1एक मेडिकल स्टोर है. उसके सामने एक मजदूर खडा है. उसे दवाई लेनी है. उसकी बेटी कीतबियत खराब है. दवाई ढाई सौ के लगभग की आई, उसके पास सत्तर रुपये थे, बाकी पांच सौका नोट था, झिकझिक चली. दुकान वाले को खुल्ले पैसे ही चाहिए थे, अंत में दुकान वालेने 500 भी नहीं लिए. दवाई दे दी. कहा, अब खुल्ले नहीं हैं तो क्या बच्ची बीमार रहनेदें. होगा तो दे ही देगा.2 एक ई-रिक्शे वाला था, उसे 10 रुपये देने थे. 50 का नोट दिया. खुल्ला नहीं था,चिल्लर दिया, छह रुपये में मान गया. क्या करता? मुस्कुरा के चला गया.3 मकान मालकिन से किराने की दुकान वाले ने दो हजार का नोट लिया, हजार के खुल्लेलौटाए, 135 और देने थे. कागज पर लिख दिया. वो कागज लेकर लौट आईं.--------------------------------------------------------------------------------जबसे बड़ा पैसा सिर्फ कागज रह गया, तब से कागज का भी मोल हो गया. जबसे बड़े नोट बंदहुए, हमें पता लगा पैसा बड़ा नहीं होता. पैसा सबसे बड़ा नहीं होता. आदमी बड़ा होता है.2000 आया. मिलेनियम सुनने को आया, एक सुबह हम उठे और लगा सब नया हो गया. मैं हमेशासे चाहता था ऐसा कुछ फिर हो. एक रोज़ लगे कि कुछ बदल गया है. एक वक़्त मेराक्रांतियों में भरोसा था, लगता था किसी सुबह सब बदलेगा. बदल गया, मेरा सपना पूराहुआ. अभी मुश्किलें बहुत हैं, लेकिन इस बुरे वक़्त में भी बहुत कुछ अच्छा हो रहा है.सौ की नोट दो दिन चल रही है. पता चल रहा है, ऑफिस के पास घर लेना कितना अच्छा है.सौ के नोट से कितने काम हो सकते हैं. पैसे की वैल्यू पता चल रही है. मकान मालिक सेकहा पैसे ले लो, चेक दे देता हूं. महीने की दस तारीख को महीना पूरा होता है, उननेमना कर दिया. मैंने कहा ट्रांजेक्शन कर देता हूं, मना कर दिया. जो मकान मालिक दसतारीख के किराए के लिए एक तारीख से पूछने लगे सैलरी आ गई है? वो ऐसा व्यवहार करे तोसमझिए क्या कुछ नहीं बदला है. इस वक़्त देश एक है. सारा देश एक साथ खडा है. एटीएम कीलाइन में, बैंक की लाइन में. ये वो मौक़ा है जब पता लगता है, हम एक राष्ट्र काहिस्सा हैं, जहां हम सबको एक तरह से एक फैसले से फर्क पड़ता है. इस वक़्त न कोई हिंदूहै, न मुसलमान, न मद्रासी, न पूर्वोत्तर का. सारे हिन्दुस्तानी हैं. सबके पास पैसेकम हैं. सब चाहते हैं बैंकों से लाइन खत्म हो, उनकी जेब में पड़े पैसे खत्म होने सेपहले. एक राष्ट्र के तौर पर आप चीजें महसूस कर रहे हैं, इस बात से फर्क नहीं पड़ताकि अगला क्या सोचता है, किस तबके से है, कितना कमाकर धरे है. उसकी पॉलिटिक्स क्याहै. आज सब बराबर हैं. जब तेरे पास हों तब दे देना. राष्ट्रीय सूत्र बन गया है. लोगपैसे बचाने लगे हैं. पैदल चलने लगे हैं. अब डेढ़ किलोमीटर के लिए पचास रुपये देनाअखरने लगा है. कार वाले ऑटो वाले में आ गए. पेट्रोल-डीजल वालों ने भी हजार-पांच सौलेना बंद कर दिया है. ऑटो वाले रिक्शे में आ गए, रिक्शे वाले पैदल आ रहे हैं. औरपैदल वाले खुद को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं. आदमी ने बाहर का खाना छोड़ दिया,तला-छना बेकार होता है, ट्रांस फैट से बचना चाहिए. घर का खाना बेस्ट हो गया है. घरके खाने में भी फिल्टर लगे हैं. प्याज से मुंह गंधाता है, टमाटर में कैरोटेनॉयड्सहोते हैं जो इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं. उसका बीज ज्यादा खा लें तो पथरी होजाती है. चाय-सुट्टा छूट गया है. ऑफिस में जो बार-बार चाय पीने के लिए बाहर निकलतेथे, अब नहीं जाते, जाने कौन-कौन साथ हो ले और कितने की चपत लग जाए. कोई साथ नहींजाता तो दरबार नहीं लगती काम ज्यादा होता है. लोग ऑफिस में काम करते हैं. ओवर टाइमकरते हैं, ताकि रात घर लौटने को कैब मिले. किराए के पैसे ही बचें. बुरी आदतें छोड़रहा है, शराब के ठेकों पर हर कहीं कार्ड नहीं चलते. आदमी सतर्क रहता है, सजग रहताहै, पैसे बचाने के लिए, क्राइम से बचने के लिए. और अब यूं भी सतर्क रहना चाहता हैकि कोई क्राइम न करबैठे, नो पार्किंग में गाड़ी न लगा जाए, स्पीड लिमिट न क्रॉस करे,ताकि जुर्माना न देना पड़े. कुछ बुरा करे तो हर्जाना न देना पड़े. सड़क पर हॉर्न भीज्यादा नहीं बजाता है. जमानत के पैसे बचा लेना चाहता है. आदमी, आदमी पर भरोसा करनेलगा है. ये नोट न चलने के टाइम पर इंसानों में भरोसे का वक़्त है.--------------------------------------------------------------------------------सोनम गुप्ता से पहले ये बन चुके हैं 'नोट लेखकों' का निशानाअब भी जिसका रंग न छूटे, नोट वही तो जाली हैनोटबंदी से लौटा बार्टर सिस्टम, 3 किलो गोभी दो, 1 किलो मछली लोप्याज खरीद कर 2000 के नोट की फोटोकॉपी ही थमा गयाक्या लोग नेपाल में खपा रहे हैं हजारों करोड़ का काला धन और नकली नोट?कौन सा ATM पैसा उगल रहा है, पता करने का सिंपल तरीकाये मशीन देखो, 500-1000 के नोट खुल्ले कर रही है!2000 के नोट पर अब गांधी की जगह आपकी फोटो!ATM की लाइन में लगने से पहले यहां जान लो, पैसे मिलेंगे या नहींसलाम ATM में पैसे भरने वालों को करो, जो कई रातों से सोए नहीं