'मैं तो तंदूरी मुर्गी हूं यार गटका ले सैयां एल्कोहोल से' एक 'आइटम गर्ल' पर्दे परफिल्म के नायक को जब खुद को खाने का ऑफर देती है, तो आप 'गटकने' से क्या समझते हैं?ये समझते हैं कि एक औरत, वो औरत जो न फिल्म की हिरोइन है, न हीरो की पत्नी है,बल्कि एक नचनिया है, या रंडी भी हो सकती है, हीरो को सेक्स करने का न्योता दे रहीहै. फिल्म की हिरोइन 'अच्छे चरित्र' की होती है इसलिए वो इस तरह का इन्विटेशन नहींदे सकती. लेकिन ये न्योता सिर्फ हीरो को नहीं, उसे पर्दे पर देख रही करोड़ों आंखोंको भी है, जो सिर्फ आंखों भर से ही 'आइटम गर्ल' को शराब के साथ निगलना चाहेंगी. येआंखें पुरुषों की हो सकती हैं, औरतों की हो सकती हैं, या उनकी हो सकती हैं जो अपनेआप को स्त्री या परुष में बांटना सही नहीं समझते. *** बीते दिनों नैन्डोज चिकेन काऐड हिंदुस्तान टाइम्स में छपा. ऐड में भी एक न्योता था. जैसे 'फेविकोल' गाने मेंलड़की खुद को मुर्गी बताती है, इस ऐड में ठीक उसका उल्टा हो रहा था. मुर्गियां कहरही थीं, आओ, हमारे 'बन्स', जांघें और स्तन छुओ. हमें दोनों हाथों से खाओ. क्योंकितुम्हारा छूना हम माइंड नहीं करेंगे. ऐड को लेकर सोशल मीडिया में खूब बवाल हुआ.लोगों ने नैन्डोज को बार बार ट्वीट कर शर्मसार कर डाला. नैन्डोज ने ट्वीट कर लोगोंसे माफ़ी मांगी.-------------------------------------------------------------------------------- ऐड में प्रॉब्लम क्या है? जब मैंने इस ऐड को देखा, तो गुस्सा नहीं आया. बल्किदिमाग इस तरह सोचने लगा कि क्या हम सेक्स और औरतों को जोड़ कर देखते समय नैतिक होजाते हैं? क्या हमें इस बात से तकलीफ होती है कि एक औरत किसी दूसरी औरत या पुरुष कोखुद को खाने के लिए इन्वाइट कर रही है? क्या हमें 'आइटम सॉन्ग' से भी यही तकलीफहोती है? पर बात यहां खत्म नहीं होती. क्योंकि नैन्डोज का ऐड एक ऐसी दुनिया गढ़ने कीकोशिश करता है जो भारतीय लोगों को उपलब्ध नहीं है. जो उनके 'स्वप्नदोष' में बनती औरखत्म हो जाती है. जहां वो अपने पसंद की औरत या पुरुष को दोनों हाथों से पकड़ कर खासकते हैं. इस औरत या पुरुष के साथ उन्हें प्रेम नहीं करना होता, उनसे शादी नहींकरनी होती. ये वो होते हैं जो आपके नहीं होते.-------------------------------------------------------------------------------- ऐड में जांघें और स्तन हैं, बालों भरी छाती क्यों नहीं? जिस गोश्त को नैन्डोज काग्राहक खाने वाला है, उसका जेंडर हमें नहीं पता. जांघें और स्तन तो पुरुषों के भीहोते हैं, भले ही औरतों जैसे न होते हों. ऐसा भी हो सकता है कि एक पुरुष दूसरेपुरुष या औरत को खुद को खाने के लिए इन्वाइट कर रहा हो. तो हम ये क्यों मान लेतेहैं कि ऐड एक औरत की आवाज में छापा गया है. क्या ये हमारी बंद और छोटी 'स्ट्रेट'सोच का नतीजा है? ये बात सही है कि दुनिया के औसत लोगों की सोच 'स्ट्रेट' होती है.पर अगर ऐड में खाने के लिए बुलाती आवाज औरत की नहीं, तो बात बालों से भरी छाती कीक्यों नहीं हो रही है? एल्कोहोल से मुर्गी ही क्यों गटकी जाती है, मुर्गा क्योंनहीं? खाने वाला 'सैयां' है, सजनी क्यों नहीं?-------------------------------------------------------------------------------- औरत गोश्त और अंगूर है, सूखी रोटी क्यों नहीं? 'अंगूर का दाना हूं सुई न चुभोदेना जो सुई चुभेगी तो रस टपकेगा जो रस टपकेगा तो किसमिस बन जाउंगी' क्योंकि ये औरतलज़्ज़त की चीज़ है, सिर्फ पेट भरने की नहीं. नायक का पेट तो फिल्म में रोल कर रहीपत्नी से भी भर सकता है. फिल्म देखने वालों का भी. लेकिन 'आइटम' फिल्म में लज़्ज़तलेकर आता है. 'रस' लेकर आता है. जैसे नैन्डोज आपको वो लज़्ज़त देगा जो आम दिनों मेंपुरुषों को नहीं मिलती. यानी मनपसंद लड़की को दोनों हाथों से पकड़ना. पुरुष इस चिकेनको खा कर उस रेप और हैरेसमेंट का मजा ले सकते हैं जिसे वो किसी आम दिन पर इसलिएनहीं कर पाते क्योंकि लड़कियां बुरा मान जाती हैं. तो नैन्डोज के मुताबिक बुरा माननालड़कियों का प्रॉब्लम है. पुरुष दोनों हाथों से पकड़ कर उनका सेवन करने की इच्छा रखे,इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं. नैन्डोज पुरुषों की सभी दबी हुई कुंठाओं को बाहर लाने केलिए रची गई एक अलग दुनिया है.-------------------------------------------------------------------------------- सेक्स नॉन-वेज क्यों है, वेज क्यों नहीं? फोन पर कभी-कभी sms आते हैं. नॉन वेजजोक्स के लिए सब्सक्राइब करें. नॉन-वेज का मतलब वहां सेक्स होता है. हमारेडिस्कोर्स में, जो कि मूलतः ब्राह्मणवादी है (ऐसा मेरा मानना है), में जो वेज है,वो नैतिक है. नॉन-वेज का अर्थ 'बुरी' चीजों से लगाया जाता है. जो अनैतिक हैं, अधर्महैं. जैसे सेक्स का आमंत्रण देती औरत. उस औरत का शरीर इसीलिए नॉन-वेज है. मंटो कीकहानी का टाइटल याद आता है, 'ठंडा गोश्त'. जहां गोश्त का अर्थ लड़की के शरीर से है.-------------------------------------------------------------------------------- गोश्त खाना मर्दों का काम है बात जब खाने की आती है, तो वो मर्द ही होता है जिसकेदिल का रास्ता उसके पेट से होकर जाता है. जिस औरत को मर्द 'भोग' की निगाह से नहींदेख रहा होता है, वो वह औरत होती है जो किचन में उसके लिए गोश्त पका रही होती है.औरत तो अंत में खाती है. पंजाब चले जाइए. जश्न के मौके पर एक पुरुष दूसरे से कहेगा,'भाई आज तो मुर्गा फाड़ देंगे.' बात ये नहीं कि औरतों को गोश्त खाना पसंद नहीं. बातये है कि गोश्त को खाना एक मर्दाना काम है. पंजाब की बात तो महज एक उदाहरण भर है.दूसरे विश्व युद्ध के समय जब अमेरिका का सारा पैसा सैनिकों को मेंटेन करने में जारहा था, देशवासियों से अपील की गई थी कि गोश्त खाना बंद कर दें. जिससे लड़ रहेसैनिकों को पर्याप्त गोश्त मिल सके. युद्ध पुरुषों का एरिया रहा है. घर औरतों का.गोश्त पुरुषों की प्रॉपर्टी रहा है. जैसे औरत पुरुषों की प्रॉपर्टी रही है. इस तरहएक पितृसत्तात्मक दुनिया में, जिसमें देश की सीमाओं से लेकर उसकी अर्थव्यवस्था तकका फैसला पुरुष करते आए हैं, उसके लिए औरत और गोश्त की जगह एक ही होती है: वो,जिसका सेवन किया जा सके. जिस तरह लोग गोश्त के लिए जानवरों की खेती करते हैं, उसीतरह औरतों को घर में रखकर घर का काम करने के लिए ट्रेन किया जाता है. घर के जानवरहों या घर की औरत, दोनों ही अगर घर की सीमा लांघ लेते हैं, तो जंगली हो जाते हैं.और खाने लायक नहीं बचते. पुरुष का पुरुषत्व फिर इस बात में होता है कि कैसे उनकाशिकार कर, उन्हें अपने अधीन बना कर, उनका सेवन कर सके.-------------------------------------------------------------------------------- ये सिर्फ नैन्डोज की ही सोच नहीं ये ऐड देखिये. हैना फ़र्गशन और पेरिस हिल्टनबिकिनी में टेक्सास थिक बारबेक्यू बर्गर का प्रचार करती हैं. प्रचार में आप जोगोश्त देखते हैं, जाहिर सी बात है, सिर्फ बर्गर के अंदर नहीं है.https://www.youtube.com/watch?v=EI3Qp8XHGnA ये अमेरिकी रैपर लुडाक्रिस के 2003में आए एल्बम 'चिकेन-एन-बियर' का कवर है. लुडाक्रिस के चारों तरफ चिकेन और बियर है.लेकिन वो एक 'सेक्सी' औरत के पांव को चबा लेने के लिए मुंह खोले बैठे हैं. और फिरये रहा नैन्डोज का ही खुद का एक पुराना ऐड: डबल ब्रेस्ट, जूसी, बाउंसी बर्गर का.हिंदी में अनुवाद करें तो बर्गर दो स्तनों से बना है, रसीला है, और उछलता है. ऐडकिस हद तक डबल मीनिंग है, इसे आप खूब समझते हैं. और विडियो में देख भी सकते हैं. येसीन बीते दिनों आई एडल्ट कॉमेडी फिल्म 'क्या कूल हैं हम' ने पूरा-पूरा टेपा था.https://www.youtube.com/watch?v=k97AIRy5Z5U--------------------------------------------------------------------------------सिर्फ नैन्डोज का ऐड बनाने वाले को दोष मत दीजिए हमारे डिस्कोर्स में औरत कीगैरमौजूदगी सिर्फ विज्ञापनों में ही नहीं दिखती. बल्कि ऐसे विज्ञापन बनना तोस्वाभाविक हो जाता है जब औरत हमारी अर्थव्यवस्था, साहित्य से लेकर भाषा तक से गायबरही है. ठीक उसी तरह जैसे वो जानवर गायब रहते हैं जिनका गोश्त आप खाते हैं. आपमुर्गा नहीं, 'चिकेन' खाते हैं, सुअर नहीं, 'पोर्क' खाते हैं, गाय नहीं, 'बीफ' खातेहैं. ऐसा आप पोर्क और बीफ को उनके धार्मिक एंगल से अलग कर देख पाएंगे. यानी जब आपउसे महज गोश्त की तरह देखेंगे. और यहां 'आप' का अर्थ पुरुषों से नहीं, सभी इंसानोंसे लगाया जाए. फेमिनिस्ट कैरल ऐडम्स अपनी किताब 'द सेक्शुअल पॉलिटिक्स ऑफ मीट' मेंलिखती हैं जिस तरह ये जानवर 'गोश्त' की बनी हुई धारणा से गायब रहते हैं, ठीक उसीतरह औरत आपकी भाषा से तब गायब रहती है जब आप इंडिया के क्रिकेट मैच जीतने पर कहतेहैं कि किस तरह आपकी टीम ने विपक्षी टीम का 'रेप' कर दिया. या जब आप कहते हैं,'भैनचोद आज ट्रैफिक बहुत है', आप किसकी बहन की बात कर रहे होते हैं, आपको मालूमनहीं होता. सेक्शुअल हिंसा महज एक रूपक की तरह इस्तेमाल होती है. नैन्डोज के ऐड मेंभी रूपक है. औरत गायब है. लेकिन कूल्हे हैं, जांघें हैं, स्तन हैं.--------------------------------------------------------------------------------नैन्डोज एक दक्षिण अफ्रीकी रेस्त्रां चेन है जो अपने स्पाइसी चिकेन के लिए दुनियाभर में मशहूर है. 26 मार्च को उनका ये ऐड हिंदुस्तान टाइम्स अखबार में छपा था. -------------------------------------------------------------------------------- रेफरेंस: 1. 'Psychology of Men and Masculinity', November 12, 2012 2. 'Men think they need to eat meat to be manly—and it’s making them sick', Quartz, June 11, 2008 3. The Sexual Politics of Meat, Carol Adams 4. Nando’s cheeky print ad stirs up trouble; ends in public apology, The Indian Express, March 27, 2016