दुनिया खत्म होने जा रही है, चलो वीगन बन जाते हैं
वीगन बनने की बात पर आप प्रोटीन और दूसरी चीजें गिनाने लगते हैं, लेकिन असल में ये आप नहीं, बल्कि आपकी जुबान बोल रही होती है.


विचित्रा
ये विचित्रा अमरनाथन हैं. विचित्र हैं. उतनी ही, जितना होना चाहिए. ताकि सब अलग-अलग दिखें. एक रोज मिल गईं. खाने की थाली पर. दुनिया की तमाम किताबों का इंट्रो यहीं लिखा जाता रहा है. दस्तरखान. चार निवाले डाउन हुए और बातें वीगन गली की तरफ मुड़ गईं.
एक नवंबर वर्ल्ड वीगन डे होता है. विचित्रा वीगन हैं. हमें उनसे सहानुभूति है. इसलिए नहीं कि वो डेयरी वाली चीजें नहीं खातीं. इसलिए कि उन्हें एमबीए करना पड़ा. करना पड़ता है. बच्चे हैं. बड़े गलती करवा देते हैं. गलती है तो सही भी होगा. और विचित्रा को लिखना सही लगता है. जैसे एग्जाम में टीचर बोलते थे. सरल सवाल सबसे पहले सॉल्व करो. तो विचित्रा ने भी सबसे पहला आर्टिकल वीगन पर लिखा. लल्लनटॉप के लिए. जो वो हैं. आप समझें. ये क्या है. ये क्यों हैं.
मुझे हर चीज पर सवाल करने की अजीब सी आदत है. ये सिलसिला तब से चला आ रहा है, जब मैं सिर्फ सात साल की थी. मैंने भगवान के होने पर सवाल किया और मुझे बहुत ताज्जुब हुआ कि अगर वो इतना प्रतिष्ठित है, तो वो हमारे घरों में अलमारियों के चमचमाते कांच के अंदर क्यों बैठा रहता है. भगवान के लिए वो सिर्फ सजाने के लिए एक चीज भर नहीं हो सकता.
मेरे अंदर ये सब शायद मेरे पापा की वजह से आया. एक रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार में पैदा होने वाले मेरे पापा ने हर तरीके से नियम तोड़े. नॉनवेज न खाना भी उन नियमों में से एक छोटा सा नियम था, जो उन्होंने तोड़ा था. मेरी मां ने भी कुछ ऐसा ही किया. उन्हें खाना बनाना पसंद था, जिसकी वजह से हमें फिश करी, झींगा करी, मटन बिरयानी, फ्राई चिकन और स्कॉच अंडों जैसे इनाम मिलते थे. मैं नॉनवेज खाते हुए ही बड़ी हुई हूं. वैसे मेरी सवाल करने की आदत यहां भी बीच में आ गई.

मैं ये सोचने लगी कि ये सारा खाना असल में आता कहां से है? क्या इसके लिए किसी को मारा नहीं जाता होगा? जिसे हम महज 'नॉन वेज' कह देते हैं, वो असल में मछली, केकड़ों, बकरियों, मुर्गियों और सुअरों की प्रजातियां थीं. हम इन सबके लिए केवल एक ही नाम (नॉन वेज) क्यों दे देते हैं? क्या इसलिए कि हम सब इस सच का सामना करने से बच सकें कि हम जानवरों को मार डालते हैं?
14 साल की उम्र में मैंने नॉनवेज खाना छोड़ दिया था और इससे मेरे घरवाले बड़ा बेचैन हो गए. उन्होंने बहुत कोशिश की. तर्क दिए, डांटा, मनाया, मेहमानों के सामने मेरा मजाक उड़ाया, लेकिन कुछ भी काम नहीं आया. मैं बड़े-बड़े सफेद बालों वाले अपने कुत्ते डॉन को देखती रहती थी और सोचती थी कि अगर खाने के लिए हम इसे नहीं मार सकते, तो किसी दूसरे जानवर को आग पर कैसे चढ़ा सकते हैं?
प्रोटीन के बारे में मैं बड़ी साफ-सुथरी सोच और बीच-बीच मिले तानों के साथ बड़ी हुई हूं. अडल्ट होने पर मैंने डेयरी और एग इंडस्ट्री के बारे में रीसर्च करना शुरू किया और इसने मुझे बहुत डरा दिया. मुझे पता है कि अगर आपके अंदर जरा सी भी दया है, तो सच जानने के बाद आप डेयरी प्रॉडक्ट्स और अंडे खाना छोड़ देंगे. और तभी से मैं वीगन बन गई.
वीगन!!! अब आप पूछेंगे कि आखिर ये वीगन क्या होता है.
1. वीगनिज्म एक फिलॉसफी है. ये जिंदगी जीने का एक तरीका है, जिसमें आप जानवरों को कम से कम नुकसान पहुंचाते हैं. जो इस वीगनिज्म को फॉलो करते हैं, वो वीगन होते हैं.
2. वीगन किसी भी तरह का मांस, डेयरी प्रॉडक्ट, अंडे और शहद नहीं खाते हैं. वो सिल्क, लेदर या जानवरों पर टेस्ट किया गया कोई भी प्रॉडक्ट यूज नहीं करते हैं.
3. इंसान हर साल खाने के लिए लगभग डेढ़ खरब जानवरों को मार देता है. इसके अलावा लगभग दस करोड़ जानवरों पर एक्सपेरिमेंट और टेस्ट किए जाते हैं और ये टेस्ट आपके शैंपू जैसी मामूली चीजों के लिए किए जाते हैं.
अब आप 'उफ्फ!' कहते हुए सोचेंगे कि ये सब कितना कठिन है. अगर सब छोड़ देंगे, तो खाने के लिए बचेगा क्या?
मैं जब भी ये सवाल सुनती हूं, मुझे हंसी आ जाती है, क्योंकि नॉन-वीगन्स मांस खाते हैं, अंडे खाते हैं और दूध पीते हैं. लेकिन वीगन्स? वीगन्स टमाटर, गोभी, ब्रॉकली, कलीफ्लॉवर, मटर, तरबूज, आम, अमरूद, अखरोट, बादाम, काजू, चने, राजमा, दाल, बींस और लड्डू, इमरती, वीगन चीज़केक, वीगन कपकेक और मफिन जैसी मिठाइयां खाते हैं. और हां, यहां जगह कम है, वरना मेरे पास बताने के लिए बहुत लंबी लिस्ट है.
अब आप पूछेंगे कि न्यूट्रीशन का क्या? और प्रोटीन? अच्छा... तो आपको प्रोटीन चाहिए.
1. आपको प्रोटीन चाहिए? तो पालक या ब्रॉकली खाइए. अगर आपको यमी प्रोटीन चाहिए तो पीनट बटर भी खा सकते हैं.
2. क्या आपको ये पता है कि पौधे प्रोटीन से ही बनते हैं? लेकिन, उनमें सारा का सारा प्रोटीन ही नहीं होता है, इसलिए उन्होंने प्रोटीन्स जैसे बींस, मटर और बीजों के साथ खाया जाता है.
3. चलिए बीफ का उदाहरण लेते हैं. बीफ में 20% कैलोरी प्रोटीन की वजह से होती है, जबकि 80% सैचुरेटेड फैट की वजह से. फाइबर बिल्कुल भी नहीं. लेकिन राजमा और बींस में 25% कैलोरी प्रोटीन से आती है, 5% अनसैचुरेटेड फैट से और 70% कार्बोहाइड्रेट्स से. इसमें ढेर सारा फाइबर भी होता है. अब आप खुद ही चुन लीजिए.
4. ये प्रूव हो चुका है कि वीगन डाइट्स दिल के लिए अच्छी होती हैं और डायबिटीज में फायदा करती हैं.
लेकिन, अगर मैं उन जानवरों को नहीं खाती हूं तो? वो हर जगह फैल जाएंगे और उनकी तादाद बहुत ज्यादा हो जाएगी.
यकीन मानिए. ये आप नहीं, बल्कि आपकी चटोरी जबान बोल रही है. जितनी भी प्रजातियों को आज हम मारते हैं और खाते हैं, उनमें से कोई भी नेचुरल नहीं है. इन सभी को इंसान पैदा करता है और बड़ा करता है. हर एक को. इन्हें इसीलिए पैदा किया जाता है, क्योंकि आप इन्हें खाते हैं. जैसे-जैसे लोग धीरे-धीरे वीगन होते जाएंगे, इनकी तादाद अपने-आप कम हो जाएगी.
लेकिन दूध? कैल्शियन और विटामिन डी? आप बिना दूध के कैसे रह सकते हैं?

1. इस मिथ को सबसे ज्यादा प्रचारित किया गया है कि दूध हेल्दी होता है. सच तो ये है कि दूध बहुत ही एसिडिक (एसिडिक) होता है. जब ये पचता है, तो जोंक की तरह आपकी हड्डियों से पोषक तत्व खींच लेता है.
2. दूध बछड़े को बछिया बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. मुझे यकीन है कि आप लोगों में से कोई भी बछिया तो नहीं बनना चाहेगा. खैर, दुनिया की 65 से 75% जनसंख्या बचपन बीतने के बाद दूध में पाए जाने वाले शुगर 'लैक्टोज' को पचाने की क्षमता खो देती है. शायद आप भी इनमें से एक हों.
3. हरी सब्जियां, टोफू और प्लांट मिलक्स (mylks) कैल्शियन और विटामिन डी के बहुत अच्छे सोर्स हैं.
Plant mylk? वो क्या होता है? स्पेलिंग मिस्टेक?क्या आपको लगता है कि वीगन्स दूध नहीं पीते? असल में हमारे पास बहुत सारे ऑप्शंस होते हैं.
1. वीगन्स के लिए spelt mylk दूध का सोर्स होता है.
2. ये सोया, मूंगफली, काजू, चावल या फिर मेरे फेवरेट बादाम से भी आ सकता है.
लेकिन, मुझे दूध पसंद है और इसके लिए मैं किसी जानवर को परेशान नहीं कर रही हूं. मैं सिर्फ दूध पी रही हूं. तैयार हो जाइए, क्योंकि मैं आपको आपके दूध की सच्चाई बताने जा रही हूं.
1. दुधारू गायों को बहुत ही छोटी जगह में बांध दिया जाता है. इस वजह से वो हमेशा खड़ी ही रहती हैं और हिल-डुल भी नहीं पातीं.
2. उन्हें इंसानों द्वारा बेहद क्रूर तरीके से बार-बार प्रेग्नेंट किया जाता है. इंसान उनकी वजाइना में जबर्दस्ती अपना हाथ तक डाल देते हैं. ऐसा उनके अंदर वीर्य डालने के लिए किया जाता है और ये जरा भी प्रफेशनली नहीं किया जाता है.
3. बैलों/सांड़ों के अंडकोष में करंट लगाया जाता है, ताकि उनसे ज्यादा वीर्य निकाला जा सके, जिससे गाय को प्रेग्नेंट किया जा सके. इसमें क्या नेचुरल है?
4. बछड़ों/बछियों को जन्म के तुरंत बाद उनकी मांओं से अलग कर दिया जाता है, ताकि वो उनका दूध न पी सकें. और भगवानन न करे कि वो बछड़े हों. अगर वो बछड़े हुए, तो उन्हें तुरंत कत्लखाने भेज दिया जाता है. सीधे कहानी खत्म.
5. 10 से 12 साल तक जीने वाली एक गाय ऐसी परिस्थितियों में सिर्फ 3-4 साल ही जीती है. जब वो दूध देने लायक नहीं बचती, तो बीफ और लेदर के लिए उन्हें कत्लखाने भेज दिया जाता है. कुछ गायों की तो जिंदा रहते ही खाल उतार दी जाती है, ताकि लेदर मुलायम रहे.
दूध से तो मांस फिर भी अच्छा है. दूध में तो गाय की जिंदगीभर की गुलामी शामिल होती है.
लेकिन हम ये सब करते ही क्यों हैं?
तीन कारणों से: जानवरों के लिए, आपकी सेहत के लिए, धरती के लिए और इस तरह आपके के आसपास के लोगों के लिए.
1. UN हर साल एक रिपोर्ट निकालता है, जिसके मुताबिक अगर लोग वीगन जीवनशैली अपना लें, तो तेजी से बढ़ रही ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज को थामा जा सकता है. मीडिया ऐसी रिपोर्ट्स को उतना नहीं दिखाता, जितना दिखाया जाना चाहिए.
2. ग्रीनहाउस गैसों के 60% उत्सर्जन के लिए जानवरों को पाला जाना जिम्मेदार है. इस नुकसान को रोकने का सबसे आसान तरीका है वीगन हो जाना.
3. दूध का उत्पादन पर्यावरण के लिए बहुत खतरनाक है. गायों के एक गैलन दूध के लिए करीब दो हजार गैलन साफ पानी खर्च होता है, जबकि एक गैलन बादाम mylk के लिए 900 गैलन साफ पानी की जरूरत होती है.
4. दूध में कॉलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा होता है. गायों के जो एंटी-बायोटिक्स दी जाती हैं, उनकी वजह से इनके दूध से कैंसर भी हो सकता है.
5. मांस से पेट का कैंसर हो सकता है. यहां तक कि कई सारे मांस आपके अंदर कैंसर को धीरे-धीरे बढ़ावा देते रहते हैं.
वीगन होने की सबसे मुश्किल चीज क्या है?
असल दिक्कत हैं लोग. नॉन-वीगन्स इस सच्चाई से बहुत कम डरते हैं. वो इस पर यकीन नहीं करते और सच सुनकर वो आपसे लड़ने भी लगेंगे. किसी को ये सब बताने से पहले इस लड़ाई के लिए तैयार हो जाइए और याद रखिए, उनके अंदर अब भी दिल है. वो समझ सकते हैं. हां, कुछ और जरूरी चीजें भी हैं:
1. वीगन होने पर आपको पैकेज्ड खाना खोजने में परेशानी होगी. बिस्किट्स और स्नैक्स खरीदने से पहले आपको उसके इनग्रेडिएंट्स देखने होंगे, क्योंकि ऐसे कई प्रॉडक्ट्स में मिल्क पाउडर होता है.
2. आपका परिवार आपका बहुत विरोध करेगा, लेकिन अपनी बात पर डटे रहिए, क्योंकि जब उन्हें पता चलेगा कि वीगन फूड भी उतना ही टेस्टी है, जितना कि दूसरा खाना और अधिकांश भारतीय खाना असल में वीगन ही है, तो वो इसे अपना लेंगे.
3. भारत में बहुत कम वीगन रेस्ट्रॉन्ट्स हैं. लेकिन, वो हैं और अगर आप वाकई वीगन खाना चाहते हैं, तो आप आसानी से इसे हासिल कर लेंगे.
4. लगभग सारी मिठाइयां डेयरी प्रॉडक्ट्स से ही बनी होती हैं. हालांकि, अब कई ऐसी बेकरीज खुल गई हैं, जो घर में बने वीगन डोनट, कपकेक, चीज़केक और इंडियन मिठाइयां बेचती हैं.
और हां, हैपी वर्ल्ड वीगन डे. ये बहुत ही अजीब लगता है, लेकिन हम ये जानवरों और अपने आस-पास के लोगों के लिए करते हैं. हमें उम्मीद है कि ये प्लैनेट लंबे समय तक हेल्दी रहते हुए बना रहेगा और जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता बंद होगी.

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