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कहानी इंडिया के सबसे रईस शहर मुंबई की, जो अब डूब रहा है

वो कहानी जो आज के लोगों को शायद पता नहीं होगी. इसकी सात हिस्सों में बंटी ज़मीन की, जोड़ने की और अजीब नामों की.

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2 जुलाई 2019 (अपडेटेड: 2 जुलाई 2019, 06:21 AM IST)
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मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया की वर्ष 1911 की तस्वीर. (फोटोः वीठी डॉट कॉम)
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इन 7 आइलैंड से मिलकर बना था मुंबई

#1. बूढ़ी औरत का आइलैंड (छोटा कोलाबा) ये आज के कोलाबा के उत्तर में था और सबसे छोटा भू-भाग था. इसे अल-ओमानी भी कहते थे कभी. क्योंकि यहां के मछुआरे मछली की तलाश में ओमान तक हो आते थे.
#2. वरली वरली का टापू वो हिस्सा है, जहां आज हाजी अली की दरगाह है. हालांकि इसका मुंबई शहर से जुड़ना काफी लेट हुआ. 1784 में.
#3. माज़गांव दक्षिण मुंबई का ज़्यादातर हिस्सा माज़गांव की ही देन है. 17वीं शताब्दी के अंत तक माज़गांव मुंबई शहर की शुरुआती शक्ल ले चुका था.
#4. परेल इतिहासकार बताते हैं कि 13वीं सदी में ये टापू राजा भीमदेव के कब्ज़े में था. बाद में इस पर पुर्तगालियों का कब्ज़ा हुआ. ये टापू चर्चा में तब आया जब 1770 में बंबई के गवर्नर विलियम हर्नबी ने अपनी रिहाइश यहां बनाई.
#5. कोलाबा कोलाबा का मतलब कोली समुदाय की जगह. कोली मछुआरों को कहा जाता है. कोलाबा से पहले पुर्तगाली इसे कंदील आइलैंड भी कहते थे.
6. माहिम मैजिम और मेजाम्बू जैसे और नामों से भी प्रचलित. राजा भीमदेव के शासन में ये उसकी राजधानी हुआ करती थी. बाद में मुस्लिम शासकों ने यहां कब्ज़ा किया. उनसे पुर्तगालियों तक जा पहुंचा, जिन्होंने उसे अंग्रेजों को सौंप दिया.
#7. बॉम्बे टापू मुंबई का सबसे पुराना टापू जिसका ज़िक्र मौर्यकालीन इतिहास तक में मिलता है. आज की डोंगरी से लेकर मालाबार हिल तक फैला हुआ है बॉम्बे टापू.
रतकतरतरतकर

बंबई को दहेज़ में दिया गया था

मुंबई की जर्नी पुर्तगाली शासन से भारत गणराज्य बनने तक की रही. बीच में अंग्रेज़ भी आए. 16वीं सदी में पुर्तगाली शासकों ने इसे हासिल किया और 100 साल से ज़्यादा तक इस पर कब्ज़ा बनाए रखा. जब 17वीं सदी में इंग्लैंड के सम्राट चार्ल्स-2 ने पुर्तगाली राजकन्या कैथरीन डी ब्रिगेंज़ा से शादी की, तो पुर्तगालियों ने इस शहर को ही दहेज के तौर पर अंग्रेजों को दे दिया. चार्ल्स-2 को तो अंदाज़ा भी नहीं था कि उसके पल्ले कितनी ज़मीन पड़ी है. बाद में ये भी खुला कि इन टापुओं पर कम्युनिकेशन की बड़ी समस्या है. लिहाजा इनको ईस्ट इंडिया कंपनी को किराए पर दे दिया गया. महज़ 10 पाउंड सालाना पर.
कंपनी ने बिखरे हुए इन सातों द्वीपों को जोड़ दिया. धीरे-धीरे. वो ऐसा दौर था जब इन सातों द्वीपों पर अगर कोई सबसे बड़ी समस्या थी, तो वो थी एक के बाद एक आने वाली बीमारियां. कंपनी ने हौले-हौले इन पर काबू पाया. धीरे-धीरे मुंबई को एक शक्ल मिलती गई. 1687 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना बस्ता सूरत से उठाया और मुंबई में ला पटका. तब इस इलाके का नाम बॉम्बे प्रोविंस हुआ करता था. इससे पहले पुर्तगाली इसे 'बॉम बोहिया' कहते थे. 18वीं सदी में इसे आज वाले मुंबई की शक्ल देने का काम तेज़ी से हुआ.
कैथरीन डी ब्रिगेंज़ा.
कैथरीन डी ब्रिगेंज़ा.

 जिसने टापुओं को जोड़ा उसकी नौकरी चली गई

इन टापुओं को जोड़ने का एक मेजर प्रोजेक्ट 1708 में मुमकिन हुआ. माहिम और सायन के बीच एक कॉजवे बनाया गया. कॉजवे माने एक ऐसी सड़क जो पानी के ऊपर से हो कर गुज़रती हो और दो टापुओं को जोड़ती हो. 1772 में सेंट्रल मुंबई में आनेवाली बाढ़ की समस्या को टैकल करने के लिए महालक्ष्मी और वरली को जोड़ा गया. इस कारनामे को सबसे पुराना गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन भी कहा जाता है और आरोपी हैं तत्कालीन गवर्नर विलियम हर्नबी.
विलियम हर्नबी ने पूरे 1 लाख रुपए खर्च करके ये कंस्ट्रक्शन किया. इसके लिए अप्रूवल लेने की चिट्ठी उन्होंने इंग्लैंड में कंपनी के डायरेक्टर्स को भेज दी थी. हर्नबी को उम्मीद नहीं थी कि उनका प्रपोजल रिजेक्ट होगा. इसलिए उन्होंने जवाब का इंतजार किए बगैर काम शुरू कर दिया. उधर प्रपोजल रिजेक्ट हुआ. पूरे एक साल बाद जवाबी चिट्ठी आई. लेकिन तब तक कॉजवे बन चुका था. हर्नबी के नाम पर उसका नामकरण भी हो चुका था - हर्नबी वेल्लार्ड. इसने डोंगरी, मालाबार हिल और वरली को जोड़ दिया था.
बहरहाल विलियम हर्नबी को नाफ़रमानी की सज़ा मिली और उनकी ‘नौकरी’ चली गई.
हर्नबी वेल्लार्ड. (फोटो:अलामी)
हर्नबी वेल्लार्ड. (फोटो: अलामी)

समंदर पर अतिक्रमण करने का सबसे बड़ा उदाहरण उमरखेड़ी की खाड़ी का है. ये खाड़ी इलाका बॉम्बे को माज़गांव से अलग करता था. आज इस इलाके का नाम पायधोनी है. इस नाम से भी हमें क्लू हासिल हो जाता है. मराठी में पायधोनी का मतलब पांव की धुलाई है. समंदर यहां चट्टानों के पैर धोता था. ये समंदर से ज़मीन वापस लेने का पहला केस था.

पहाड़ियों को समतल किया, दलदल में मलबा भरा

इस सारी प्रक्रिया में खूब उठापटक हुई. जलभराव पर पुश्ते बनाए गए, पहाड़ियों को समतल किया गया, दलदली इलाकों में मलबा भरकर उन्हें पक्का बनाया गया. 19वीं सदी के अंत तक सारे टापू एक दूसरे से जुड़ चुके थे. शहर मुंबई का क्षेत्रफल बढ़ कर 484 स्क्वायर किलोमीटर हो चुका था.
इसी बीच 1853 में एशिया की पहली रेलवे लाइन बिछाई गई. मुंबई से लेकर ठाणे के बीच. भूमध्य सागर और लाल समंदर को जोड़ने वाले सुएज कैनाल के बन जाने के बाद, बॉम्बे बंदरगाह अरब सागर में यकायक महत्वपूर्ण हो उठा. 19वीं सदी के ख़त्म होते-होते बॉम्बे एक खूबसूरत शहर का रूप ले चुका था.
20वीं सदी की शुरुआत में ही बॉम्बे की जनसंख्या 10 लाख तक पहुंच चुकी थी. कलकत्ता के बाद बॉम्बे दूसरा सबसे बड़ा शहर था.
पायधोनी की ये तस्वीर 18वीं सदी की है.
पायधोनी की ये तस्वीर 18वीं सदी की है.

 मुंबई और उसके इलाकों के अजीब नाम ऐसे पड़े

# बॉम्बेः इसका मतलब होता है - "एक खुला हुआ शहर". क्योंकि व्यापारियों के लिए ये भारत का प्रवेश द्वार था, साथ ही पूरी दुनिया के लिए खुला था. गेटवे ऑफ़ इंडिया इसी का प्रतीक है.
# मुंबईः मछुआरों की देवी मुंबादेवी के नाम पर रखा गया था जो उनकी कुल देवी मानी जाती हैं.
# माटुंगा: ये संस्कृत का शब्द है. इसका मतलब है हाथी. कहते हैं कि 13वीं शताब्दी में राजा भीमदेव यहां अपने हाथी रखते थे.
# सायन: एक समय में सायन का इलाका यरुशलम के यहूदी पुजारियों का था. सायन स्टेशन के पास एक छोटी सी पहाड़ी है, जिस पर इन पुजारियों ने एक चैपल बनवाया था. जिसका नाम 'Mount Zion'  है. इसी से नाम पड़ा सायन.
# चिंचपोकली: मराठी में ‘चिंच’ इमली को कहते हैं. इस इलाके में पहले इमली के पेड़ों की भरमार हुआ करती थी. इसी से नाम पड़ा चिंचपोकली.
# दादर: दादर का मतलब है सीढ़ी. मुंबई के 7 टापुओं तक पहुंचने के लिए इस इलाके का सीढ़ी की तरह इस्तेमाल होता था. इसीलिए इसका नाम दादर पड़ा.
# कुर्ला: कुर्ला नाम ‘कुरली’ से आया है. स्थानीय भाषा में कुरली केंकड़े को कहते हैं. केंकड़ों की यहां भरमार थी, इसलिए कुर्ला.
# घाटकोपर: ये थोड़ा आसान क्रैक करना. ये जगह थोड़ी उंचाई पर है. यहां आने के लिए एक ‘घाट’ से गुज़रकर आना होता था. स्थानीय लोगों से जब इस जगह के बारे में पूछा जाता तो वो कहते घाट के ऊपर. बिगड़ता हुआ वो बन गया घाटकोपर.
आज़ादी के बाद बॉम्बे शहर का सफ़र यूं रहाः 1947 में जब अंग्रेज़ गए, तब भी मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी नहीं था. हालांकि उसका और विस्तार हो चुका था. उत्तर में साष्टी (सैल्सेट) के टापुओं तक उसकी सीमा बढ़ाई गई. 1955 के बाद बॉम्बे का बंटवारा करके महाराष्ट्र और गुजरात बने ऐसी मांग उठी थी. कुछ ये भी कहते थे बॉम्बे को यूनियन टेरिटरी बनाया जाए. यानी ऐसा प्रदेश जिस पर सीधे केंद्र का शासन हो. संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन ने इसका प्रखर विरोध किया. 105 लोगों की कुर्बानी के बाद 1 मई 1960 को महाराष्ट्र बना और मुंबई को उसकी राजधानी बनाया गया. 1970 में मुंबई ने कलकत्ते को पछाड़ दिया, भारत का सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाला शहर बनने के मामले में. 1995 को इस शहर ने बॉम्बे से शिफ्ट कर के मुंबई नाम को अपनाया.
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