'पापा रेप करवा मुझे प्रेगनेंट करवाना चाहते थे, ताकि मेरी शादी हो सके'
ऐसा कल्चर था मलावी का. लेकिन फिर उम्मीद की रौशनी बन कर आई एक औरत.
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फोटो - thelallantop
6 अप्रैल. 15 साल की सकीना कुमारी गांव से 30 किलोमीटर दूर बने SP के ऑफिस पहुंच कर बोली, "सर, 21 अप्रैल को मेरी शादी है. उसे होने से रोक लीजिये. मैं पढ़ना चाहती हूं. नौकरी करना चाहती हूं."8वीं क्लास में पढ़ने वाली सकीना झारखंड के कुल्लुकेरा गांव में रहती है. 4 भाई-बहनों में सबसे बड़ी है. मां-बाप पढ़ा नहीं पा रहे थे तो छत्तीसगढ़ के एक लड़के के घर बांध आने का बयाना दे आए. गांव वालों से पैसे उधार ले कर शानदार बाल-विवाह करने का प्लान था. शादी के कार्ड छप चुके थे.

फोटो क्रेडिट: द टेलीग्राफ
सकीना अपने टीचर ब्रह्मदत्त नायक के साथ पुलिस के पास आई थी.
ब्रह्मदत्त नायक कौन हैं, कोई नहीं जानता. कोई बड़े अकैडमिक नहीं होंगे. कोई पर्चे नहीं लिखे होंगे. किताबें भी शायद न छपी हों. मिडिल स्कूल टीचर हैं. पर एक जीवन को बर्बाद होने से बचाने वाले हीरो हैं. नन्ही आंखों में ख्वाब रखने वाले वाले हीरो.
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कुल्लुकेरा गांव से हजारों किलोमीटर दूर अफ्रीका में भी एक हीरो है. हिरोइन कह लीजिए. नाम है थेरीसा कचिन्दामोतो.
लोग इन्हें शादियां रुकवाने वाली औरत के नाम से जानते हैं. पर यूं ही नहीं. पिछले 3 सालों में 850 शादियां तुड़वा चुकी हैं. ऐसी शादियां जिसके 'बंधन' में सैकड़ों नाबालिग बच्चे बिन-मर्जी बांध दिए गए थे.

फोटो क्रेडिट: afkinsider
साउथ-ईस्ट अफ्रीका के मलावी देश के देजा शहर की रहने वाली थीं थेरीसा. पर पिछले 27 सालों से मलावी के ही ज़ोम्बा शहर के सिटी कॉलेज में सेक्रेटरी के पद पर थीं. लीडरों के खानदान से थीं. मलावी के शहरों के लीडर अब भी चुनाव से नहीं, जन्म से चुने जाते हैं. इनके खानदान वाले मलावी के 'चीफ' बनते आ रहे थे. थेरीसा तय कर चुकी थीं की कभी घर वापस जा कर सेटल नहीं होना है.
फिर एक दिन घर से बुलावा आया. बताया गया, तुम लोगों की नयी 'सरदार' हो. तुम्हें अच्छा लगे या बुरा, वापस आना ही होगा. 9 लाख लोग तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं.
थेरीसा के पास कोई विकल्प नहीं था. बोरिया-बिस्तर बांधा और देजा शहर की ओर निकल पड़ीं. थेरीसा देजा की नयी सीनियर चीफ बन गई थीं.
थेरीसा ने पारंपरिक तस्बीह गले में डाल ली. चीफ वाले लाल कपड़े पहन लिए. तेंदुए की खाल से बना पारंपरिक पट्टा सर पर बांध लिया. और निकल पड़ीं मिट्टी की दीवारों और घास से छप्परों से बने घरों में रहने वाले अपने लोगों के बीच. थेरीसा ने जो हालात देखे, वो सरकार या संयुक्त राष्ट्र की स्कीमों की हद से बाहर थे. इंसान, इंसान नहीं थे. औरतें, औरतें नहीं. बच्चे, बच्चे नहीं.
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क्या है मलावी की हालत?
2012 में संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वे के मुताबिक मलावी की आधे से ज्यादा लड़कियों की शादी 18 की उम्र से पहले हो जाती है. दुनिया के सबसे ज्यादा बाल-विवाह करवाने वाले 20 देशों में मलावी की रैंक 8वीं है. पिछले साल, यानी 2015 में मलावी की सरकार ने ये कानून बनाया कि बच्चे 18 की उम्र से पहले शादी नहीं कर पाएंगे. लेकिन अगर मां-बाप राजी हों, तो किसी भी उम्र में बच्चों की शादी की जा सकती है.ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में दुनिया के 182 देशों में मलावी 160वीं रैंक पर है. लोग इतने गरीब हैं कि काम में हाथ बटाने के लिए बच्चे पैदा करते जाते हैं. फिर लड़कियों को पाल नहीं पाते तो छोटी उम्र में ही उन्हें किसी दूसरे के मत्थे मढ़ देते हैं. ठीक उसी तरह जिस तरह हमारे देश के गांवों में देखने को मिलता है.
लड़कियों की पढ़ाई, सेहत या खुशी से मां-बाप का कोई वास्ता नहीं होता. हो भी कैसे, जब बच्चों की संख्या दर्जन भर हो. वो बस अपनी बेटियों के भार से मुक्त होना चाहते हैं. लड़कियां खेलने-खाने के दिनों में प्रेगनेंट हो जाती हैं. इस उम्र में उनका शरीर और वेजाइना इतने छोटे होते हैं कि वो जन्म देने लायक विकसित नहीं होते. उनके बच्चों को सर्जरी कर निकालना पड़ता है. और ये सिर्फ एक या दो केस नहीं हैं. ये मलावी की औरतों के जीने का तरीका है.

अपनी कमाई गिनता एक गरीब मलावी किसान. सोर्स: रॉयटर्स
बात बस इतनी ही नहीं. जिन लड़कियों की शादी तय हो जाती है, उन्हें वज़ू किया जाता है. यानी साफ़ किया जाता है होने वाले पति के लिए. इस रस्म को 'कुसासा फुम्बी' कहते हैं. इसमें लड़कियों को मर्दों को खुश करने की कला सिखाई जाती है. ऐसे सेक्स मूव सिखाए जाते हैं जिनसे इनका होने वाला पति सिड्यूस हो सके. अक्सर इस ट्रेनिंग में लड़कियों का रेप किया जाता है. और जो लड़कियां बच कर वापस आ भी जाती हैं, उनके घर वाले मर्दों को पैसे दे कर सिर्फ इसलिए बुलाते हैं, कि वो उनकी बेटी की 'वर्जिनिटी' खत्म कर सकें. जिससे वो होने वाले पति के लिए तैयार हो सके. इसके लिए वो लड़की की प्यूबर्टी आने का भी इंतजार नहीं करते. 6-7 साल की लड़कियां भी इन 'रस्मों' का शिकार हो जाती हैं.
सलोम बुघी 15 साल की थी जब उसके मां-बाप ने उसकी शादी 29 साल के लड़के से करा दी थी. लड़का उसके ही घर में मजदूरी करता था. उसकी पहले से दो पत्नियां थीं. सलोम बताती हैं:

क्लासरूम में सलोम. सोर्स: डेली रिकॉर्ड
"इस लड़के को घर में लाना मां-बाप की सोची-समझी साज़िश थी. लड़का हर रात मेरे कमरे में आकर सो जाया करता था. मेरी आंख खुलती थी और वो बिना मेरी मर्ज़ी के मेरे साथ सेक्स करने लगता था. मैं चीखना चाहती थी पर वो मेरा मुंह बंद कर देता था. अगले दिन वो चला जाता था. पापा को पता था कि रोज़ मेरा रेप होता है. पर उन्हें इस आदमी की ज़रुरत थी. वो चाहते थे ये मुझसे शादी कर ले.सलोम को एक एनजीओ ने सहारा दिया. लेकिन हर लड़की की किस्मत इतनी अच्छी नहीं होती.
दो महीने तक मैं गिड़गिड़ाती रही कि इस चीज को रोक दिया जाए. फिर मुझे पता चला मैं प्रेगनेंट हूं. मेरा स्कूल छुड़वा दिया गया. और नए पति के साथ उसके घर भेज दिया गया. ऐसा पति जो हर दिन और ज्यादा हिंसक होता जा रहा था. अपने घर ले जा कर वो मुझे मारता. उसके बीवियां मुझे गालियां देतीं. कहतीं, तुम यहां क्या कर रही हो? तुम जवान हो. कहीं और जाओ. हम नहीं चाहते तुम यहां रहो. तुम हमारे पति के पीछे क्यों पड़ी हो? मुझे लगता था सुसाइड कर लूं. मैं दर्द में थी. मैं रोती थी. मैं वर्जिन हुआ करती थी. उस आदमी ने मेरी वर्जिनिटी तबाह कर दी."
अपने बेटे के साथ सलोम. सोर्स: डेली रिकॉर्ड
कुछ घरों में ऐसा भी होता है. कि जब किसी लड़की की बुआ, मौसी या बड़ी बहन बीमार पड़ती है, लड़की को उसका खयाल रखने उनके घर भेज दिया जाता है. जहां लड़की से ये उम्मीद की जाती है कि वो अपने मौसा, फूफा या जीजा के साथ सेक्स करे.
मर्द कॉन्डम का इस्तेमाल नहीं करते. मलावा में हर 10 लोगों में से एक HIV से इन्फेक्टेड है.
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क्या किया थेरीसा ने
शायद कभी-कभी जरूरी होता है कि कमान औरतों के हाथों में दे दी जाए. थेरीसा ने कोशिश की. समझा-बुझा कर लोगों की मानसिकता में बदलाव जाए. कि लड़की को पढ़ाना उन्हें ब्याह देने से ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. पर लोगों ने कहा, तुम होती कौन हो हमें समझाने वाली. तुम तो 5 बेटों की मां हो. तुम क्या जानो लड़की का भार क्या होता है.तो थेरीसा ने फैसला लिया कि कानून ही बदल देगी. उसने अपने अंडर काम करने वाले 50 सब-चीफों से एक इकरारनामा साइन करवाया. जिसके मुताबिक़ अब किसी नाबालिग की शादी उसकी मर्जी के बिना नहीं हो सकेगी. और अगर ऐसा हुआ, तो उनकी शादी को इल्लीगल करार कर खत्म कर दिया जाएगा. जब पता चला कि 4 चीफ ऐसे हैं, जिनके एरिया में अब भी बाल विवाह हो रहे हैं, उन्हें नौकरी से निकाल दिया. जब उन्होंने उन शादियों को खत्म करवा कर खुद को साबित किया, थेरीसा ने उन्हें फिर से नौकरी पर रख लिया.

उत्तरी मलावी के चिमोया के स्कूल में बच्चे. सोर्स: अज जज़ीरा
फिर लोगों को समझा कर, उनकी सहमति से कानून पास करवाया. जिसके मुताबिक़ नाबालिगों की शादी बैन हो गई.
लोगों ने जान की धमकियां दी. थेरीसा ने कहा, "मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. ये लड़कियां स्कूलों में वापस आ कर रहेंगीं."
पिछले तीन सालों में कचिंदामोतो ने 850 बाल विवाह इल्लीगल बता कर सभी बच्चों का दाखिला स्कूल में करवाया. जिन लड़कियों के मां-बाप पैसे नहीं दे सकते थे, उनके लिए स्पॉन्सर खोजे. या अपनी जेब से पैसे लगाए. एक ऐसा नेटवर्क फैला दिया कि जो लोग अपनी बेटियों को स्कूल नहीं भेजते थे, उनका रिकॉर्ड उसे मिल जाता था. बड़े शहरों से कामकाजी औरतों को बुलवाया, जो लड़कियों को पढ़ने और पैसे कमाने का महत्व समझा सकें.
अब थेरीसा लड़कियों की शादी की मिनिमम उम्र 18 से बढ़ा कर 21 करना चाहती हैं. "लड़कियां पढ़ेंगी तो जीवन में वो सब कुछ कर सकेंगी जो वो करना चाहती हैं."
कुछ सालों पहले तक थेरीसा चीफ नहीं बनना चाहती थी. आज कहती हैं, "मैं अपनी आखिरी सांस तक चीफ हूं."
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