसेबिलिटी ब्लॉग पर छपा था. ये भी पढ़ लो:गांव याद आता है तो मैं टिंडर पर टहल आता हूं 'मैंने समझा था टिंडर पर छिछोरा जिसे,वो तो फेल्प्स को हरा के मेडल ले गया'