प्रवीण झा. पेशे से डॉक्टर हैं. रेडियोलॉजिस्ट. ये वाले डॉक्टर क्या करते हैं, मैंनहीं जानता. लेकिन आदमी हरफनमौला हैं. तकरीबन साल भर हो रहा है इनको नॉर्वे मेंरहते. यानी हमारे लिए ये बलम परदेसी हैं. अपनी मिट्टी से दूर ये उसी की महक में खोएरहते हैं. यहां के बारे में सोचना नहीं भूलते. लिखना नहीं भूलते. यहां पुराने नोटबैन हुए तो भूचाल आ गया. डॉक्साब भी थोड़ा तड़पे. फिर अपनी अभी की कर्मभूमि परमोजूद करेंसी का कलेवर लिख भेजा. हमारे लिए. आपके लिए. ओवर टू प्रवीण. आज जब पांचसौ-हजार के नोट लेकर हाहाकार मचा है, तो एक नजर उन देशों पर डाला जाए जहां नोट काप्रयोग लगभग एक दशक से ना के बराबर है और सरकार नोट छापना बंद करने पर विचार कर रहीहै. मैं नॉर्वे में लगभग 11 महीने रह चुका हूं और अब तक बस तीन बार ए.टी.एम. सेपैसे निकाले हैं. इस बीच मैनें रोड साइड कबाब भी खाए हैं और अखबार भी खरीदे हैं. परकहीं नकद की जरूरत नहीं पड़ी. जिसे भारत में Paytm या mPay कहते हैं, वैसी योजनायहां गांव-गांव तक लोकप्रिय है. आप बस अपना फोन नंबर बताएं, और पैसे सेकंडों मेंआपके एकाउंट में. कार्ड-स्वाइप की मशीन सबके पास नहीं हो सकती. मसलन मेरी पड़ोसीकुछ पुराने खेल के सामान बेच रहीं थी, अब ऐसे में कार्ड-स्वाइप मशीन उनके पासउपलब्ध नहीं. कई खरीदार आए और सारा माल बिना नकद बिक गया मोबाइल-पेमैंट के माध्यमसे. हालात ये हैं कि अब ए.टी.एम. मशीन भी 10 किलोमीटर पर एक हैं. कैश देने परदुकानदारों को सांप सूंघ जाता है. उनके पास खुदरा वापस करने को नकद नहीं. मैनें अबतक सारे नोट ठीक से देखे भी नहीं हैं. मुझे तो छोड़िए, नॉर्वे वासी भी ठीक से पहचाननहीं पाते. डेनमार्क, स्वीडन और नॉर्वे में होड़ मची है कि पहला कैश-लेस देश कौनहोगा? पूरे स्कैंडिनैविया मिलाकर बस 6% लेन-देन कैश में होते हैं. भारत कीसांख्यिकी पता नहीं, पर अमरीका में 46% लेन-देन कैश से है. 6% कैश-ट्रांजैक्शन! इस6% का मुख्य हिस्सा विदेशी पर्यटकों या शॉर्ट-टर्म व्यवसायियों का है. जो यहां रहगया, वो नकद भूल जाता है. आप इन देशों की सीमायें भी पार करें तो बिना नकद ही कामहोता है. सबके बैंक जुड़े हुए हैं. इसका एक अर्थ ये भी है कि बैंक से आप अचानक एकबड़ी रकम निकालना चाहें, उनके पास होगा ही नहीं. बिलियन क्रोनर कहीं भौतिक रूप मेंहैं ही नहीं, बस कम्प्यूटर पर एक नंबर हैं. पता नहीं नॉबेल वगैरा की रकम कैश मेंदेते हैं या मोबाइल से ट्रांसफर कर देते हैं? आज भी कई देशों में मुद्रा काबेंचमार्क सोना है. परंतु यूरोजोन में सोना नहीं, यूरो खुद एक बेंचमार्क है. यूरोके दाम घटने-बढ़ने से ही सभी देशों की मुद्रा घटती-बढ़ती है. मतलब बेंचमार्क हीभौतिक नहीं, बस एक संख्या है. एक बात और बता दूं कि स्वीडन मुद्रा लाने वाला पहलायूरोपीय देश है जो 1661 में मुद्रा लाया था. नॉर्वे भी इसी का हिस्सा था. अब मुद्राको लात मारने वाले पहले देश भी शायद यही बनें. पॉप ग्रुप ABBA के गायक ब्योर्नउलवायस इस कैश-लेस दुनिया के सबसे बड़े प्रचारकों में हैं जो कहते हैं कि नोट छापनाही बंद कर देना चाहिए. बही-खाता सिस्टम हो. आपने हजार रूपये का सामान खरीदा,दुकानदार हजार रूपए अमीर हो गया कागज पर. उसने लिख लिया, बैंक में दर्ज हो गया, बीचमें नोट की क्या जरूरत? अब प्रभाव देखिये. 2008 में स्वीडन में कुल 110 बैंक डकैतीया छिट-पुट लूट. 2011 में बस 16 और पिछले पांच साल से हुए ही नहीं. बैंक में नकद हीनहीं, तो लूटेंगे क्या? पर नुकसान भी हुआ. अब साइबर-क्राइम बढ़े हैं. कम्प्यूटर कीकारस्तानी से पैसे इधर से उधर. ये लूट सन् 2000 में लगभग 3000 दफे हुए और 2014 में20000 दफे. खैर ये तो 'हाइब्रिड सिस्टम' यानी कैश-कार्ड सिस्टम में भी संभव है. औरभारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही इनकी भी रक्षा करते हैं, तो अपनी तो कर ही सकते हैं.ब्लैक-मनी का असल अंत कैश-लेस प्रणाली से ही संभव है. न रहेगा कैश, न होगी ये ब्लैकमनी.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: बड़े नोट बंद हो जाने के बाद क्या-क्या अच्छा हो रहा है नोट बंदी केदौर में इस तरह का सिस्टम आता है काम में सोनम गुप्ता से पहले ये बन चुके हैं 'नोटलेखकों' का निशाना