भारत से यूरोप कैसे पहुंच गए उपनिषद?
1760 में एक फ्रेंच सैनिक ने फ्रेंच दार्शनिक को यजुर्वेद की प्रतिलिपि भेंट की जो फ़र्ज़ी निकली. इसके बाद एक और फ्रेंच दार्शनिक भारत में वेदों की पढ़ाई करने पहुंचा
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वोल्टेयर के हाथ जब यजुर्वेद ना की किताब लगी तो उन्होंने भारत के दर्शन पर अपना नया विचार दिया लेकिन सालों बाद पता चला कि किताब नकली थी
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