शैतान क्या होता है? मसीहा ही होता है जो अपनी हवस के चलते खुद को टॉर्चर कर शैतानबन जाता है. -खलील जिब्रान--------------------------------------------------------------------------------किचन में हल्की रौशनी है. एक आदमी ऑमलेट बना रहा है. तभी एक औरत दबे पांव घुसती है.इरादा चोरी का है. अंधेरे के चलते बेडरूम का रास्ता भटक कर किचन में आ गई है. आदमीको पता चल जाता है. वो उसे धक्का देता है. पुलिस को फोन करने लगता है. औरत को कुछनहीं सूझता तो कुकर दे मारती है उसके सिर पर. फिर कड़ाही. तवा चला देती है. आदमीगिर जाता है. वो औरत उसके फोन से उसकी आंखें कूचने लगती है. सरौता लेकर उसकी गर्दनकाटने लगती है. पूरी कट नहीं पाती. सरौता जाम हो जाता है. आदमी चीखने लगता है. वोऔरत डस्टबिन से कूड़ा निकाल कर उसके मुंह में ठूंसने लगती है. इंसान चोक होने लगताहै. फिर वो औरत भगोने में पानी भर लेती है. आदमी का मुंह उसमें डुबा देती है. वोछटपटाता रहता है, पर मरता नहीं. औरत थक जाती है. छोड़ देती है. कुछ देर बाद वो आदमीखड़ा हो जाता है. तो फिर वो औरत उसका सिर पकड़कर जलती गैस में झोंक देती है.-------------------------------------------------------------------------------- क्या वो औरत ये सोच के आई थी कि उसे किसी को ऐसे मारना है? वो तो बस चोरी करने आईथी. पर अगर कोई किसी को इस हिसाब से मारना चाहे और वो ना मरे तो?कहानी माइक मैलॉय की जिसे मरना पसंद नहीं थाजनवरी 1933 के जाड़े की एक रात थी. माइक मैलॉय लोकल ठेके पर दारू पी रहा था. 35-40साल का मैलॉय होमलेस इंसान था. दुनिया में कोई था नहीं उसका. ऐसा नहीं था कि वोशुरू से ऐसा ही था. पहले न्यूयॉर्क में स्टेशन इंजीनियर था. पर ग्रेट डिप्रेशन मेंनौकरी चली गई थी. तो अमेरिका के बहुत सारे लोगों की तरह वो भी दारू में जीवन खोजताथा.पर उस रात कुछ अलग हो रहा था. उसके 5 दोस्त उसे खूब पिला रहे थे. एक दोस्त का बारथा. मैलॉय उसी में बैठा था. इतनी मंदी में कोई उसे पिला क्यों रहा था? फ्री में.मैलॉय को सब कुछ जादू लग रहा था. कि दुनिया में इंसानियत अभी बची है.इस इंसानियत की नींव 1932 में रखी गई थी. बार का मालिक टोनी अपने दोस्तों के साथप्लान बनाता था कि कैसे पैसे कमाये जाएं. मंदी का दौर चल रहा है. खूब सोचने के बादपता चला कि किसी के इंश्योरेंस से पैसे कमाए जा सकते हैं. पर उस इंसान को मरनापड़ेगा. पर कौन मरेगा? 5 दोस्तों में कोई तैयार नहीं था.टोनीतो एक दोस्त जोसेफ ने अपने फर्जी भाई निकोलस के नाम पर तीन इंश्योरेंस पॉलिसीज लेली. जोसेफ उसी बार में बारटेंडर था. कुल 20 लाख रुपये की पॉलिसी थी. अगर निकोलस मरजाता तो 40 लाख रुपये मिलने वाले थे. पर निकोलस बनेगा कौन, ये जटिल प्रश्न था.इंश्योरेंस फ्रॉड को लेकर अमेरिका में एक उपन्यास भी लिखा जा चुका था. बाद में इसपर फिल्म भी बनी थी. The Double Indemnity. पर ये घटना 1927 की थी. रुथ स्नाइडर नेअपने इंश्योरेंस एजेंट के साथ मिलकर अपने पति को मार दिया था. रुथ को एजेंट सेप्यार हो गया था. पर मर्डर के बाद बड़ा कन्फ्यूजन हो गया था. प्यार था कि नहीं, पतानहीं चल रहा था. पर दोनों पकड़ लिए गये थे. मौत मिली थी कोर्ट से. तो फ्रॉड करनाआसान नहीं था दोस्तों के लिए.फिल्म The Double Indemnity का पोस्टरतभी पांचों की नजर पड़ी मैलॉय पर. कोई था नहीं इसका. इसकी मौत को कोई नोटिस नहींकरता. इसको निकोलस बनाया जा सकता था. क्योंकि वो डिप्रेशन का दौर था, लोग दारू पीके जान दे रहे थे. मैलॉय को खूब पिलाया गया. दिन-रात. पर जितना पीता, उसकी प्यासबढ़ती जाती. वक्त के साथ मैलॉय की कैपेसिटी बढ़ती गई. मरने का कोई चांस नजर नहीं आरहा था.प्लान पर प्लान बनते गए, पर हर बार मैलॉय दारू पीते मिलतातो दारू दोस्तों ने नया प्लान बनाया. मिथेनॉल मिलाकर दारू पिलाने लगे. मिथेनॉल जहरका काम करता है. मारने से पहले अंधा कर देता है. पर मैलॉय मिथेनॉल भी पी गया. पीनेके बाद और पैग मांगने लगा. तो एक सड़ी हुई मछलियों का सैंडविच तैयार किया गया.इसमें कीलें, शीशे के टुकड़े सब मिलाए गये. कि खाते ही मैलॉय मर जाएगा. पर खाने केबाद उसने एक और सैंडविच मांग लिया. झल्लाकर पांचों ने दारू में हर चीज मिलाकरपिलाना शुरू कर दिया. कि किसी ना किसी चीज से तो मर ही जाएगा. पर मैलॉय को कुछ नहींहुआ.टोनी का बारफिर जनवरी 1933 का महीना आया. पांचों कई दिन से मैलॉय को पिला रहे थे. ठंड कड़ाकेकी थी. तय हुआ था कि अबकी प्रकृति का सहारा लेकर मौत दी जाएगी मैलॉय को. जब मैलॉयपी के लुढ़क गया तो उसे बार से दूर एक खुली जगह में ले जाया गया. वहां तापमान -26डिग्री सेल्सियस था. उसके कपड़े फाड़ दिए गए. उसके ऊपर कई लीटर ठंडा पानी डाला गया.फिर वहीं छोड़कर लोग चले आये. वो स्थिति किसी को भी मारने के लिए पर्याप्त थी.पर अगले दिन जब पांचों बार में गुड न्यूज का इंतजार कर रहे थे, मैलॉय ने आकर दारूका एक पैग मांग लिया.फिर मौत हुई मैलॉय की, पर मरते-मरते वो सबूत को अपनी नसों में छुपा के गया थाइसके बाद पांचों ने एक नये लड़के को अपने साथ जोड़ लिया. 23 साल का ग्रीन टैक्सीड्राइवर था. ग्रीन ने मैलॉय में टैक्सी मार दी और भाग गया. मैलॉय का कुछ पता नहींचला. पांचों दोस्त मॉर्चरी में घूमते रहे. अखबार खंगालते रहे. पर बॉडी नहीं मिल रहीथी. सप्ताह भर बाद मैलॉय फिर बार में आकर पी रहा था.फिर नये लड़कों को जोड़ा गया. फिर से एक्सीडेंट कराया गया. पर इस बार भी मैलॉय कीसिर्फ हड्डियां टूटीं. पागल होकर पांचों ने तय किया कि अब खुद हाथ डालना पड़ेगा. 22फरवरी को मैलॉय को खूब पिलाया गया. और उसके बाद गैस की पाइप निकालकर उसके मुंह मेंठूंस दिया गया. 20 मिनट के अंदर मैलॉय मर गया. सांस नहीं ले पाया था. पर जब डॉक्टरआया तो वो हत्या को पकड़ नहीं पाया. उसने लोबर न्यूमोनिया को मौत की वजह बताया.यहीं पर मैलॉय मरा थाइंश्योरेंस के पैसे मिल गये. एजेंटों को कुछ घूस दी गई. पर मैलॉय की बॉडी को बिनाकोई रिवाज फॉलो किये दफना दिया गया. और यही वजह बना पांचों के पकड़ाने का.बार में एक लड़ाई हुई. और एक मर्डर हो गया. बार के मालिक टोनी को पकड़ पूछताछ होनेलगी. इसी बीच पता चला कि ये लोग इंश्योरेंस के बेनिफिशियरी हैं. तो पुलिस ने मैलॉयकी बॉडी निकलवा ली कब्र से. उस वक्त वहां फॉरेंसिक पर बड़ा रिसर्च हो रहा था. तुरंतपता चल गया कि मैलॉय की नसों में कार्बन मोनो ऑक्साइड भरी थी. ये गैस भारी होती है,जल्दी निकलती नहीं.मैलॉय की डेड बॉडीकेस चलने लगा. पांचों में से चार को मृत्युदंड मिला. 1934 में दे भी दिया गया.मैलॉय की कहानी अमर हो गई. पर मैलॉय नहीं.(Reference- thejournal.ie)-------------------------------------------------------------------------------- दुनिया की सबसे पहली पॉर्न स्टार की डरा देने वाली कहानीकुचल के मारा, जलाया, फिर लाश को जानवरों को खिला दियाये दिल्ली का सबसे ज्यादा रिसर्च किया हुआ मर्डर है, रूस की खुफिया एजेंसी केस्टाइल में