जाकिर नाइक को 'चल भाग' कहने वालीं थेरेसा बनेंगी ब्रिटेन की नई PM
2016 की शुरुआत में ब्रिटेन में राजनैतिक माहौल एकदम मनमोहन सिंह की खामोशी की तरह था. 6 महीने में नरेन्द्र मोदी की सभाओं की तरह हो गया.
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फोटो - thelallantop
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2016 की शुरुआत में ब्रिटेन में राजनैतिक माहौल एकदम मनमोहन सिंह की खामोशी की तरह था. 6 महीने में नरेन्द्र मोदी की सभाओं की तरह हो गया. ब्रेक्जिट. बड़ी-बड़ी बातें. रोना-धोना. डिमांड कि 'ऐसा प्रधानमन्त्री चाहिए जो देश को एक रखे'.
इस साल प्रधानमन्त्री डेविड कैमरन 2019 में रिटायर होने का प्लान बना रहे थे. उनके उत्तराधिकार के लिए जॉर्ज ऑस्बोर्न और बोरिस जॉनसन एक-दूसरे को देखते हुए 'जिसकी पलक पहले गिरी वो हारा' खेल रहे थे. तभी एक बवंडर की तरह 'थेरेसा मे' उनके सामने से गुजरीं और दोनों की पलकें गिर गईं. जो लोग उत्तराधिकार की जंग में साजिद जाविद, निक्की मॉर्गन और स्टीफन क्रैब को भी कुदा रहे थे, चुप हो गए. रुथ डेविडसन को भी लोग चढ़ा रहे थे कि भाई हिम्मत ना हार, तू भी है रेस में. अब बोल रहे हैं भाई, रहने दे. अगली बार देखेंगे. तो थेरेसा मे ब्रिटेन की प्रधानमन्त्री बननेवाली हैं. ये हुआ कैसे? ऐसा हिंदुस्तान में तो देखा था. एक राज्य स्तर का नेता अचानक से अपनी ही पार्टी के बड़े-बड़े लोगों को पटखनी देता है. बहुमत लेकर प्रधानमन्त्री बनता है और बूढ़े शेरों को मार्गदर्शक मंडल में भेज देता है. थेरेसा ने क्या किया?
बेनजीर भुट्टो के साथ पढ़ी थीं थेरेसा
ब्रेक्जिट के पहले थेरेसा को बैक-बेंचर माना जाता था. होम सेक्रेटरी थीं थेरेसा. उनका जन्म 1956 में हुआ था एकदम मिडिल क्लास परिवार में. पहले गर्ल्स स्कूल, फिर कान्वेंट टाइप और अंत में ऑक्सफ़ोर्ड. ज्योग्राफी पढ़ने. पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमन्त्री बेनजीर भुट्टो इनके साथ पढ़ती थीं ऑक्सफ़ोर्ड में. जब तक ये कॉलेज पास करतीं, इनके पापा एक कार एक्सीडेंट में चल बसे और कुछ समय बाद मां भी. फिर थेरेसा ने बैंक ऑफ़ इंग्लैंड में काम किया. बाद में साउथ लंदन से काउंसिलर चुनी गयीं. चुनाव लड़के 1997 में ब्रिटिश संसद पहुंचीं. इनकी काबिलियत से लोग दंग थे. 1999 में इनको 'शैडो कैबिनेट' में शामिल कर लिया गया. ब्रिटिश संविधान के मुताबिक विपक्ष भी संसद में एक कैबिनेट बनाता है जिसे शैडो कैबिनेट कहते हैं.मीडिया इनको बोरिंग मानती थी! पर थीं कड़ियल. 6 साल पहले जाकिर नाइक का ब्रिटेन वीजा कैंसिल कर दिया था.
थेरेसा कोई मंत्रमुग्ध करने वाली स्पीकर नहीं थीं. जनाधार भी बहुत ज्यादा नहीं था. ऐसा नहीं ही था कि इनकी एक बात, एक अदा पर जनता फ़िदा हो जाये. उसके विपरीत थेरेसा कड़ियल मिजाज की थीं. काम से काम रखने वाली. मीडिया इनको बोरिंग मानती थी. कोई कोई इनको खलिहर दिमाग का भी मानता था. 2010 में इनको 'होम ऑफिस' मिला. होम ऑफिस माने होम मिनिस्ट्री टाइप का. माइग्रेशन, टेररिज्म, लॉ एंड आर्डर जैसी चीजें इसके अंडर आती हैं. अभी पूरी दुनिया के साथ ब्रिटेन भी आतंकवाद, सीरिया से माइग्रेशन और 'नेशनलिज्म' वाले लोगों के गुस्से से निबट रहा है. तो होम ऑफिस बहुत ही चैलेंज वाला डिपार्टमेंट है. और थेरेसा पिछले 6 साल से इसमें होम सेक्रेटरी हैं. बहुत कम लोग इतने लम्बे समय तक इस पद पर रह पाए हैं. इन्होंने जब ऑफिस जॉइन किया, तब एक और दिक्कत थी. सिविल सर्वेंट सेक्रेटरी की बात ही नहीं मानते थे. हर बात में अपनी जिद. थेरेसा ने सबको काबू में किया.
फिर थेरेसा ने दो प्रोजेक्ट डिक्लेअर किए: 'माइग्रेशन को रोकना' और 'पुलिस में सुधार'. हालांकि अभी तक सब कुछ हो नहीं गया है पर लोग कहते हैं कि शुरुआत करना ही बड़ी बात है. पुलिस के लिए थेरेसा ने टॉम विनसर को पुलिस चीफ बना दिया. टॉम कभी पुलिस में नहीं रहे थे. और ये पहली बार हुआ कि कोई बाहर का आदमी पुलिस चीफ बना. और पहली बार ये भी हुआ कि पुलिस डिपार्टमेंट ने सेक्रेटरी के खिलाफ कैंपेन नहीं किया, जैसा कि पहले के सेक्रेटरियों के साथ होता था.
बांग्लादेश हमलों के बाद मीडिया में हलफा मचा रहा जाकिर नाइक 2010 में ब्रिटेन में 'लेक्चर' लेने जा रहा था. 5 साल का वीजा बनवा के. ब्रिटेन की मीडिया में हल्ला उठा कि ये आदमी ठीक नहीं है. उस वक़्त थेरेसा को होम ऑफिस संभाले एक महीना ही हुआ था. तुरंत आर्डर किया कि इसका वीजा कैंसिल करो. जाकिर को कहा गया: 'आप ऐसे कमेंट देते हैं जिससे लगता है कि आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं. ये स्वीकार नहीं किया जायेगा'.जाकिर को मुंबई एयरपोर्ट से लौटना पड़ा.2010 में थेरेसा इंडिया आई थीं. हैदराबाद पुलिस अकादमी में लेक्चर लिया था. बताया कि 2008 मुंबई हमलों को देखकर अपने यहां की पुलिस में बदलाव किए थे.
जासूसी के मामले में अमेरिका से थेरेसा की हुई भिड़ंत
फिर एक और मौका आया, जिसमें डिसीजन लेना आसान नहीं था. क्योंकि इस बार थेरेसा की भिड़ंत अमेरिका से थी. बहुत ही राजनीतिक और कानूनी दांव-पेच का मसला था. हुआ कि अमेरिका ने ब्रिटेन के एक आदमी गैरी मैककिन को अमेरिका के हवाले करने की मांग की. अमेरिका ने गैरी पर NASA और अमेरिकन मिलिट्री की खुफिया जानकारी चुराने का आरोप लगाया था. आरोप था कि 2002-03 के दौरान गैरी अमेरिका में अपने रिलेटिव के घर पर था. वहीं उसने इस अपराध को अंजाम दिया. अमेरिका ने इस घटना के बारे में कहा था: 'Biggest military computer hack of all time'. गैरी का कहना था कि मैंने जान-बूझकर कुछ चुराया नहीं. मैं तो ऐसे ही अपने काम की चीज खोज रहा था और ये सब मिल गया. मेरा ऐसा-वैसा कोई इरादा नहीं था. थेरेसा ने अमेरिका के आगे अपने कड़े इरादे दिखाए और गैरी को भेजने से मना कर दिया.अपनी पार्टी की ही ऐसी-तैसी कर डाली थेरेसा ने
थेरेसा के बारे में कहा जाता है कि उनसे कोई बात उगलवाना असंभव है. पर जब वो बोलती हैं तो फिर रुकती नहीं. 2002 में अपने एक भाषण में थेरेसा ने अपनी ही पार्टी पर जम के हमला बोला था. कंजर्वेटिव पार्टी बहुत दिन से डोलड्रम में थी. थेरेसा ने कहा कि अब सच स्वीकार कर लो. हमारी पार्टी को सुधारना पड़ेगा. गुजरे हुए 'महान' दिनों की याद में ना रहो, आगे की तरफ देखो. पार्टी के पुराने कार्यकर्ता आज भी कहते हैं कि थेरेसा पार्टी में हैं कैसे, पार्टी की इतनी झंड करने के बाद. पर उनके विरोधियों को भी उनकी बेबाकी और हिम्मत के बारे में पता है.
कहा जाता है कि थेरेसा कोई आइडियोलॉजी फॉलो नहीं करतीं. अपने दिमाग से काम करती हैं. सही और गलत का फैसला उसी मोमेंट में लेती हैं. इसकी झलक ब्रेक्जिट के दौरान मिली. थेरेसा ब्रेक्जिट के पक्ष में नहीं थीं. फिर वोटिंग हो गई और रिजल्ट आ गया. ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से बाहर हो गया. लाखों लोगों ने फिर से वोटिंग कराने की मांग की. पर थेरेसा ने कहा: ब्रेक्जिट मतलब ब्रेक्जिट. अब जो हो गया, हो गया. अब कोई बात नहीं. हालांकि इन पर आरोप है कि वोटिंग के दौरान ये पब्लिक में नहीं थीं. तो क्या इन्होंने प्रधानमंत्री का फ्यूचर पहले ही भांप लिया था? उसी हिसाब से तैयारी करने में जुटी थीं? कहा नहीं जा सकता. जो हो गया, हो गया.

