योगी आदित्यनाथ, भगत सिंह और तिरंगा: ये सारे कांवड़ का हिस्सा कैसे बन गए!
दी लल्लनटॉप की कांवड़ यात्रा के वो नजारे, जो एक-दो साल पहले तक नहीं दिखते थे.

लाखों कांवड़ियों की भीड़. हजारों की तादाद में लाइन में लगे लोग. जहां तक नज़र जाए, वहां तक सब भगवा ही भगवा. ये नज़ारा बागपत के पुरा महादेव मंदिर का है, जहां कांवड़िए शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने के लिए इकट्ठे हुए हैं. पर बीते सालों के मुकाबले इस साल यहां की तस्वीर में बड़ा फर्क है. इस बार कांवड़ियों के कपड़ों पर शिव के अलावा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी दिख रहे हैं. कुछ कांवड़िए भगत सिंह की तस्वीर वाली टीशर्ट भी पहने हैं. भगवा झंडों के साथ-साथ तिरंगे भी दिख रहे हैं.

कांवड़ को सजाने वाले सामान के साथ बिकते तिरंगे
कांवड़िए जो कपड़े पहनते हैं, उन पर अधिकतर शिव, पार्वती और गणेश की फोटो होती है. इसके अलावा अगर किसी की तस्वीर घटती-बढ़ती है, तो वो शिव के कुनबे का ही होता है. कांवड़िए शिव-भक्ति को लेकर जटिल भी होते हैं. उनके लिए शिव से ऊपर या शिव के बराबर कोई और नहीं. लेकिन इस बार ढेर सारे कांवड़ियों की टीशर्ट पर पीछे योगी आदित्यनाथ भी छपे हैं. पूछने पर कांवड़िए बताते हैं कि उन्हें योगी पसंद हैं, इसलिए उनकी टीशर्ट पहने हुए हैं.

हमें कांवड़ियों का ऐसा ही एक ग्रुप मिला. पांच लोगों के इस ग्रुप का सबसे उम्रदराज आदमी करीब 36-37 साल का था. दाढ़ी बढ़ाए हुए. वो उन पांचों में सबसे ज्यादा बार कांवड़ यात्रा कर चुका था, इसलिए वही सबको लीड कर रहा था. कांवड़ का उसूल ही यही होता है. दूसरा शख्स जो करीब 28-29 साल का था, काफी स्मार्ट था और अधिकतर सवालों के जवाब वही दे रहा था. 24-25 साल का भी एक लड़का था. चश्मा लगाए हुए. वो तभी कुछ बोलता था, जब उसे किसी टॉपिक पर बात खत्म करनी होती थी.

बागपत का पुरा महादेव मंदिर
और ग्रुप के सबसे छोटे लड़के की टीशर्ट पर पीछे योगी छपे थे. करीब 20-21 साल का ये लड़का इससे पहले भी कांवड़ यात्रा कर चुका था. टीशर्ट के बारे में पूछने पर वो बोला कि उसे योगी आदित्यनाथ पसंद हैं. तभी उनमें से एक ने कहा कि वो सभी योगी आदित्यनाथ को पसंद करते हैं और यूपी में योगी सरकार अच्छा काम कर रही है.

ये लोग राजनीति को लेकर मुखर थे, तो हमने इनसे कुछ और सवाल भी किए. हमने उन्हें महोबा की चरखारी सीट से बीजेपी विधायक ब्रजभूषण राजपूत का वीडियो याद दिलाया, जिसमें ब्रजभूषण कह रहे थे कि अगर मुसलमानों ने राम मंदिर की राह में अड़ंगा लगाया, तो उन्हें हज यात्रा में दिक्कत आएगी. इसके जवाब में वो ज्यादा कुछ नहीं कह पाते, लेकिन ये जरूर कहते हैं कि उन्हें मुस्लिमों को हज यात्रा के लिए मिलने वाली सब्सिडी से कोई दिक्कत नहीं है.

बागपत का ये मंदिर मेन रोड से चार किलोमीटर दूर है. इस रास्ते में तमाम कांवड़िये मिलते हैं. ज्यादातर आ-जा रहे हैं और कुछ रास्ते में ही छांव में बैठे हैं. हम ऐसे ही कुछ कांवड़ियों से मिले. वो तीन लोग चादर बिछाकर सड़क पर बैठे थे. उनके शरीर पर शहीद भगत सिंह की तस्वीर वाली टीशर्ट थी और हाथ में चरस. वहां दम लगाया जा रहा था. उनकी बीड़ी जलते ही 5-6 कदम दूर बैठा एक और कांवड़िया हवा में मारता हुआ बोला कि नशेड़ियों ने कांवड़ यात्रा को बदनाम कर दिया है. इन तीनों ने उसकी तरफ देखा और फिर अपने धंधे में जुट गए.

बरेली से आए ये लोग बताते हैं कि ये भी तिरंगा लेकर चल रहे थे, लेकिन रास्ते में किसी ने इनका झंडा चुरा लिया. मंदिर के बाहर लाइन बहुत लंबी है, इसलिए ये लोग अभी यहां बैठे इंतजार कर रहे हैं.

इससे पहले जब हम उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगाजल लेने पहुंचे थे, तो वहां भी योगी आदित्यनाथ के बारे में काफी कुछ सुनने को मिला. हर की पौड़ी के ठीक बाहर जहां बोतलों और प्रसाद की दुकानें थीं, वहां लोग कांवड़ियों के डीजे के बारे में बात कर रहे थे. वो कहते हैं,
'पिछले दो हफ्ते से इन लोगों ने दिमाग थका दिया है एकदम. दिनभर डीजे बजाते रहते हैं. रातभर शोर होता रहता है. ये लोग योगी आदित्यनाथ से बहुत खुश हैं. डीजे पर तो रोक लग गई थी, लेकिन योगी ने स्पेशल परमीशन दिलवा दी.'

असल में सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर बैन लगा दिया था. इसके बावजूद कांवड़िए पहले की तरह डीजे लाते और बजाते रहे. कांवड़ का स्वरूप ऐसे ही बदल रहा है. भक्ति के साथ-साथ अब राजनीति और दुनियादारी भी इसमें शामिल हो गई है. ये एक तस्वीर है. दी लल्लनटॉप की कांवड़ यात्रा के दौरान हमें और भी ढेर सारी सूरतें देखने को मिलीं. पढ़िए उनके बारे में.
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