वो तीन विवाद जिनके लिए हामिद अंसारी याद रखे जाएंगे
आधी रात के करीब हामिद अंसारी सदन में आए. उन्होंने चलती बहस को रोक कर अचानक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.
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फोटो - thelallantop
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17 जुलाई को होने जा रहा राष्ट्रपति चुनाव लगातार चर्चा में है लेकिन उसके ठीक 19 दिन बाद होने जा रहे उपराष्ट्रपति चुनाव पर कोई ख़ास चर्चा नहीं हो रही है. कुछ भी हो लेकिन यह तय है कि उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को तीसरा कार्यकाल नहीं मिलने जा रहा है. बीजेपी कभी भी उनकी हिमायती नहीं रही है. 2007 के उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी ने उनके खिलाफ नजमा हेपतुल्ला को उतारा और 2012 में जसवंत सिंह को. हालांकि दोनों ही अवसरों पर बीजेपी जानती थी कि उसके उम्मीदवार के जीतने की कोई उम्मीद नहीं थी. यह विरोध सांकेतिक ही था. यह तथ्य इस बात की तस्दीक करता है कि 6 मौलाना आजाद रोड से हामिद अंसारी की विदाई होने जा रही है.
अंसारी को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वो विवादों से दूरी बना कर रखने वाले शख्स हैं. लेकिन आदमी न चाहते हुए भी कई बार विवादों में पड़ जाता है. इस मौके पर हम आपको उन तीन विवादों के बारे में बता रहे हैं, जिनके लिए अंसारी हमेशा याद रखे जाएंगे.
#1 वो अचानक सदन स्थगित करना...
ये 30, दिसंबर 2011 की बात है. संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन था. आधी रात होने को थी. कोहरा पूरे शहर को अपने आगोश में ले चुका था. इधर सदन में चल रही एक बहस माहौल को गर्म किए हुए थी. यह बहस थी, जन लोकपाल बिल की. सत्ता में बैठी कांग्रेस राज्यसभा में बुरी तरह से घिरी हुई थी.
आधी रात के करीब हामिद अंसारी सदन में आए. उन्होंने चलती बहस को रोक कर अचानक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. विपक्ष ने आरोप लगाया कि उपराष्ट्रपति सदन में सत्ता पक्ष को बचाने के लिए आए थे. इस घटना के बाद बीजेपी अंसारी से ख़ार खा गई. इसी अदावत के चलते बीजेपी ने 2012 में अंसारी के खिलाफ जसवंत सिंह को सांकेतिक विरोध के लिए मैदान में उतारा.
#2 योग से परहेज
21 जून 2015, भारत के अलावा दुनिया के 190 देश पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही थी. राजपथ पर हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरा मंत्रिमंडल मौजूद था. बड़े संवैधानिक पद पर मौजूद एक आदमी इस कार्यक्रम में मौजूद नहीं था, हामिद अंसारी.
महासचिव राम माधव का ट्वीट इस सिलसिले में आ गया. उन्होंने उपराष्ट्रपति की गैरमौजूदगी पर सवाल खड़े कर दिए. हालांकि बाद में उन्होंने यह कहते हुए अपना ट्वीट हटा लिया कि उन्हें पता नहीं था कि उपराष्ट्रपति की तबीयत नासाज़ है.
शाम ढलते-ढलते उपराष्ट्रपति दफ्तर से इस मामले में सफाई आ गई. राम माधव ने कुछ घंटे पहले अंसारी को घेरने के लिए ट्वीट किया था, अब उनकी सरकार इस मामले में घिरती हुई दिखाई दे रही थी. अंसारी ने सफाई दी कि उन्हें इस कार्यक्रम का निमंत्रण तक नहीं भेजा गया था.
इस जून 21 को तीसरी मर्तबा योग दिवस मनाया लेकिन कमाल की बात यह है कि हामिद अंसारी ने अब तक किसी भी योग दिवस में शामिल नहीं हुए हैं.
#3 तिरंगे की बेअदबी या फिर सबसे अदबदार
योग दिवस से छह महीने पहले गणतंत्र दिवस की परेड के तुरंत बाद हामिद अंसारी नए विवाद में घिर गए. इस गणतंत्र दिवस के मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे. जब तिरंगा लहराया जा रहा था तो उसके नीचे खड़े थे प्रणब मुखर्जी, उनके एक बगल में खड़े थे हामिद अंसारी और दूसरी बगल में खड़े थे ओबामा. ओबामा के करीब खड़े थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर. जब तिरंगा लहराया जा रहा रहा था, उस वक़्त ओबामा और अंसारी को छोड़कर सभी तिरंगे को सलामी दे रहे थे.
इसके बाद विवाद खड़ा हुआ कि देश के उप राष्ट्रपति तिरंगे तक का सम्मान नहीं करते. उन्होंने तिरंगे को सलामी देना तक जरूरी नहीं समझा. सोशल मीडिया पर उनको जमकर ट्रोल किया गया. इस बीच उपराष्ट्रपति कार्यालय के गुरदीप सिंह सप्पल ने ट्विटर के जरिए सफाई पेश की. इसमें कहा गया कि समारोह के मुख्य पदाधिकारी राष्ट्रपति थे. इसलिए प्रोटोकॉल के मुताबिक तिरंगे को सलामी राष्ट्रपति ही दे सकते हैं.
झंडा संहिता के अनुच्छेद 6 के अनुसार तिरंगे को लहराए जाने अथवा उतारे जाने के वक़्त, या फिर किसी परेड में तिरंगे के गुजरने के दौरान सिर्फ उस आदमी को सलामी देने का अधिकार है, जो यूनिफॉर्म में हो. उस समय तीनों सेना के सुप्रीम कमांडर के तौर पर राष्ट्रपति खुद मौके पर मौजूद थे. इसलिए उनके अलावा किसी और को सलामी देने की जरूरत नहीं थी. अंसारी सिर्फ इसलिए ट्रोल कर दिए क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को कॉपी करने की बजाय कायदे का खयाल रखा.
यह लेख सहयोगी वेबसाइट dailyo के लिए कुमार शक्ति शेखर ने लिखा है.
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महासचिव राम माधव का ट्वीट इस सिलसिले में आ गया. उन्होंने उपराष्ट्रपति की गैरमौजूदगी पर सवाल खड़े कर दिए. हालांकि बाद में उन्होंने यह कहते हुए अपना ट्वीट हटा लिया कि उन्हें पता नहीं था कि उपराष्ट्रपति की तबीयत नासाज़ है.
शाम ढलते-ढलते उपराष्ट्रपति दफ्तर से इस मामले में सफाई आ गई. राम माधव ने कुछ घंटे पहले अंसारी को घेरने के लिए ट्वीट किया था, अब उनकी सरकार इस मामले में घिरती हुई दिखाई दे रही थी. अंसारी ने सफाई दी कि उन्हें इस कार्यक्रम का निमंत्रण तक नहीं भेजा गया था.
इस जून 21 को तीसरी मर्तबा योग दिवस मनाया लेकिन कमाल की बात यह है कि हामिद अंसारी ने अब तक किसी भी योग दिवस में शामिल नहीं हुए हैं.
#3 तिरंगे की बेअदबी या फिर सबसे अदबदार
योग दिवस से छह महीने पहले गणतंत्र दिवस की परेड के तुरंत बाद हामिद अंसारी नए विवाद में घिर गए. इस गणतंत्र दिवस के मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे. जब तिरंगा लहराया जा रहा था तो उसके नीचे खड़े थे प्रणब मुखर्जी, उनके एक बगल में खड़े थे हामिद अंसारी और दूसरी बगल में खड़े थे ओबामा. ओबामा के करीब खड़े थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर. जब तिरंगा लहराया जा रहा रहा था, उस वक़्त ओबामा और अंसारी को छोड़कर सभी तिरंगे को सलामी दे रहे थे.
इसके बाद विवाद खड़ा हुआ कि देश के उप राष्ट्रपति तिरंगे तक का सम्मान नहीं करते. उन्होंने तिरंगे को सलामी देना तक जरूरी नहीं समझा. सोशल मीडिया पर उनको जमकर ट्रोल किया गया. इस बीच उपराष्ट्रपति कार्यालय के गुरदीप सिंह सप्पल ने ट्विटर के जरिए सफाई पेश की. इसमें कहा गया कि समारोह के मुख्य पदाधिकारी राष्ट्रपति थे. इसलिए प्रोटोकॉल के मुताबिक तिरंगे को सलामी राष्ट्रपति ही दे सकते हैं.
झंडा संहिता के अनुच्छेद 6 के अनुसार तिरंगे को लहराए जाने अथवा उतारे जाने के वक़्त, या फिर किसी परेड में तिरंगे के गुजरने के दौरान सिर्फ उस आदमी को सलामी देने का अधिकार है, जो यूनिफॉर्म में हो. उस समय तीनों सेना के सुप्रीम कमांडर के तौर पर राष्ट्रपति खुद मौके पर मौजूद थे. इसलिए उनके अलावा किसी और को सलामी देने की जरूरत नहीं थी. अंसारी सिर्फ इसलिए ट्रोल कर दिए क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को कॉपी करने की बजाय कायदे का खयाल रखा.
यह लेख सहयोगी वेबसाइट dailyo के लिए कुमार शक्ति शेखर ने लिखा है.
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