कांवड़ यात्रा में गंगा के घाट पर आपको मिलेंगे ये 11 तरह के लोग
दी लल्लनटॉप की नज़र से देखिए, हरिद्वार के गंगा घाट पर कैसे-कैसे लोग मिलते हैं.

कांवड़ यात्रा यानी सावन में पड़ने वाला अघोषित पर्व. हजारों-लाखों लोग कंधों पर कांवड़ लिए चले जा रहे होते हैं. मकसद सिर्फ एक- भोलेनाथ को खुश करना. उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे तमाम राज्यों से चलने वाले अधिकतर कांवड़िए गंगाजल लेने हरिद्वार आते हैं. गंगोत्री से निकलने के बाद गंगा यहीं लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध होती है. सावन में यहां हर की पौड़ी का घाट खचाखच भरा रहता है. इस दौरान आपको गंगा के घाट पर ये 11 तरह के लोग जरूर मिलेंगे:-
#1. अतिरिक्त सभ्य पुजारी

भाईस्साब... सावन में गंगा घाट पर पुजारियों से ज्यादा सभ्य कोई नहीं होता. वो इतने प्यार से आरती की थाली आपके पास लाएंगे, जैसे खुद गंगा ने भेजी हो. आरती लेंगे, तो आप बदले में बापू भी देंगे. पूजा कराने का ऑफर देते समय ये पुजारी कहते हैं कि वो सब कुछ करवा देंगे. मतलब उस समय अगर आप उनसे अंकल चिप्स में निकलने वाले पोकीमॉन कार्ड का रंग बदलवाना चाहें, तो वो ये भी करवा देंगे.
#2. पोते की तरह तिलक लगाने वाले
गणित के टीचर की तरह मान लीजिए कि आप गंगा घाट पर खड़े धारा निहार रहे हैं. ठंडी-ठंडी हवा में बड़ी मौज आ रही है. आप स्लो मोशन से पलक झपकाते हैं, तभी दादा की उम्र के एक सज्जन आपके ललाट पर तिलक चिपका देते हैं. आप सुट्ट. पता ही नहीं चला कि ये हुआ क्या. किंकर्तव्यविमूढ़ अवस्था में पांच-छ: सेकेंड बिताने के बाद जब आप उन सज्जन की आंखों में झांकते हैं, तब आपको अपने कर्तव्य का अहसास होता है. आप का हाथ अनायस ही बटुए की तरफ चला जाता है.
#3. चरसी

ये प्रजाति अगर आपको घाट पर न मिले, तो आप उस जगह को घाट मानने से इनकार कर सकते हैं. इन्हें मांस से सख्त नफरत होती है, इसलिए ये अपने शरीर का सारा मांस निचोड़ देते हैं. चरस पी-पीकर खाल काली हो चुकी होती है. आंखों का सफेद हिस्सा पीला हो चुका होता है. इनकी तरफ देखने पर ये आपको ऐसे घूरेंगे, जैसे वो अजीत डोवाल हों और आप हाफिज सईद. लेकिन अगर जम गई, तो आपको भी उनके 287 दिन पुराने गंधैले कपड़े से चरस पीने को मिल जाएगी.
#4. जल्दी में रहने वाले कांवड़िए
सावन में गंगा किनारे कांवड़िए तो मिलेंगे ही. इनमें से कुछ ऐसे होते हैं, जो बहुज्जल्दी में रहिते हैं. इनके संगठन का एक आदमी मेन रोड पर, दूसरा घाट के बाहर दुकानों के पास, तीसरा सीढ़ियों पर और चौथा घाट पर खड़ा होता है. सब के सब सीटी बजाते रहते हैं. जैसे ही जनता गंगाजल भरती है, इनकी रिले रेस शुरू हो जाती है. मां कसम, अगर उसेन बोल्ट इन्हें देख ले न, तो सीधे चुम्मी ले ले.
#5. सुस्ताते रहने वाले कांवड़िए

ये वो कांवड़िए हैं, जो आपको हरिद्वार में भी बनारस का फील देते हैं. घाट पर छितराए पड़े रहते हैं. संपदा के नाम पर एक छड़ी और एक जोड़ी कपड़ा होता है इनके पास. ऐसे चिल्ल पड़े रहते हैं, जैसे सृष्टि का अंत इन्हें यहीं अपनी आंखों से देखना है. थ्री-आइड रेवेन टाइप्स (GOT स्पेशल). ये वही हैं, जो घाट से मेन रोड पर पहुंचने में 5-6 घंटे लगा देते हैं. हर किसी से बतियाते-चोंकते जाते हैं.
#6. सेल्फी और वीडियो लभर्स

यार, ये जनता बहुत चाट होती है. इन्हें घंटा न गंगा से मतलब होता है, न घाट से और न कांवड़ यात्रा से. इनका पेट सिर्फ सेल्फी और वीडियो से भरता है. ये एक जगह पर एक ही काम करते हुए दो-तीन घंटे बिता सकते हैं. एक कोई घंटों डुबकी लगाता रहता है और दूसरा उसकी फोटो खींचता रहता है. अरे यार दूसरों को भी नहा लेने दो. हैं, छकाए बैठे रहते हैं घाट. ये नहीं कि आंखें खोलकर खुद भी कुछ देर घाट का मजा ले लें.
#7. कैमरा और कोटेशन वाली टीशर्ट देखते ही गिल्ल होने वाले
ये लोग बड़े क्यूट होते हैं. घाट पर अगर कोई भला आदमी महंगा कैमरा लिए अपना काम कर रहा है, तो ये उसी के आगे-पीछे मंडराते रहेंगे. कैमरामैन के पीछे खड़े होकर ऐसे एक्सप्रेशन देते हैं, जैसे संजय लीला भंसाली उन्हीं से डायरेक्शन सीखकर गए थे. मौका मिलते ही ये आपको बता भी देंगे कि आप पानी की फोटो कैसे खींचो कि लोग आपको राम गोपाल वर्मा मानने लगें. यही हाल टीशर्ट देखकर खुश होने वालों का है. अगर टीशर्ट पर कोई जाबड़ कोट लिखा है, तो चार-चार बार लौटकर आएंगे, आपकी छाती घूरेंगे और फिर खिलखिलाते हुए चलेंगे. बहुत प्यार से.
#8. दुनिया को झंड समझने वाले दुकानदार

जरूरी नहीं कि ये दुकानदार 30 साल से ऊपर के लोग हों. 18-20 साल के जो बच्चे भी गल्ले पर बैठे होते हैं, वो हर आने-जाने वाले को ऐसे देखते हैं, जैसे वो दुनिया का सबसे निरर्थक प्राणी हो. इनके चेहरे पर यही भाव होता है कि ऐसे जलसे तो हम सालों से देख रहे हैं, तुम लोगों को पता नहीं क्यों इसमें इतना मजा आ रहा है. ये दुनिया को झंड समझते हुए खूब गरियाते हैं, लेकिन अगर आप ग्राहक हैं, तो इनसे मृदुभाषी आपको पूरे मृत्युलोक में कोई नहीं मिलेगा.
#9. माइकल फेलप्स के चाचा

ये वो नौजवान हैं, जो 24 घंटे तैराकी के अपने हुनर का मुजाहिरा करते रहते हैं. रात में जब गंगा की धारा बहुत तेज हो जाती है, तब ये तट के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने का खेल खेलते हैं. इन्हें देखकर आपको एक बार डर लग सकता है, पर यकीन मानिए, ये वो लौंडे नहीं हैं, जो सेल्फी के चक्कर में बह जाते हैं. ये बने रहते हैं और मुफत में आपका मनोरंजन करते रहते हैं.
#10. भइया एक फोटो खींच दो
अब यार इनके बारे में क्या कहें. हम तो इनके भुक्तभोगी हैं ही, हो सकता है आपको भी इन्होंने डसा हो.
#11. पुष्पा के पति

बच्चा साधे पुष्पा के पति
ये बिल्कुल स्पेसिफिक कैटेगरी है. इसमें किसी तरह के जनरलाइजेशन की गुंजाइश ही नहीं है. हमारी टीम जब गंगा घाट पर शूटिंग कर रही थी, तब एक सज्जन कैमरे के आगे आकर खड़े हो गए. मजाक में जब उनसे कहा गया, 'हां हां... अपने घरवालों को भी बुला लो', तो उन्होंने अपनी पत्नी को आवाज दी, 'पुष्पा... ए पुष्पा... जल्दी आओ... यहां फोटो खिंच रही है.' शुक्र है उन्होंने ये नहीं पूछ लिया कि हम कितने रुपए लेकर उन्हें फोटो देंगे.
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